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Ambala News: बारिश ने छीना गरीब परिवार का आशियाना, मजबूरी में किराए की दुकान में कट रहे दिन
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गिरी हुई छत। संवाद
मुलाना। बारिश ने एक गरीब परिवार का आशियाना छीन लिया। कई दिनों से टपक रही उनकी कच्ची छत आखिरकार ढह गई, साथ ही कमरे की दीवार भी गिर पड़ी। गनीमत रही कि कमरे की जर्जर हालत को देखते हुए उसमें पहले ही भूसा भर दिया गया था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। घर के अन्य कमरे भी लगातार टपक रहे हैं, फर्श पर पानी ही पानी है। किसी भी समय बाकी छतें गिरने के डर से परिवार ने मजबूरी में किराए की एक छोटी सी दुकान में शरण ली है। परिवार का बीपीएल कार्ड बना होने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी पक्की छत योजना का लाभ नहीं मिला है।
बस भूसा ही था, वरना आज परिवार रो रहा होता
बुजुर्ग कैलाशों सैनी ने बताया कि वह अपने बेटे जसबीर, बहू, पोते और पोती के साथ रहती हैं। सावन के महीने में हुई बारिश से कच्ची छत लगातार टपक रही थी। रक्षा बंधन की सुबह करीब 9 बजे उनकी पुत्रवधु आंगन में बैठी थीं, तभी एक कमरे की छत और दीवार अचानक गिर गई। यह देख वह तुरंत भाग खड़ी हुईं, जिस कमरे की छत गिरी उसकी जर्जर हालत को देखते हुए उसमें भूसा भर दिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया । कैलाशों बताती हैं कि पूरे घर की छतें अब गिरने की कगार पर हैं।
मेहनत-मजदूरी से घर चलाना, मरम्मत का सपना दूर
कैलाशों का बेटा जसबीर ही घर का एकमात्र कमाने वाला है, जो दिन-भर मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालता है। इसी कारण घर की मरम्मत करवाना संभव नहीं हो पाया। कैलाशों ने बताया कि उन्होंने पक्की छत योजना के लिए छह बार आवेदन किया, लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली।
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किराए की दुकान में जिंदगी, दो-दो बिजली बिल का बोझ
घर की हालत बिगड़ते देख कैलाशों ने परिवार की सुरक्षा के लिए एक किराए की दुकान ले ली, जिसमें अब वे रह रहे हैं। लेकिन इस कदम से उनके खर्च और बढ़ गए हैं। अब उन्हें किराए के साथ-साथ दो-दो बिजली बिल भी भरने पड़ेंगे। कैलाशों ने सरकार से अपील की है कि उनकी छत जल्द से जल्द पक्की करवाई जाए, ताकि वे अपने घर में लौट सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार का सर्वे हो चुका है। साथ ही, आपदा प्रबंधन फंड से सहायता दिलाने के लिए पटवारी की रिपोर्ट तैयार करवाई गई है। उम्मीद है कि जल्द ही परिवार को लाभ मिलेगा।
-- प्रवीण कुमार, सरपंच, मुलाना
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बस भूसा ही था, वरना आज परिवार रो रहा होता
बुजुर्ग कैलाशों सैनी ने बताया कि वह अपने बेटे जसबीर, बहू, पोते और पोती के साथ रहती हैं। सावन के महीने में हुई बारिश से कच्ची छत लगातार टपक रही थी। रक्षा बंधन की सुबह करीब 9 बजे उनकी पुत्रवधु आंगन में बैठी थीं, तभी एक कमरे की छत और दीवार अचानक गिर गई। यह देख वह तुरंत भाग खड़ी हुईं, जिस कमरे की छत गिरी उसकी जर्जर हालत को देखते हुए उसमें भूसा भर दिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया । कैलाशों बताती हैं कि पूरे घर की छतें अब गिरने की कगार पर हैं।
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मेहनत-मजदूरी से घर चलाना, मरम्मत का सपना दूर
कैलाशों का बेटा जसबीर ही घर का एकमात्र कमाने वाला है, जो दिन-भर मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालता है। इसी कारण घर की मरम्मत करवाना संभव नहीं हो पाया। कैलाशों ने बताया कि उन्होंने पक्की छत योजना के लिए छह बार आवेदन किया, लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली।
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किराए की दुकान में जिंदगी, दो-दो बिजली बिल का बोझ
घर की हालत बिगड़ते देख कैलाशों ने परिवार की सुरक्षा के लिए एक किराए की दुकान ले ली, जिसमें अब वे रह रहे हैं। लेकिन इस कदम से उनके खर्च और बढ़ गए हैं। अब उन्हें किराए के साथ-साथ दो-दो बिजली बिल भी भरने पड़ेंगे। कैलाशों ने सरकार से अपील की है कि उनकी छत जल्द से जल्द पक्की करवाई जाए, ताकि वे अपने घर में लौट सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार का सर्वे हो चुका है। साथ ही, आपदा प्रबंधन फंड से सहायता दिलाने के लिए पटवारी की रिपोर्ट तैयार करवाई गई है। उम्मीद है कि जल्द ही परिवार को लाभ मिलेगा।

गिरी हुई छत। संवाद