Haryana: मशरूम की जलेबी का स्वाद चखा रहीं जींद की सुनीता, पढ़ें महिला के संघर्ष का सफर
सुनीता और उनके पति अशोक को वर्ष 2015 में विचार आया कि क्यों न वह मशरूम से मिठाई बनाएं जो लाेगों को स्वस्थ भी रखे। ऐसे उन्होंने एक स्टार्टअप शुरू किया। एचएयू के एग्रीबिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर से ट्रेनिंग भी ली और आज वह 12 किस्मों के मशरूम से मिठाई बनाते हैं।
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कहतें हैं कि जब एक महिला ठान लेती है तो वह आसमान तक भी जा सकती है। उसके लिए सभी सम्मानों से बढ़कर अपना कर्म होता है। जींद के इगराह गांव की सुनीता पर यह बात सटीक बैठती है। दरअसल अंबाला के गांधी मैदान में मेला लगा हुआ है जिसमें जींद के इगराह गांव से सुनीता, उनके पति अशोक और बेटा आए हैं। यह लोगों को मशरूम की मिठाइयां, मशरूम के पकोड़े व अन्य उत्पादों का जायका चखा रहे हैं।
वर्ष 2010 में घर में उगाया था मशरूम
सबसे पहले सुनीता और उनके पति अशोक ने वर्ष 2010 में 250 वर्ग गज के मकान से मशरूम की खेती शुरू की थी। इसके बाद अच्छा मुनाफा मिला तो हरियाणा के करनाल और अब हिमाचल प्रदेश में भी अपने मशरूम को उगाते हैं। यहां सब कुछ ठीक चल रहा था कि उन्होंने देखा कि देश में प्रति व्यक्ति एक साल में 8 से 12 ग्राम ही मशरूम का सेवन करता है। कारण पता किया तो मालूम चला कि कई लोग तो मशरूम को मांसाहार मानते थे। यहीं से उन्होंने ठाना कि वह इस भ्रांति को लेकर लोगों को जागरुक करेंगी।
वर्ष 2015 में मशरूम की मिठाई बनाने का आया विचार
सुनीता और उनके पति अशोक को वर्ष 2015 में विचार आया कि क्यों न वह मशरूम से मिठाई बनाएं जो लाेगों को स्वस्थ भी रखे। ऐसे उन्होंने एक स्टार्टअप शुरू किया। एचएयू के एग्रीबिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर से ट्रेनिंग भी ली और आज वह 12 किस्मों के मशरूम से मिठाई बनाते हैं। जिसमें मशरूम की जलेबी, मशरूम के लड्डू, बर्फी, कलाकंद, मशरूम के रसगुल्ला आदि शामिल हैं। उनकी जींद में दो स्थानों पर दुकानें भी हैं जहां से देश विदेश में मशरूम जाता है। इससे पहले भी सुनीता को राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। वह एग्री समिट में भी अपना हुनर दिखा चुकी हैं।