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मैदान में पसीना बहाने के बाद होस्टल में अव्यवस्थाओं से जूझ रहे खिलाड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 01:06 AM IST
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Players struggling with disturbances in the hostel after sweating in the field
अंबाला। प्रदेशभर के 25 खिलाड़ियों ने अंबाला में खुली फुटबॉल की रिहायशी अकादमी का हिस्सा बनने का सपना तो पूरा कर लिया, लेकिन मैदान में उतरने से पहले खेल विभाग द्वारा अधूरे हॉस्टल में अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। आनन-फानन में खिलाड़ियों को हॉस्टल के ऐसे कमरों में ठहरा दिया, जहां न तो खिड़कियों पर पर्दे हैं, न ही कूलर और अलमारी की व्यवस्था है।
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खेल विभाग ने किराए से पलंग, गद्दे व तकिए डालकर दिए। ऐसे में सुबह-शाम मैदान में पसीना बहाने के बाद खिलाड़ियों को हॉस्टल में अव्यवस्थाओं से तीन-चार होना पड़ रहा है। यहां तक कि कुछ कमरों में पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण दूसरे कमरों से बाल्टियों में पानी लाना पड़ रहा है।
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बता दें कि प्रदेशभर में से केवल अंबाला को फुटबॉल की रिहायशी अकादमी के लिए चुना गया था। 23 फरवरी को हुए ट्रायल में 25 खिलाड़ियों का चयन हुआ था। 2 अप्रैल से छावनी के रॉबर्ट पवेलियन मैदान में प्रशिक्षण शुरू हो गया है। सुबह दो व शाम को तीन घंटे कोच फुटबॉल का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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फोटो नंबर -38
पर्दे न होने पर सीधी लगती है धूप
यमुनानगर निवासी मनोज ने बताया कि फुटबॉल का प्रशिक्षण लेने के लिए अकादमी हॉस्टल के जिस कमरे में ठहराया गया है वहां काफी सुधार होना है। खिड़कियों पर पर्दे न होने के कारण दिन में धूप सीधी पड़ती है, इस कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
फोटो नंबर -39
सामान रखने के लिए अलमारी तक नहीं
कैथल निवासी बलकार ने बताया कि हॉस्टल के कमरे में तोलिया तो कभी चादर ओढ़कर गुजारा करना पड़ता है। खाने की व्यवस्था अच्छी है, लेकिन सामान रखने के लिए अलमारी तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। सामान को फर्श पर रखना पड़ता है।
फोटो नंबर -40
पानी की व्यवस्था नहीं
यमुनानगर निवासी कृष ने बताया कि कमरों में पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनके कमरे की पाइप लाइन में पानी ही नहीं आता। दूसरे कमरे से बाल्टी से पानी लाना पड़ता है। न ही कमरे में कूलर है। मैदान से आने के बाद बेहद परेशानी होती है।

वर्जन
पीडब्ल्यूडी को हॉस्टल के फर्नीचर व अन्य काम के लिए पत्र लिखा हुआ है। कुछ परेशानियां हैं, उन्हें जल्द दूर कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था है तो उसमें थोड़ा समय लगता है।
ज्योति, जिला खेल अधिकारी
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