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कष्ट निवारण समिति की बैठक रद्द: बैरिकेडिंग पर बवाल, तोड़कर खोला किसानों ने रास्ता
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करीब दो साल बाद पंचायत भवन में आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक सोमवार को किसानों के विरोध के चलते रद्द कर दी गई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होनी थी, जबकि शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर को इसकी अध्यक्षता करनी थी, लेकिन इससे पहले मौके पर एकत्रित होकर किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस की ओर से फोर लेयर सुरक्षा को ध्वस्त कर किसान दीवार फांदकर पंचायत भवन तक पहुंच गये। इस बीच पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया, जिसे लेकर किसानों और पुलिस में धक्का-मुक्की भी हुई।
पंचायत भवन में कष्ट निवारण समिति की पूर्व निर्धारित बैठक को लेकर पुलिस की ओर से पूरी तैयारी की गई थी, दूसरी ओर किसानों ने भी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। सोमवार को एक ओर जहां पंचायत भवन और आसपास सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी चल रही थी, वहीं सुबह नौ बजे ही किसान पंचायत भवन के बाहर एकजुट हो गए थे। साथ ही पंचायत भवन के आसपास का पूरा एरिया पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सभी थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर तैनात थे। सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था लेकिन सुबह करीब साढ़े 10 बजे बैठक शुरू होने से पहले अग्रसेन चौक की ओर से एक एंबुलेंस पंचायत भवन के पास पहुंची, जहां पहले से ही पुलिस की बैरिकेडिंग लगी थी। किसानों ने पुलिस से एंबुलेंस को रास्ता देने की बात कही, लेकिन सुरक्षा का हवाला देते हुए पुलिस ने इंकार कर दिया। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने बैरिकेड हटाकर एंबुलेंस को जबरन रास्ता दिलाया।
इस बीच पुलिस ने किसानों को रोकने के प्रयास किए, जिससे धक्का मुक्की के साथ ही तनाव की स्थिति पैदा हो गई, लेकिन किसान बिना रुके आगे बढ़ते रहे और पंचायत भवन के गेट पर पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। पंचायत भवन के गेट के पास पहुंचने पर बहुत से युवा किसानों ने पंचायत भवन में घुसने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मानव श्रृंखला बनाकर किसानों को रोका। इस बीच किसानों और पुलिस के बीच में काफी बहस हुई। पुलिस ने किसानों को पंचायत भवन में नहीं जाने दिया तो किसान पंचायत भवन की दीवार फांदकर अंदर घुस गए। पुलिस ने दीवार से उतारने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया। इस बीच किसान जय सिंह ने एक पुलिस कर्मी पर डंडा मारने का आरोप लगाते हुए उससे डंडा तक छीन लिया। बाद में तुरंत डंडा वापस लौटा दिया। बाद में किसान पदाधिकारियों ने किसानों को वापस आने के आदेश दिए, उसके बाद सभी पंचायत भवन से निकले। करीब 3 बजे तक किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
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तो डीएसपी स्वयं पीछे हट गये
विरोध के बीच पहले बैरिकेड हटाने पर किसानों को रोकने के लिए पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस बीच डीएसपी सुल्तान सिंह ने कई बार किसानों को पीछे धकेलने का प्रयास किया, लेकिन किसानों को पीछे हटता न देख डीएसपी स्वयं ही पीछे हट गए। वहीं, जब किसान दीवार फांदने का प्रयास करने लगे और किसानों पर लाठीचार्ज का शोर मचा तो डीएसपी ने स्थिति को संभालते हुए मामले को शांत करवाया।
बैरिकेड तोड़ने के लिए भुडंगपुर से ट्रैक्टर लेकर आए थे किसान
बैरिकेड को तोड़ने के लिए किसान भुडंगपुर से ट्रैक्टर लेकर आए थे। किसानों का कहना था कि वह पहले ट्रैक्टर नहीं लाने वाले थे। क्योंकि वह केवल विरोध करने के लिए आ रहे थे, लेकिन जब देखा की पुलिस की ओर से चारों ओर से नाकेबंदी की गई है। तब उन्होंने भुडंगपुर गांव से ट्रैक्टर की व्यवस्था करवाई। लेकिन इससे पहले किसानों ने हाथों से ही बैरिगेड को हटाकर रास्ता बना लिया।
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पंचायत भवन में कष्ट निवारण समिति की पूर्व निर्धारित बैठक को लेकर पुलिस की ओर से पूरी तैयारी की गई थी, दूसरी ओर किसानों ने भी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। सोमवार को एक ओर जहां पंचायत भवन और आसपास सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी चल रही थी, वहीं सुबह नौ बजे ही किसान पंचायत भवन के बाहर एकजुट हो गए थे। साथ ही पंचायत भवन के आसपास का पूरा एरिया पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सभी थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर तैनात थे। सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था लेकिन सुबह करीब साढ़े 10 बजे बैठक शुरू होने से पहले अग्रसेन चौक की ओर से एक एंबुलेंस पंचायत भवन के पास पहुंची, जहां पहले से ही पुलिस की बैरिकेडिंग लगी थी। किसानों ने पुलिस से एंबुलेंस को रास्ता देने की बात कही, लेकिन सुरक्षा का हवाला देते हुए पुलिस ने इंकार कर दिया। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने बैरिकेड हटाकर एंबुलेंस को जबरन रास्ता दिलाया।
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इस बीच पुलिस ने किसानों को रोकने के प्रयास किए, जिससे धक्का मुक्की के साथ ही तनाव की स्थिति पैदा हो गई, लेकिन किसान बिना रुके आगे बढ़ते रहे और पंचायत भवन के गेट पर पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। पंचायत भवन के गेट के पास पहुंचने पर बहुत से युवा किसानों ने पंचायत भवन में घुसने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मानव श्रृंखला बनाकर किसानों को रोका। इस बीच किसानों और पुलिस के बीच में काफी बहस हुई। पुलिस ने किसानों को पंचायत भवन में नहीं जाने दिया तो किसान पंचायत भवन की दीवार फांदकर अंदर घुस गए। पुलिस ने दीवार से उतारने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया। इस बीच किसान जय सिंह ने एक पुलिस कर्मी पर डंडा मारने का आरोप लगाते हुए उससे डंडा तक छीन लिया। बाद में तुरंत डंडा वापस लौटा दिया। बाद में किसान पदाधिकारियों ने किसानों को वापस आने के आदेश दिए, उसके बाद सभी पंचायत भवन से निकले। करीब 3 बजे तक किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
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तो डीएसपी स्वयं पीछे हट गये
विरोध के बीच पहले बैरिकेड हटाने पर किसानों को रोकने के लिए पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस बीच डीएसपी सुल्तान सिंह ने कई बार किसानों को पीछे धकेलने का प्रयास किया, लेकिन किसानों को पीछे हटता न देख डीएसपी स्वयं ही पीछे हट गए। वहीं, जब किसान दीवार फांदने का प्रयास करने लगे और किसानों पर लाठीचार्ज का शोर मचा तो डीएसपी ने स्थिति को संभालते हुए मामले को शांत करवाया।
बैरिकेड तोड़ने के लिए भुडंगपुर से ट्रैक्टर लेकर आए थे किसान
बैरिकेड को तोड़ने के लिए किसान भुडंगपुर से ट्रैक्टर लेकर आए थे। किसानों का कहना था कि वह पहले ट्रैक्टर नहीं लाने वाले थे। क्योंकि वह केवल विरोध करने के लिए आ रहे थे, लेकिन जब देखा की पुलिस की ओर से चारों ओर से नाकेबंदी की गई है। तब उन्होंने भुडंगपुर गांव से ट्रैक्टर की व्यवस्था करवाई। लेकिन इससे पहले किसानों ने हाथों से ही बैरिगेड को हटाकर रास्ता बना लिया।