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Ambala News: डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर का ऑपरेशन ट्रायल जल्द
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यमुनानगर के पास कलानौर में नदी पर बनाया गया ब्रिज। रेलवे
हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) की ओर से बिछाए नए रेल लाइन की लागत तीन हजार करोड़ से बढ़कर 5500 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें 2500 करोड़ का सिविल वर्क, एक हजार करोड़ का सिग्नल और ओएचई कार्य और 1200 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण की कीमत शामिल है।
यह रेल लाइन विशेषकर मालगाड़ियों के लिए शंभु से सहारनपुर के पिलखनी तक बिछाई गई है। नवंबर माह के पहले या दूसरे हफ्ते में पहले चरण के तहत शंभू से साहनेवाल तक रेलवे लाइन पर मालगाड़ियों का संचालन आरंभ हो जाएगा। इसे आप्रेशन ट्रायल नाम दिया गया है। वहीं पूरे रेल सेक्शन साहनेवाल से पिलखनी तक मालगाड़ियों का संचालन दिसंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में आरंभ हो जाएगा। उक्त जानकारी डीएफसीसीआईएल के महाप्रबंधक पंकज गुप्ता ने दी।
अंबाला के अधीन खुर्जा तक सेक्शन
डीएफसीसीआईएल परियोजना के तहत अब अंबाला मंडल के अधीन का क्षेत्र साहनेवाल से लेकर पिलखनी तक नहीं, बल्कि खुर्जा तक होगा। मेरठ के अधीन सेक्शन को भी अब अंबाला मंडल के अधीन कर दिया गया है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी मंडल की होगी। इसलिए अब ट्रेन का संचालन डीएफसीसीआईएल अधिकारियों की निगरानी में सीधा खुर्जा तक हो सकेगा।
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डबल डेकर और दोहरी मालगाड़ी चलेगी
मालगाड़ियों के लिए बिछाई गए नई रेल लाइन पर बिना रुकावट के विशेष तौर पर डबल डेकर ट्रेन सहित दोहरी मालगाड़ी यानी 96 वेगन की मालगाड़ी का संचालन हो सकेगा जोकि 1500 किमी तक निर्विघ्न दौड़ेगी। आधुनिक सिग्नल प्रणाली से लैस इस पूरे सेक्शन पर बिजली की सप्लाई खन्ना और जगाधरी में बनाए गए 220 केवी सब स्टेशन से दी जाएगी। इसमें भी डीएफसीसीआईएल आत्मनिर्भर हो गया है। जबकि पहले उत्तर रेलवे से बिजली को लेकर मंत्रणा की गई थी।
अब नहीं होंगे हादसे
डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर पर हादसे नहीं होंगे। इसके लिए भी विशेष आधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है जोकि मुख्यालय से सीधा जुड़ी रहेगी। वहीं इस पूरे सेक्शन पर हॉट व्हील एक्सेल डिटेक्टर भी लगाए गए हैं ताकि अगर मालगाड़ी के संचालन वैगन का पहिया गर्म हो या फिर इसमें कोई अन्य तकनीकी खामी हो तो तुरंत इसकी जानकारी मोबाइल के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंच सके।
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अंबाला। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) की ओर से बिछाए नए रेल लाइन की लागत तीन हजार करोड़ से बढ़कर 5500 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें 2500 करोड़ का सिविल वर्क, एक हजार करोड़ का सिग्नल और ओएचई कार्य और 1200 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण की कीमत शामिल है।
यह रेल लाइन विशेषकर मालगाड़ियों के लिए शंभु से सहारनपुर के पिलखनी तक बिछाई गई है। नवंबर माह के पहले या दूसरे हफ्ते में पहले चरण के तहत शंभू से साहनेवाल तक रेलवे लाइन पर मालगाड़ियों का संचालन आरंभ हो जाएगा। इसे आप्रेशन ट्रायल नाम दिया गया है। वहीं पूरे रेल सेक्शन साहनेवाल से पिलखनी तक मालगाड़ियों का संचालन दिसंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में आरंभ हो जाएगा। उक्त जानकारी डीएफसीसीआईएल के महाप्रबंधक पंकज गुप्ता ने दी।
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अंबाला के अधीन खुर्जा तक सेक्शन
डीएफसीसीआईएल परियोजना के तहत अब अंबाला मंडल के अधीन का क्षेत्र साहनेवाल से लेकर पिलखनी तक नहीं, बल्कि खुर्जा तक होगा। मेरठ के अधीन सेक्शन को भी अब अंबाला मंडल के अधीन कर दिया गया है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी मंडल की होगी। इसलिए अब ट्रेन का संचालन डीएफसीसीआईएल अधिकारियों की निगरानी में सीधा खुर्जा तक हो सकेगा।
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डबल डेकर और दोहरी मालगाड़ी चलेगी
मालगाड़ियों के लिए बिछाई गए नई रेल लाइन पर बिना रुकावट के विशेष तौर पर डबल डेकर ट्रेन सहित दोहरी मालगाड़ी यानी 96 वेगन की मालगाड़ी का संचालन हो सकेगा जोकि 1500 किमी तक निर्विघ्न दौड़ेगी। आधुनिक सिग्नल प्रणाली से लैस इस पूरे सेक्शन पर बिजली की सप्लाई खन्ना और जगाधरी में बनाए गए 220 केवी सब स्टेशन से दी जाएगी। इसमें भी डीएफसीसीआईएल आत्मनिर्भर हो गया है। जबकि पहले उत्तर रेलवे से बिजली को लेकर मंत्रणा की गई थी।
अब नहीं होंगे हादसे
डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर पर हादसे नहीं होंगे। इसके लिए भी विशेष आधुनिक प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है जोकि मुख्यालय से सीधा जुड़ी रहेगी। वहीं इस पूरे सेक्शन पर हॉट व्हील एक्सेल डिटेक्टर भी लगाए गए हैं ताकि अगर मालगाड़ी के संचालन वैगन का पहिया गर्म हो या फिर इसमें कोई अन्य तकनीकी खामी हो तो तुरंत इसकी जानकारी मोबाइल के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंच सके।

यमुनानगर के पास कलानौर में नदी पर बनाया गया ब्रिज। रेलवे

यमुनानगर के पास कलानौर में नदी पर बनाया गया ब्रिज। रेलवे