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हाईवे पर गाडिय़ों से रफ्तार भी पैदा करती है बिजली
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Wed, 23 Nov 2016 12:53 AM IST
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प्रदर्शनी में मॉडल देखते हुए
- फोटो : amar ujala
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हाईवे पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार से भी बिजली बन सकती है, ऐसा इंडिया में तो नहीं हुआ, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में जरूर होता है। इस तकनीक से अच्छी खासी बिजली बनाकर उसे स्टोर कर उसके जरिए हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटों और हाईवे किनारे गांवों को भी रोशन किया जा सकेगा।
सिडनी में इसी तकनीक पर आधारित हाईवे पर लगाए गए प्लांट का एक शानदार लाइव मॉडल फरूखा खालसा स्कूल में खंड स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में 12वीं कक्षा के साइंस विषय के स्टूडेंट अभिषेक पाठक व अलोक मिश्रा ने तैयार किया। ये मॉडल उन्होंने अपनी फिजिक्स टीचर नेहा धीमान की मदद से तैयार किया जबकि शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा व मुख्यातिथि प्रो. आरके डॉवर ने भी इस मॉडल की बेहद सराहना की। यही मॉडल प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण का भी केंद्र बना रहा।
अखिलेश यादव को स्कूल प्राचार्य ने लिखा पत्र
फरूखा स्कूल प्राचार्य आज्ञापाल सिंह ने इसी बाबत यूपी के सीएम अखिलेश यादव को पत्र भेजकर उन्हें इस तकनीक के बारे में अवगत करवाते हुए आगरा-लखनऊ हाईवे पर इस तकनीक का इस्तेमाल कर पावर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। इस तकनीक का जिक्र करते हुए स्टूडेंट अभिषेक पाठक, आलोक मिश्रा और टीचर नेहा धीमान ने बताया कि हाईवे पर जैसे ही वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं तो उनकी रफ्तार से हवा का जो दबाव बनता है, वो एकदम नीचे से ऊपर उठता है। ऐसी स्थिति में इस डायनैमिक पोटेंशियल एनर्जी को सिडनी में इलेक्ट्रिसिटी एनर्जी में कनवर्ट कर उनसे हाईवे की स्ट्रीट लाइटें और कुछ गांवों को बिजली सप्लाई की जाती है।
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उन्होंने बताया कि ये तकनीक मूविंग ऑफ व्हीकल वेस्ट कारबाइन एयर प्रेशन सिद्धांत पर काम करता है। इसमें 30 फीट तक होरीजेंटल एक्सिस हाईवे विंड टरबाइन स्थापित कर दिया जाता है। वाहनों की रफ्तार से ऊपर उठता हवा का वेग इस टरबाइन को तेजी से लगातार घूमाता है और इसी वजह से डायनैमिक पोटेंशियल एनर्जी खुद ही इलेक्ट्रिसिटी एनर्जी में कनर्वट हो जाती है। ये एनर्जी वहीं बने छोटे से पॉवर प्लांट में स्टोर होकर स्ट्रीट लाइटों और हाईवे के आसपास बने गांवों में घरों को रोशन करती है। उनके अनुसार चूंकि अभी आगरा-लखनऊ देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे बना है, वहां वाहन की गति भी बहुत तेज रहेगी, यदि ये प्लांट वहां स्थापित होता है, तो सरकार को बिना कुछ खास लागत के बिजली मिल सकेगी। उधर, प्रदर्शनी में बायो विलेज और सेवा समिति स्कूल की तान्या, चंचल व गीतांजलि का फसल खेत से घर तक भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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सिडनी में इसी तकनीक पर आधारित हाईवे पर लगाए गए प्लांट का एक शानदार लाइव मॉडल फरूखा खालसा स्कूल में खंड स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में 12वीं कक्षा के साइंस विषय के स्टूडेंट अभिषेक पाठक व अलोक मिश्रा ने तैयार किया। ये मॉडल उन्होंने अपनी फिजिक्स टीचर नेहा धीमान की मदद से तैयार किया जबकि शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा व मुख्यातिथि प्रो. आरके डॉवर ने भी इस मॉडल की बेहद सराहना की। यही मॉडल प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण का भी केंद्र बना रहा।
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अखिलेश यादव को स्कूल प्राचार्य ने लिखा पत्र
फरूखा स्कूल प्राचार्य आज्ञापाल सिंह ने इसी बाबत यूपी के सीएम अखिलेश यादव को पत्र भेजकर उन्हें इस तकनीक के बारे में अवगत करवाते हुए आगरा-लखनऊ हाईवे पर इस तकनीक का इस्तेमाल कर पावर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। इस तकनीक का जिक्र करते हुए स्टूडेंट अभिषेक पाठक, आलोक मिश्रा और टीचर नेहा धीमान ने बताया कि हाईवे पर जैसे ही वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं तो उनकी रफ्तार से हवा का जो दबाव बनता है, वो एकदम नीचे से ऊपर उठता है। ऐसी स्थिति में इस डायनैमिक पोटेंशियल एनर्जी को सिडनी में इलेक्ट्रिसिटी एनर्जी में कनवर्ट कर उनसे हाईवे की स्ट्रीट लाइटें और कुछ गांवों को बिजली सप्लाई की जाती है।
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उन्होंने बताया कि ये तकनीक मूविंग ऑफ व्हीकल वेस्ट कारबाइन एयर प्रेशन सिद्धांत पर काम करता है। इसमें 30 फीट तक होरीजेंटल एक्सिस हाईवे विंड टरबाइन स्थापित कर दिया जाता है। वाहनों की रफ्तार से ऊपर उठता हवा का वेग इस टरबाइन को तेजी से लगातार घूमाता है और इसी वजह से डायनैमिक पोटेंशियल एनर्जी खुद ही इलेक्ट्रिसिटी एनर्जी में कनर्वट हो जाती है। ये एनर्जी वहीं बने छोटे से पॉवर प्लांट में स्टोर होकर स्ट्रीट लाइटों और हाईवे के आसपास बने गांवों में घरों को रोशन करती है। उनके अनुसार चूंकि अभी आगरा-लखनऊ देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे बना है, वहां वाहन की गति भी बहुत तेज रहेगी, यदि ये प्लांट वहां स्थापित होता है, तो सरकार को बिना कुछ खास लागत के बिजली मिल सकेगी। उधर, प्रदर्शनी में बायो विलेज और सेवा समिति स्कूल की तान्या, चंचल व गीतांजलि का फसल खेत से घर तक भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।