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अब आयोग के चेयरमैन को आईजी ने सौंपी शिकायत
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। डीजीपी और आईजी के मध्य आरंभ हुआ विवाद अब चरम सीमा पर है। आईजी वाई पूर्ण कुमार ने 13 दिन बीतने के बावजूद केस दर्ज न होने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन से मिलकर उन्हें लिखित शिकायत दी। आयोग के चेयरमैन विजय सांपला ने इस मामले में डीजीपी को जल्द नोटिस जारी करने की बात कही है।
इसके अलावा आईजी वाई पूर्ण कुमार ने डीजीपी मनोज यादव को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धाराओं का हवाला देते हुए एसएसपी, डीएसपी व कैंट एसएचओ पर कर्तव्यों की उपेक्षा कर मामले में केस दर्ज न करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही खिलाफ प्रशासनिक जांच शुरू कराने की मांग भी कर दी है।
क्या है मामला
शहजादपुर थाने में बने मंदिर में हुए कार्यक्रम को लेकर दोनों आईपीएस अधिकारी एक दूसरे के आमने-सामने हैं। डीजीपी ने आईजी को पत्र जारी कर पूछा था कि मंदिर के निर्माण को लेकर आपने किसी से अनुमति ली थी क्या? आईजी का जवाब था कि मेरे कार्यकाल से पहले यह निर्माण हुआ। जिस दिन कार्यक्रम हुआ, उस दिन वे छुट्टी पर थे। तत्कालीन एसपी अभिषेक जोरवाल को इस बारे में नहीं पूछा गया। कुछ दिन पहले वाई पूर्ण कुमार का आईजी अंबाला के पद से तबादला कर दिया गया। उनके आरोप हैं कि अनुसूचित जाति का होने के कारण उनके साथ भेदभाव किया है जोकि एससी, एसटी एक्ट का उल्लंघन है।
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आईजी वाई पूर्ण कुमार मंगलवार मुझे आकर मिले थे। उन्होंने इस मामले में अपना पक्ष रखा है, इससे संबंधित दस्तावेज भी दिए हैं। दस्तावेज का अध्ययन किया जा रहा है। जल्द पत्र भेजकर डीजीपी व शिकायत से संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। यदि उनके जवाब से संतुष्टि नहीं होती तो उन्हें नोटिस भेजकर आयोग के समक्ष पेश होने को कहा जाएगा। - विजय सांपला, चेयरमैन, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली।
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अंबाला सिटी। डीजीपी और आईजी के मध्य आरंभ हुआ विवाद अब चरम सीमा पर है। आईजी वाई पूर्ण कुमार ने 13 दिन बीतने के बावजूद केस दर्ज न होने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन से मिलकर उन्हें लिखित शिकायत दी। आयोग के चेयरमैन विजय सांपला ने इस मामले में डीजीपी को जल्द नोटिस जारी करने की बात कही है।
इसके अलावा आईजी वाई पूर्ण कुमार ने डीजीपी मनोज यादव को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धाराओं का हवाला देते हुए एसएसपी, डीएसपी व कैंट एसएचओ पर कर्तव्यों की उपेक्षा कर मामले में केस दर्ज न करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही खिलाफ प्रशासनिक जांच शुरू कराने की मांग भी कर दी है।
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क्या है मामला
शहजादपुर थाने में बने मंदिर में हुए कार्यक्रम को लेकर दोनों आईपीएस अधिकारी एक दूसरे के आमने-सामने हैं। डीजीपी ने आईजी को पत्र जारी कर पूछा था कि मंदिर के निर्माण को लेकर आपने किसी से अनुमति ली थी क्या? आईजी का जवाब था कि मेरे कार्यकाल से पहले यह निर्माण हुआ। जिस दिन कार्यक्रम हुआ, उस दिन वे छुट्टी पर थे। तत्कालीन एसपी अभिषेक जोरवाल को इस बारे में नहीं पूछा गया। कुछ दिन पहले वाई पूर्ण कुमार का आईजी अंबाला के पद से तबादला कर दिया गया। उनके आरोप हैं कि अनुसूचित जाति का होने के कारण उनके साथ भेदभाव किया है जोकि एससी, एसटी एक्ट का उल्लंघन है।
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आईजी वाई पूर्ण कुमार मंगलवार मुझे आकर मिले थे। उन्होंने इस मामले में अपना पक्ष रखा है, इससे संबंधित दस्तावेज भी दिए हैं। दस्तावेज का अध्ययन किया जा रहा है। जल्द पत्र भेजकर डीजीपी व शिकायत से संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। यदि उनके जवाब से संतुष्टि नहीं होती तो उन्हें नोटिस भेजकर आयोग के समक्ष पेश होने को कहा जाएगा। - विजय सांपला, चेयरमैन, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली।