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अबकि बार बराड़ा में 100 फीट के रावण का होगा दहन, जगह की कमी के कारण घटी पुतले की ऊंचाई
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बराड़ा। श्री रामलीला क्लब बराड़ा दशहरा उत्सव की तैयारियों में जुट गया है। जगह की कमी का हवाला देते हुए क्लब ने रावण का 100 फुट लंबा पुतला स्थापित करने का फैसला किया है। श्री रामलीला क्लब को विश्व में रावण का सबसे ऊंचा 221 फुट पुतला बनाने के लिए जाना जाता है। सोमवार से पुतले के बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जगह की कमी के कारण ही करीब चार साल पहले पंचकूला और करीब तीन साल पहले चंडीगढ़ में पुतला दहन किया गया था। कोविड महामारी के कारण 2020 में कोई आयोजन नहीं हुआ था और पिछले साल भी क्लब ने 100 फीट का पुतले का दहन किया था।
श्री रामलीला क्लब बराड़ा के संस्थापक तेजिंद्र चौहान ने बताया कि प्रशासन की बेरूखी के कारण करीब चार साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला और तीन साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। जिसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में कई बार प्रशासन से भी गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं ओर जगह की व्यवस्था हो सकी। जिसके कारण ही 2017 के बाद बराड़ा में रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका। इसके बाद 2018 में पंचकूला में और 2019 में चंडीगढ़ में रावण के पुतले का दहन हुआ। 2020 में कोरोना महामारी के चलते रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका था।
बाक्स
इस बार मोहाली में बनना था 221 फुट ऊंचा पुतला
तेजिंदर चौहान ने बताया कि इस साल मोहाली में 221 फीट ऊंचा पुतला दहन की योजना थी, लेकिन आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाने के कारण योजना अमल में नहीं आ सकी। उन्होंने बताया कि उन्हें एक महीने पहले ही अनुमति दी जाती है। इतने कम समय में इतना लंबा पुतला बनाना संभव नहीं है क्योंकि यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। जिसमें करीब छह महीने का समय लगता है। उन्होंने बताया कि पहले 210 फुट का पुतला बनाने पर करीब 250 फुट का एरिया इसके आसपास लिया जाता था। इसे बनाने में 6 महीने का समय लगता था। उन्होंने बताया कि 100 फुट के पुतले को एक महीने में बना दिया जाता है। इसके लिए 120 फुट का एरिया इसके चारों तरफ से लिया जाता है। चौहान ने बताया कि पुतला बनाने पर करीब 10 लाख रुपए खर्च आएगा। इसका कार्य सोमवार से शुरू हो जाएगा।
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श्री रामलीला क्लब बराड़ा के संस्थापक तेजिंद्र चौहान ने बताया कि प्रशासन की बेरूखी के कारण करीब चार साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला और तीन साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। जिसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में कई बार प्रशासन से भी गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं ओर जगह की व्यवस्था हो सकी। जिसके कारण ही 2017 के बाद बराड़ा में रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका। इसके बाद 2018 में पंचकूला में और 2019 में चंडीगढ़ में रावण के पुतले का दहन हुआ। 2020 में कोरोना महामारी के चलते रावण के पुतले का दहन नहीं हो सका था।
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इस बार मोहाली में बनना था 221 फुट ऊंचा पुतला
तेजिंदर चौहान ने बताया कि इस साल मोहाली में 221 फीट ऊंचा पुतला दहन की योजना थी, लेकिन आयोजन के लिए अनुमति नहीं मिल पाने के कारण योजना अमल में नहीं आ सकी। उन्होंने बताया कि उन्हें एक महीने पहले ही अनुमति दी जाती है। इतने कम समय में इतना लंबा पुतला बनाना संभव नहीं है क्योंकि यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। जिसमें करीब छह महीने का समय लगता है। उन्होंने बताया कि पहले 210 फुट का पुतला बनाने पर करीब 250 फुट का एरिया इसके आसपास लिया जाता था। इसे बनाने में 6 महीने का समय लगता था। उन्होंने बताया कि 100 फुट के पुतले को एक महीने में बना दिया जाता है। इसके लिए 120 फुट का एरिया इसके चारों तरफ से लिया जाता है। चौहान ने बताया कि पुतला बनाने पर करीब 10 लाख रुपए खर्च आएगा। इसका कार्य सोमवार से शुरू हो जाएगा।
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