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Ambala News: संकट में ओमला नदी बाढ़ से बदला रास्ता
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शहजादपुर (अंबाला)। हरियाणा में मोरनी की पहाड़ी से होकर शहजादपुर आने वाली बरसाती नदी ओमला ने अपना रास्ता बदल लिया है। वैसे तो यह नदी अक्सर शांत ही रहती है मगर कुछ ही माह पहले आई बारिश में नदी ने रौद्र रूप दिखाया। नदी ने अपने मूल रास्ते को छोड़कर नया रास्ता अख्तियार कर लिया।
इसके रास्ते में पेड़, मिट्टी या पत्थर जो आया उसे बहा ले गई। आलम यह है कि नदी के बीच से कुछ नए रास्ते दिखाई दे रहे हैं। इन पर टूटे पेड़, बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी का कटाव दिखाई देता है। इस रास्ते पर जब आगे बढ़ते हैं तो नदी का दूसरा रास्ता काफी ऊंचा हो गया है। यह तल इतना ऊंचा है कि थोड़ी सी बारिश में भी नदी का पानी गांवों में दाखिल हो सकता है। इस नदी के रौद्र रूप से कुछ समय पहले ही छज्जू माजरा और बड़ौग गांव के बाशिंदे देख चुके हैं। उनकी एक ही मांग है कि नदी के रास्ते को पहले की तरफ दुरुस्त किया। इसके अलावा जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
टांगरी में मिलकर इंडस्ट्रियल एरिया तक करती मार
शहजादपुर से निकलकर यह नदी पंजाब के सारंगपुर में टांगरी नदी में जाकर मिलती है। इसके बाद टांगरी से होते हुए इसका पानी छावनी तक पहुंचता है। पिछली बार भी इस नदी के बहाव से टांगरी में जलस्तर बढ़ा था और छावनी स्थित इंडस्ट्रियल एरिया पानी में डूब गया था। ऐसे में टांगरी के साथ-साथ ओमला जैसी सहायक नदियों को भी प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए।
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नदी के रास्ते पर हो चुके हैं कब्जे
राजस्व विभाग का रिकॉर्ड देखा तो उसमें नदी का रास्ता साफ दिखाई देता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हकीकत में देखरेख के अभाव में नदी के पुराने रास्ते पर कब्जा कर खेतीबाड़ी के उपयोग में लिया जा रहा है। यह काम वर्षों से जारी है। इस कारण नदी का रास्ता संकुचित होता जा रहा है। वैसे ही इस नदी के मार्ग में छोटे-छोटे पक्के बांध बने हैं, मगर असल में यह बांध अब इतने बेग को संभालने में कारगर नहीं दिखाई देते हैं। इसके लिए अलग से प्लानिंग की आवश्यकता है। इसके साथ ही बड़ौग और छज्जू माजरा जैसे कुछ गांवों की जल निकासी भी इसी नदी में आकर मिलते हैं। ऐसे में आगे चलकर यह टांगरी को भी प्रदूषित करेंगे।
पानी निकासी के लिए चल रहा विवाद
छज्जू माजरा गांव में गांव के गंदे पानी की निकासी अभी तक एक नाले से हो रही थी। जो आगे जाकर ओमला नदी में मिल जाता। इस नाले से इंडस्ट्रियल और दूसरे प्रकार का जल भी आता है। यहीं पर दो से तीन इंडस्ट्रियल पार्क भी तेजी से बन रहे हैं। ऐसे में यहां से भविष्य में इंडस्ट्री आने पर नदी में नाले के गिरने से जल प्रदूषण हो सकती है। छज्जू माजरा में ही एक इंडस्ट्रियल पार्क बन रहा है। पहले यह नाला इस पार्क की भूमि से होकर बह रहा था। अब नाले के लिए रास्ता नहीं मिलने पर इसका बहाव रुक गया है। यहां छज्जू माजरा गांव के सरपंच प्रतिनिधि और इंडस्ट्रियल पार्क प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा है। जो प्रशासन के समाधान शिविर और कोर्ट तक पहुंच गया है। पार्क संचालक का दावा है कि नारायणगढ़ एसडीएम ने मौके का मुआयना कर उन्हें अंडरग्राउंड नाला बनाने के लिए अनुमति दे दी है। मगर स्थानीय राजनीति के चलते यह काम अब रुक गया है। ऐसे में भविष्य में बारिश आने पर नदी फिर से आसपास के क्षेत्र के लिए मुसीबत बन सकती है।
वर्जन
कुछ समय पहले ही ओमला नदी में बाढ़ आई थी। जिसके कारण आसपास के गांव जलमग्न हो गए थे। इसके लिए प्रशासन से मांग की जाएगी कि इसे गहरा और इसके रास्ते को पहले की तरह सुनिश्चित किया जाए।
-संतोष रानी, सरपंच, बड़ौग गांव, शहजादपुर
वर्जन
नदी के पानी ने पूर्व में काफी नुकसान किया था। इसका स्थाई समाधान निकलना चाहिए। नदी में नाले की निकासी पर भी विचार करने की जरूरत है। नाले की निकासी को लेकर मामला विचाराधीन है।
-विक्रम, सरपंच प्रतिनिधि, छज्जू माजरा
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इसके रास्ते में पेड़, मिट्टी या पत्थर जो आया उसे बहा ले गई। आलम यह है कि नदी के बीच से कुछ नए रास्ते दिखाई दे रहे हैं। इन पर टूटे पेड़, बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी का कटाव दिखाई देता है। इस रास्ते पर जब आगे बढ़ते हैं तो नदी का दूसरा रास्ता काफी ऊंचा हो गया है। यह तल इतना ऊंचा है कि थोड़ी सी बारिश में भी नदी का पानी गांवों में दाखिल हो सकता है। इस नदी के रौद्र रूप से कुछ समय पहले ही छज्जू माजरा और बड़ौग गांव के बाशिंदे देख चुके हैं। उनकी एक ही मांग है कि नदी के रास्ते को पहले की तरफ दुरुस्त किया। इसके अलावा जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
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टांगरी में मिलकर इंडस्ट्रियल एरिया तक करती मार
शहजादपुर से निकलकर यह नदी पंजाब के सारंगपुर में टांगरी नदी में जाकर मिलती है। इसके बाद टांगरी से होते हुए इसका पानी छावनी तक पहुंचता है। पिछली बार भी इस नदी के बहाव से टांगरी में जलस्तर बढ़ा था और छावनी स्थित इंडस्ट्रियल एरिया पानी में डूब गया था। ऐसे में टांगरी के साथ-साथ ओमला जैसी सहायक नदियों को भी प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए।
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नदी के रास्ते पर हो चुके हैं कब्जे
राजस्व विभाग का रिकॉर्ड देखा तो उसमें नदी का रास्ता साफ दिखाई देता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हकीकत में देखरेख के अभाव में नदी के पुराने रास्ते पर कब्जा कर खेतीबाड़ी के उपयोग में लिया जा रहा है। यह काम वर्षों से जारी है। इस कारण नदी का रास्ता संकुचित होता जा रहा है। वैसे ही इस नदी के मार्ग में छोटे-छोटे पक्के बांध बने हैं, मगर असल में यह बांध अब इतने बेग को संभालने में कारगर नहीं दिखाई देते हैं। इसके लिए अलग से प्लानिंग की आवश्यकता है। इसके साथ ही बड़ौग और छज्जू माजरा जैसे कुछ गांवों की जल निकासी भी इसी नदी में आकर मिलते हैं। ऐसे में आगे चलकर यह टांगरी को भी प्रदूषित करेंगे।
पानी निकासी के लिए चल रहा विवाद
छज्जू माजरा गांव में गांव के गंदे पानी की निकासी अभी तक एक नाले से हो रही थी। जो आगे जाकर ओमला नदी में मिल जाता। इस नाले से इंडस्ट्रियल और दूसरे प्रकार का जल भी आता है। यहीं पर दो से तीन इंडस्ट्रियल पार्क भी तेजी से बन रहे हैं। ऐसे में यहां से भविष्य में इंडस्ट्री आने पर नदी में नाले के गिरने से जल प्रदूषण हो सकती है। छज्जू माजरा में ही एक इंडस्ट्रियल पार्क बन रहा है। पहले यह नाला इस पार्क की भूमि से होकर बह रहा था। अब नाले के लिए रास्ता नहीं मिलने पर इसका बहाव रुक गया है। यहां छज्जू माजरा गांव के सरपंच प्रतिनिधि और इंडस्ट्रियल पार्क प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा है। जो प्रशासन के समाधान शिविर और कोर्ट तक पहुंच गया है। पार्क संचालक का दावा है कि नारायणगढ़ एसडीएम ने मौके का मुआयना कर उन्हें अंडरग्राउंड नाला बनाने के लिए अनुमति दे दी है। मगर स्थानीय राजनीति के चलते यह काम अब रुक गया है। ऐसे में भविष्य में बारिश आने पर नदी फिर से आसपास के क्षेत्र के लिए मुसीबत बन सकती है।
वर्जन
कुछ समय पहले ही ओमला नदी में बाढ़ आई थी। जिसके कारण आसपास के गांव जलमग्न हो गए थे। इसके लिए प्रशासन से मांग की जाएगी कि इसे गहरा और इसके रास्ते को पहले की तरह सुनिश्चित किया जाए।
-संतोष रानी, सरपंच, बड़ौग गांव, शहजादपुर
वर्जन
नदी के पानी ने पूर्व में काफी नुकसान किया था। इसका स्थाई समाधान निकलना चाहिए। नदी में नाले की निकासी पर भी विचार करने की जरूरत है। नाले की निकासी को लेकर मामला विचाराधीन है।
-विक्रम, सरपंच प्रतिनिधि, छज्जू माजरा