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तूड़ी के दाम बढ़े, नए पशु लेने से संचालकों की न
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तरुण अग्रवाल
अंबाला सिटी। लगातार बढ़ रहे तूड़ी के दाम और कम होती आवक ने गोशाला संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। यही कारण है कि गोशालाओं ने नगर निगम और परिषद की ओर से भेजे जाने वाले गोवंश को लेने से साफ तौर पर हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या शहरवासियों के लिए भी परेशानी का सबब बन रही है।
गोशाला प्रधानों का कहना है जो तूड़ी पहले 350 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाती थी, वह अब 700 रुपये तक मिल रही है। हालात यह है कि दोगुने दाम पर भी गोशालाओं को चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर नगर निगम की ओर से भी पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। सरकारी गोशाला में शामिल सुल्लर गोशाला और टंगैल गोशाला के प्रधान भी नगर निगम की ओर से उचित फंड न मिलने की बात कह रहे हैं। हालात यह है कि जिन बड़ी गोशालाओं में छह महीने तक का स्टॉक रखा जाता था, उसमें तीन माह तक का स्टॉक रह गया है।
नगर निगम ने छोड़ा था 450 से अधिक गोवंश
नगर निगम की ओर से अभियान चलाकर सरकारी गोशाला सुल्लर और टंगैल में 450 से अधिक गोवंश छोड़े गए थे। इसके लिए निगम की ओर से छह माह तक प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन फिलहाल तीन माह की ही पेमेंट की गई है। गोशाला प्रधान की मानें तो यह फंड उनके लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि प्रत्येक गोवंश पर प्रतिदिन 50 रुपये का खर्च आता है, लेकिन अगर नगर निगम से मिलने वाली फंड की बात करें तो केवल 10 से 11 रुपये ही बनती है।
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क्यों बढ़ रही है दिक्कत
गेहूं की कम पैदावार होने के कारण इस बार तूड़ी की आवक में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। दूसरी ओर इस समय हरे चारे की भी समस्या बनी हुई है। वहीं कुछ पशुपालकों की ओर से तूड़ी का स्टॉक करना भी समस्या का कारण है। गोशालाओं की देखरेख करने वाले प्रधानों की मानें तो 15 से 20 दिनों में स्थिति पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
यह बोले गोशाला के प्रतिनिधि
सुल्लर गोशाला से हरकेश ने बताया कि तूड़ी की कमी से परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन कुछ दानी सज्जनों ने सहयोग किया तो अब स्थिति सुधरी है। वहीं नगर निगम के अधिकारी से भी बात हुई है। उन्होंने भी लंबित भुगतान देने की बात कही है।
टंगैल गोशाला के कोषाध्यक्ष मदन लाल ने बताया कि उनको नगर निगम की ओर से प्रति वर्ष केवल 97 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि उनके यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तूड़ी व चारा लगता है।
अभी गोवंश को पकड़ने के लिए ठेका लगाया जा रहा है। हमारी ओर से पशु रखने पर गोशाला को प्रति माह डेढ़ लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जिससे गोशाला संचालकों को परेशानी न हो।
--सुनील दत्त, सीएसआई, नगर निगम, अंबाला सिटी।
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अंबाला सिटी। लगातार बढ़ रहे तूड़ी के दाम और कम होती आवक ने गोशाला संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। यही कारण है कि गोशालाओं ने नगर निगम और परिषद की ओर से भेजे जाने वाले गोवंश को लेने से साफ तौर पर हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या शहरवासियों के लिए भी परेशानी का सबब बन रही है।
गोशाला प्रधानों का कहना है जो तूड़ी पहले 350 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाती थी, वह अब 700 रुपये तक मिल रही है। हालात यह है कि दोगुने दाम पर भी गोशालाओं को चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर नगर निगम की ओर से भी पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। सरकारी गोशाला में शामिल सुल्लर गोशाला और टंगैल गोशाला के प्रधान भी नगर निगम की ओर से उचित फंड न मिलने की बात कह रहे हैं। हालात यह है कि जिन बड़ी गोशालाओं में छह महीने तक का स्टॉक रखा जाता था, उसमें तीन माह तक का स्टॉक रह गया है।
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नगर निगम ने छोड़ा था 450 से अधिक गोवंश
नगर निगम की ओर से अभियान चलाकर सरकारी गोशाला सुल्लर और टंगैल में 450 से अधिक गोवंश छोड़े गए थे। इसके लिए निगम की ओर से छह माह तक प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन फिलहाल तीन माह की ही पेमेंट की गई है। गोशाला प्रधान की मानें तो यह फंड उनके लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि प्रत्येक गोवंश पर प्रतिदिन 50 रुपये का खर्च आता है, लेकिन अगर नगर निगम से मिलने वाली फंड की बात करें तो केवल 10 से 11 रुपये ही बनती है।
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क्यों बढ़ रही है दिक्कत
गेहूं की कम पैदावार होने के कारण इस बार तूड़ी की आवक में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। दूसरी ओर इस समय हरे चारे की भी समस्या बनी हुई है। वहीं कुछ पशुपालकों की ओर से तूड़ी का स्टॉक करना भी समस्या का कारण है। गोशालाओं की देखरेख करने वाले प्रधानों की मानें तो 15 से 20 दिनों में स्थिति पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
यह बोले गोशाला के प्रतिनिधि
सुल्लर गोशाला से हरकेश ने बताया कि तूड़ी की कमी से परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन कुछ दानी सज्जनों ने सहयोग किया तो अब स्थिति सुधरी है। वहीं नगर निगम के अधिकारी से भी बात हुई है। उन्होंने भी लंबित भुगतान देने की बात कही है।
टंगैल गोशाला के कोषाध्यक्ष मदन लाल ने बताया कि उनको नगर निगम की ओर से प्रति वर्ष केवल 97 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि उनके यहां प्रतिदिन 12 क्विंटल तूड़ी व चारा लगता है।
अभी गोवंश को पकड़ने के लिए ठेका लगाया जा रहा है। हमारी ओर से पशु रखने पर गोशाला को प्रति माह डेढ़ लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जिससे गोशाला संचालकों को परेशानी न हो।
--सुनील दत्त, सीएसआई, नगर निगम, अंबाला सिटी।