फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Population increased but the number of buses decreased

जनसंख्या तो बढ़ी पर कम होती गई बसों की संख्या

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 01:00 AM IST
विज्ञापन
Population increased but the number of buses decreased
अंबाला शहर स्थित रोडवेज डिपो में खड़ी बसें। - फोटो : Ambala
28 साल पहले जिले की जनसंख्या के आधार पर बसों की संख्या निर्धारित की गई थी। इसके बाद जिले की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। इसके विपरीत बसों की संख्या बढ़ने की बजाय कम होती जा रही है। वर्ष 1993 में 1991 की मतगणना के आधार पर अंबाला डिपो और नारायाणगढ़ सब डिपो के बेड़े में 250 बसें निर्धारित की गई थीं। जिनकी संख्या लगातार कम होती गई।
विज्ञापन

इस समय की बात करें तो अंबाला डिपो में कुल 180 बसें ऑनरूट चल रही हैं। 137 बसें अंबाला डिपो व 43 बसें नारायणगढ़ सब डिपो से संचालित हो रही हैं। इनमें 20 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही हैं। दूसरी ओर, सरकार की ओर से बस कंडम पॉलिसी में बदलाव किया गया है। अगर, पुरानी पॉलिसी के बस को कंडम घोषित किया जाता तो यह संख्या केवल 140 ही रह जाती, क्योंकि इस समय 40 बसें ऐसी हैं जो 8 साल पूरे कर चुकी हैं। अब नई पॉलिसी के तहत इन्हें अगले सात साल तक चलाया जाएगा।
विज्ञापन

यह है पहले और अब की स्थिति
जानकारी के अनुसार 1991 में अंबाला जिले की जनसंख्या करीब 806482 थी। इसके बाद 2001 में अंबाला की जनसंख्या 10.14 लाख थी। 2011 की जनसंख्या में यह आबादी 11.36 लाख थी। 2011 की जनगणना को हुए दस साल पूरे हो चुके हैं, जल्द ही नए आंकड़े जारी होंगे। वास्तविक तौर पर आंकड़े और अधिक बढ़कर सामने आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रतिदिन करीब 35 हजार किलोमीटर चलती है बसें
प्रतिदिन अंबाला डिपो की बसें करीब 35 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। इस बीच 20 हजार यात्री इन बसों में प्रतिदिन सफर करते हैं। इसमें ग्रामीण और लंबे रूट के यात्री शामिल हैं। प्रतिदिन इससे अंबाला डिपो को करीब 20 लाख रुपये की आमदनी होती है। जब नई बसें आ जाएंगी तो रोडवेज की आमदनी भी बढ़ेगी। साथ ही यात्रियों को भी काफी फायदा मिलेगा।
बसें कम और कर्मचारी ज्यादा
अंबाला डिपो में करीब 300 ड्राइवर व 350 कंडक्टर हैं। जबकि बसों की संख्या काफी कम है। कर्मचारियों की संख्या अधिक होने के कारण वे भी बसों के आने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अगर बसें रोडवेज डिपो में पर्याप्त मात्रा में आ जाएं तो कर्मचारियों को भी इससे राहत मिलेगी।
कम बसों के कारण यह आ रही है समस्या
लगातार बसों की संख्या कम होने के कारण रूटों में लगातार कटौती हो रही है। वहीं, जहां पहले बसें ज्यादा चक्कर लगाती थीं, उनके फेरो में भी कटौती की जा रही है। इसके अलावा बसों की कम संख्या होने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। सुबह और शाम के समय कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बसों के दरवाजों पर लटक कर व छतों पर चढ़कर सफर करना पड़ता है। दूसरी ओर, रोडवेज बसों की संख्या कम होने का फायदा निजी बस संचालकों को हो रहा है।
सरकार ने रोडवेज बसें खरीदने का एलान किया है। मगर, अभी तक रोडवेज के बेड़े में बसें नहीं पहुंची हैं। जहां पर बसों की बॉडी लगाई जा रही है, वहां अभी सामान तक नहीं पहुंचा है। जोकि सरकार की लेटलतीफी को दिखाता है। 2014 में प्रदेश में 4200 बसें थीं, जोकि 7 साल में कम होकर केवल 28 सौ रह गई है।

-महावीर पाई, डिपो सचिव, हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन, संबंधित सर्व कर्मचारी संघ।
इस समय 180 बसें ऑनरूट चल रही हैं। इनमें 137 बसें अंबाला डिपो की हैं और 43 नारायणगढ़ सब डिपो की। इनमें 20 बसें किलोमीटर स्कीम की हैं, जो प्रतिदिन चल रही हैं।
-मोहन लाल, डीआई, रोडवेज डिपो अंबाला।

अंबाला शहर स्थित  रोडवेज डिपो में खड़ी बसें।

अंबाला शहर स्थित रोडवेज डिपो में खड़ी बसें।- फोटो : Ambala

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed