फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   patient is going stray for lab test in Minister constituency

मंत्री के शहर में लैब टेस्ट को भटकते हैं मरीज

Sat, 13 Feb 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला Updated Sat, 13 Feb 2016 12:51 AM IST
विज्ञापन
patient is going stray for lab test in Minister constituency
सेहत मंत्री के शहर में कैंट और सिटी सिविल अस्पतालों में मरीजों को लैब टेस्ट के लिए भटकना पड़ रहा है। डाक्टर मरीजों को इलाज के दौरान जरूरी टेस्ट पर्ची पर लिखकर देते हैं, लेकिन दोनों अस्पताल में लैब टेस्ट करने वालों की अपनी मनमर्जी चलती है। टेस्ट करने वाले ये कर्मचारी बारह बजे के बाद टेस्ट करना बंद कर देते हैं।
विज्ञापन

उसके बाद आलम यह रहता है कि हाथों में पर्चियां लिए मरीज और उनके तीमारदार उनके पास लैब टेस्ट करवाने के लिए खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हे अटैंड करना तो दूर, लैब टेस्ट के कर्मचारी उनकी बात सुनना भी मुनासिब नहीं समझते। स्थिति यह रहती है कि मरीज मौके पर खड़े लैब टेस्ट करने वालों के आगे हाथ जोड़कर उनसे टेस्ट के लिए गिड़गिड़ाते रहते हैं, लेकिन टेस्ट करने वाले कर्मचारी उन्हे बुरी तरह से फटकार कर वहां से भगा देते हैं। इमरजैंसी स्थिति में भी मरीजों का लैब टेस्ट नहीं किया जाता, अंतत: मरीजों को महंगे दामों पर प्राइवेट टेस्ट  करवाने को मजबूर होना पड़ता है। लेकिन अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर मरीज तो मन मसोसकर वापस अगले दिन आने के लिए लौट जाते हैं।
विज्ञापन



-भटकने के बाद लौट जाते हैं मरीज-

-केस -एक-

नागरिक अस्पताल में टेस्ट करवाने पहुंचे जेबी शर्मा का कहना है कि वे डाक्टर के पास चैकअप के लिए गए थे, पहले तो डाक्टर के पास ही काफी भीड़ थी। जैसे-तैसे नंबर आया, तो डाक्टर ने जरूरी टेस्ट के लिए लैब में रेफर कर दिया। लेकिन जैसे ही वे लैब टेस्ट करवाने पहुंचे, तो वहां से उन्हे वापस भेज दिया। इतना ही नहीं लैब टेस्ट की फीस जमा करवाने वाले कर्मचारी ने उनकी पर्ची तक नहीं काटी। वे काफी देर नागरिक अस्पताल में परेशान होते रहे, अंतत: उन्हे वापस आना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

---

-केस-दो-

लैब  टेस्ट के लिए पहुंची रेखा रानी ने बताया उनकी बहन ममता की हालत बहुत ज्यादा खराब थी। डाक्टर ने उन्हे जरूरी टेस्ट जल्द करवाने के लिए लिखे थे। वे जैसे ही टेस्ट करवाने गई, तो उन्हे वहां से बुरी तरह से फटकार कर भगा दिया गया। उनके अनुसार वे काफी देर तक गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उनके लैब टेस्ट नहीं किए गए और उन्हे साफ कह दिया गया कि टेस्ट सिर्फ बारह बजे तक ही होंगे, ज्यादा जरूरी है तो बाहर से करवा लो टेस्ट।
---

केस-तीन

राहुल शर्मा ने बताया कि उसे बहुत ज्यादा घबराहट हो रही थी। हालत बिगड़ रही थी, वे ईमरजैंसी में गया और वहां डाक्टर ने उसे कई टेस्ट करवाने को कहा गया। लेकिन जब वे टेस्ट करवाने के लिए काउंटर पर पर्ची कटवाने गया, तो काउंटर वाले ने पर्ची काटने से ही मना कर दिया। बार-बार आग्रह करने पर भी उसकी पर्ची नहीं काटी गई। उसके बाद वे काफी देर तक अस्पताल में टेस्ट के लिए कई कर्मचारियों की मिन्नते करता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की। जिसके बाद उसे आर्थिक तंगी के बावजूद प्राइवेट लैब में जाकर अपने  टेस्ट करवाए।
---

-केस-चार -

टेस्ट करवाने पहुंचे मनोज कुमार ने बताया कि वे अपने दोस्त का टेस्ट करवाने गया था, वे काफी दर्द से कराह रहा था। उनके अनुसार वहां और भी कई मरीज थे, जिन्हे इमरजैंसी टेस्ट करवाने थे। लेकिन टेस्ट करवाने तो दूर, वहां उनकी पर्ची भी नहीं कटी। फिर वे लैब में गए, वहां उन्होंने टेस्ट करने वालों के आगे काफी गिड़गिड़ाया, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। मनोज कुमार ने बताया कि जिस शहर में सेहत मंत्री हो, कम से कम वहां तो व्यवस्था दुरुस्त रहनी चाहिए।

सेहत मंत्री लें सुध, दो शिफ्टों में हों टेस्ट

समाज सेवी बलभद्र देव थापर, आनंद मोहन शुक्ला, पुरुषोत्तम लाल शर्मा, हरविंद्र सिंह नीटू का कहना है कि लैब टेस्ट ही नहीं, मरीजों को अस्पताल में और भी जरूरी कामों के लिए भटकना पड़ता है। उनके अनुसार ये बहुत शर्म की बात है कि जिस जिले में सेहत मंत्री हों, वहां स्वास्थ्य सेवाओं का इतना बुरा हाल है। सेहत मंत्री को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा और स्वास्थ्य विभाग अफसरों को आदेश देने होंगे कि वे दो शिफ्टों में लैब टेस्ट की व्यवस्था करवाएं। सेहत मंत्री एक बाद खुद मौके पर जाकर इस व्यवस्था का जायजा लें, तो उन्हे सारी स्थिति और मरीजों के दर्द का अंदाजा लग जाएगा। समाज सेवियों का कहना है कि बाहर प्राइवेट में लैब टेस्ट के नाम पर बहुत ज्यादा लूट होती है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों का ही सहारा है। इसलिए सेहत मंत्री इस व्यवस्था को दुरुस्त करवाएं।

---


इस बारे में एसएमओ से रिपोर्ट लेंगे। इमरजैंसी में तो टेस्ट होने चाहिए। बाकी थोड़ी स्टाफ की कमी की वजह से कई बार ऐसा हो जाता है। लेकिन कर्मचारी मरीजों और तीमारदारों के साथ बर्ताव सही रखें और इमरजैंसी में मरीजों के लैब टेस्ट जरूर करें, उन्हे भटकने को मजबूर न करें।
-डाक्टर विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed