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पैरा ओलंपिक : राइफल शूटिंग में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करेंगे दीपक
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पैराशूटर दीपक सैनी।
- फोटो : Ambala
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अंबाला। ओलंपिक पैराशूटिंग में स्वर्ण पदक की आस लिए प्रदेश के चार शूटर मंगलवार को टोक्यो पहुंच गए। इनमें अंबाला के छोटे से गांव शाहपुर का रहने वाले दीपक सैनी भी शामिल हैं। राइफल शूटिंग में दीपक हरियाणा से एकमात्र खिलाड़ी हैं। दीपक के अलावा शूटिंग में जो खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, वे पिस्टल प्रतिस्पर्धा में दमखम दिखाएंगे।
विश्व रैकिंग आर-7 में 11वें स्थान पर काबिज पैरा शूटर दीपक ने साउथ अमेरिका के लीमा पेरू में वर्ल्ड शूटिंग पैरा शूटर मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक का टिकट पक्का किया था। ये मुकाबले 10 से 19 जून तक हुए थे। इसके बाद क्वालीफाइंग मुकाबले सर्बिया में हुए थे। यहां पर दीपक के हथियार भी गुम हो गए थे हालांकि बाद में वह नीदरलैंड से मिल गए थे। दीपक के अलावा मनीष नरवाल, सिंघराज और राहुल जाखड़ भी टोक्यो पहुंच गए हैं। ये तीनों खिलाड़ी शूटिंग में 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगे। मनीष नरवाल और सिंघराज फरीदाबाद के रहने वाले हैं जबकि राहुल झज्जर निवासी हैं।
दीपक बोला, मां के सपने को पूरा करूंगा
टोक्यो पहुंचे दीपक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मां का सपना है कि ओलंपिक में देश का नाम रोशन करूं। इसीलिए मेरा फोकस अब यही रहेगा कि मैं अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकूं। स्वर्ण पदक जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है, मेरा भी है। दीपक ने कहा कि मां के साथ देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतर सकूं, इसके लिए सभी के आशीर्वाद की इस समय मुझे सबसे ज्यादा जरूरत है।
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इन चार प्रतिस्पर्धाओं में होगा दीपक का मुकाबला
10 मीटर राइफल प्रोन
50 मीटर राइफल प्रोन
50 मीटर थ्री पॉजिशन
- 10 मीटर राइफल स्टेंडिंग
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टेलर भी बना और बिल्डिंग मैटेरियल भी बेचा, अब देश का कर रहा प्रतिनिधित्व
दीपक जब मात्र नौ साल का था तो पिता हरपाल सैनी का साय सिर से उठ गया था। इसके बाद मां के साथ-साथ बड़ी बहन और दो छोटे भाइयों का सहारा बना। पिता की इस तरह मृत्यु के बाद दीपक ने टेलर बनकर परिवार का भरण-पोषण करनी सोची। इतना ही नहीं कुछ दिन बिल्डिंग मैटेरियल भी बेचा। साथ ही खेती भी की। 2011 में दोस्त धर्मबीर को उसने शूटिंग के प्रति अपनी इच्छा जताई तो उसने पैसों का जुगाड़ किया और गन ले दी।
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कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में एक साल लिया प्रशिक्षण, बिना गुरु के पाया मुकाम
दीपक ने कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में एक साल प्रशिक्षण लिया। इसके बाद दिल्ली की करनी सिंह शूटिंग रेंज में बिना कोच के अभ्यास किया। यहीं से उन्हें एयर राइफल प्रोन प्रतिस्पर्धा में खेलने का मौका मिला। दीपक ने इसे हाथ से जाने नहीं दिया और सिल्वर मेडल जीतकर प्रतिभा दिखाई। इसके बाद 50 मीटर और 10 मीटर एयर राइफल प्रोन प्रतियोगिता में नेशनल चैंपियन बना। इसके बाद दीपक की कामयाबी का सफर बढ़ता गया और वह अब तक पोलैंड, क्रोशिया, आस्ट्रेेलिया, अमेरिका और यूएई में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुका है।
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5 साल पहले आर्थिक तंगी के चलते नहीं जा पाया था रियो ओलंपिक
2016 दीपक सैनी का नाम भी अवार्ड के लिए भी भेजा गया था। आर्थिक तंगी के चलते दीपक 2016 में रियो ओलंपिक नहीं जा पाया था। इस दौरान दीपक ने तत्कालीन डीसी प्रभजोत सिंह से लेकर तमाम अधिकारियों और नेताओं से मदद की गुहार भी लगाई थी लेकिन दीपक के औजारों व अन्य खर्च के लिए आर्थिक मदद नहीं मिल पाई थी। हालांकि रियो ओलंपिक से पहले पुरस्कार के तौर पर दीपक को जो रुपये मिले थे उनसे दीपक ने अपने गांव शाहपुर में ही खुद की शूटिंग रेंज खोली थी। 2016 में तत्कालीन खेल मंत्री अनिल विज ने इसका शुभारंभ किया था।
बचपन में हो गया था पोलियो
अंबाला। दीपक एक टांग से चलने में अक्षम है। दीपक को बचपन में ही पोलिया हो गया था, लेकिन अपनी दिव्यांगता को उसने कभी भी जीवन में बाधा नहीं बनने दिया।
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विश्व रैकिंग आर-7 में 11वें स्थान पर काबिज पैरा शूटर दीपक ने साउथ अमेरिका के लीमा पेरू में वर्ल्ड शूटिंग पैरा शूटर मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक का टिकट पक्का किया था। ये मुकाबले 10 से 19 जून तक हुए थे। इसके बाद क्वालीफाइंग मुकाबले सर्बिया में हुए थे। यहां पर दीपक के हथियार भी गुम हो गए थे हालांकि बाद में वह नीदरलैंड से मिल गए थे। दीपक के अलावा मनीष नरवाल, सिंघराज और राहुल जाखड़ भी टोक्यो पहुंच गए हैं। ये तीनों खिलाड़ी शूटिंग में 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगे। मनीष नरवाल और सिंघराज फरीदाबाद के रहने वाले हैं जबकि राहुल झज्जर निवासी हैं।
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दीपक बोला, मां के सपने को पूरा करूंगा
टोक्यो पहुंचे दीपक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मां का सपना है कि ओलंपिक में देश का नाम रोशन करूं। इसीलिए मेरा फोकस अब यही रहेगा कि मैं अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकूं। स्वर्ण पदक जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है, मेरा भी है। दीपक ने कहा कि मां के साथ देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतर सकूं, इसके लिए सभी के आशीर्वाद की इस समय मुझे सबसे ज्यादा जरूरत है।
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इन चार प्रतिस्पर्धाओं में होगा दीपक का मुकाबला
10 मीटर राइफल प्रोन
50 मीटर राइफल प्रोन
50 मीटर थ्री पॉजिशन
- 10 मीटर राइफल स्टेंडिंग
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टेलर भी बना और बिल्डिंग मैटेरियल भी बेचा, अब देश का कर रहा प्रतिनिधित्व
दीपक जब मात्र नौ साल का था तो पिता हरपाल सैनी का साय सिर से उठ गया था। इसके बाद मां के साथ-साथ बड़ी बहन और दो छोटे भाइयों का सहारा बना। पिता की इस तरह मृत्यु के बाद दीपक ने टेलर बनकर परिवार का भरण-पोषण करनी सोची। इतना ही नहीं कुछ दिन बिल्डिंग मैटेरियल भी बेचा। साथ ही खेती भी की। 2011 में दोस्त धर्मबीर को उसने शूटिंग के प्रति अपनी इच्छा जताई तो उसने पैसों का जुगाड़ किया और गन ले दी।
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कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में एक साल लिया प्रशिक्षण, बिना गुरु के पाया मुकाम
दीपक ने कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में एक साल प्रशिक्षण लिया। इसके बाद दिल्ली की करनी सिंह शूटिंग रेंज में बिना कोच के अभ्यास किया। यहीं से उन्हें एयर राइफल प्रोन प्रतिस्पर्धा में खेलने का मौका मिला। दीपक ने इसे हाथ से जाने नहीं दिया और सिल्वर मेडल जीतकर प्रतिभा दिखाई। इसके बाद 50 मीटर और 10 मीटर एयर राइफल प्रोन प्रतियोगिता में नेशनल चैंपियन बना। इसके बाद दीपक की कामयाबी का सफर बढ़ता गया और वह अब तक पोलैंड, क्रोशिया, आस्ट्रेेलिया, अमेरिका और यूएई में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुका है।
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5 साल पहले आर्थिक तंगी के चलते नहीं जा पाया था रियो ओलंपिक
2016 दीपक सैनी का नाम भी अवार्ड के लिए भी भेजा गया था। आर्थिक तंगी के चलते दीपक 2016 में रियो ओलंपिक नहीं जा पाया था। इस दौरान दीपक ने तत्कालीन डीसी प्रभजोत सिंह से लेकर तमाम अधिकारियों और नेताओं से मदद की गुहार भी लगाई थी लेकिन दीपक के औजारों व अन्य खर्च के लिए आर्थिक मदद नहीं मिल पाई थी। हालांकि रियो ओलंपिक से पहले पुरस्कार के तौर पर दीपक को जो रुपये मिले थे उनसे दीपक ने अपने गांव शाहपुर में ही खुद की शूटिंग रेंज खोली थी। 2016 में तत्कालीन खेल मंत्री अनिल विज ने इसका शुभारंभ किया था।
बचपन में हो गया था पोलियो
अंबाला। दीपक एक टांग से चलने में अक्षम है। दीपक को बचपन में ही पोलिया हो गया था, लेकिन अपनी दिव्यांगता को उसने कभी भी जीवन में बाधा नहीं बनने दिया।