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आध्यात्मिक प्रगति के लिए अज्ञानता का त्याग जरूरी : पंडित रोहित शास्त्री
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अंबाला सिटी। अगर जीव को अपने जीवन में आध्यात्मिक प्रगति करनी है तो उसको सर्वप्रथम अविद्या का सर्वनाश करना होगा। अज्ञानतापूर्ण जीव न तो समाज के लिए महत्वपूर्ण है और न ही भगवान की दृष्टि में संपूर्ण होता है। इसलिए जीव को सांसारिक यात्रा के दौरान अच्छे विचार, अध्यात्मिक ज्ञान, भगवान की भक्ति व संतों की वाणी से निकला हुआ ज्ञान मिले तो उसे ग्रहण जरूर चाहिए। यह सद्विचार सिटी के सेक्टर नौ स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पंडित रोहित शास्त्री ने कहे।
कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर धरा पर लीलाओं का प्रदर्शन शुरू किया था। उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में सर्वप्रथम पुतना राक्षसी का वध किया। इसी प्रकार द्वापर युग में श्रीराम ने सर्वप्रथम ताड़का का वध किया था। यह दोनों राक्षस प्रजाति से संबंध रखती थी और दोनों अविद्या-अज्ञानता की प्रतीक मानी गई हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का कार्यक्रम नंदभवन में चल रहा था। उस समय मां यशोदा ने बाल लला गोपाल को बैलगाड़ी के नीचे बने एक झूले में सुला दिया था। उसी दौरान भगवान लला को मारने के लिए कंस ने शकटासूर नाम के राक्षस को भेज दिया था, लेकिन भगवान ने उसका वध कर दिया।
भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही दुष्टों का सर्वनाश करना शुरू कर दिया था। आज का प्राणी भगवान द्वारा किए गए सभी प्रमाणों से भली भांति जागरूक है। भगवान का स्थान हमेशा सबसे ऊपर ही रखकर निस्वार्थ भाव से भक्ति करनी चाहिए। इस दौरान कथा व्यास पंडित रोहित शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती की गई, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धा र्पूवक भाग लेते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
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कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर धरा पर लीलाओं का प्रदर्शन शुरू किया था। उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में सर्वप्रथम पुतना राक्षसी का वध किया। इसी प्रकार द्वापर युग में श्रीराम ने सर्वप्रथम ताड़का का वध किया था। यह दोनों राक्षस प्रजाति से संबंध रखती थी और दोनों अविद्या-अज्ञानता की प्रतीक मानी गई हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का कार्यक्रम नंदभवन में चल रहा था। उस समय मां यशोदा ने बाल लला गोपाल को बैलगाड़ी के नीचे बने एक झूले में सुला दिया था। उसी दौरान भगवान लला को मारने के लिए कंस ने शकटासूर नाम के राक्षस को भेज दिया था, लेकिन भगवान ने उसका वध कर दिया।
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भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही दुष्टों का सर्वनाश करना शुरू कर दिया था। आज का प्राणी भगवान द्वारा किए गए सभी प्रमाणों से भली भांति जागरूक है। भगवान का स्थान हमेशा सबसे ऊपर ही रखकर निस्वार्थ भाव से भक्ति करनी चाहिए। इस दौरान कथा व्यास पंडित रोहित शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती की गई, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धा र्पूवक भाग लेते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
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