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नोटबंदी : गांवों में नहीं सुधरी स्थिति, लगती है दौड़
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:32 AM IST
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नोटबंदी
- फोटो : SELF
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नोटबंदी के 38 दिन बाद भी गांवों में स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। कैश के लिए कई किलोमीटर की दौड़ लग रही है।
उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के 38 दिन बीत जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा राहत देने वाली नहीं मिल रही है। एटीएम पर ज्यादा कैश नहीं है, जबकि बैंकों से भी पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है। कईं किलोमीटर की दूरी तय कर ग्रामीण बैंकों व एटीएम की लाइनों में लग रहे हैं, जबकि कैश नहीं मिलता और यदि मिल जाता है, तो यह पूरा नहीं मिलता। इसी कारण से ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीणों की मानें, तो यह स्थिति तीस दिसंबर तक या फिर इससे भी आगे रहेगी, पता नहीं, लेकिन फिलहाल कैश के लिए काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।
बराड़ा के रहने वाले परमिंदर सिंह, मोहित, पाला राम, गुरबख्श सिंह, मोहड़ी के गुरबाज सिंह, जोध सिंह, मरदों साहिब के नरेश सिंह, मुलाना के बलकार, गोपाल, साहा के जसराज, मनप्रीत सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाएं काफी कम हैं। इसी कारण से एक शाखा से ही कईं गांव जुड़े हैं। ऐसे में कैश के लिए इन गांवों के लोग सुबह ही बैंकों की कतारों में खड़े हो जाते हैं। नोटबंदी से पहले एक ही बार कैश लेने के लिए बैंक जाते थे और पूरे महीने का खर्च अपने खाते से निकलवाकर लाते थे। लेकिन अब दो हजार से ज्यादा देते नहीं, जबकि एटीएम से भी कैश जल्द खत्म हो जाता है और घंटों तक इस में कैश डाला ही नहीं जाता। इसी कारण से ग्रामीणों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिसके चलते उनका कामकाज भी प्रभावित होता है।
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स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और एटीएम वर्किंग में हैं। अरबन एरिया में तो अब एटीएम के बाहर लाइनें ज्यादा नहीं हैं, जबकि बैंकों में कैश की किल्लत भी अब सुधरने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल्द ही सुधार होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
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- नरेश सिंगला, लीड बैंक मैनेजर, अंबाला
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उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के 38 दिन बीत जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा राहत देने वाली नहीं मिल रही है। एटीएम पर ज्यादा कैश नहीं है, जबकि बैंकों से भी पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है। कईं किलोमीटर की दूरी तय कर ग्रामीण बैंकों व एटीएम की लाइनों में लग रहे हैं, जबकि कैश नहीं मिलता और यदि मिल जाता है, तो यह पूरा नहीं मिलता। इसी कारण से ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीणों की मानें, तो यह स्थिति तीस दिसंबर तक या फिर इससे भी आगे रहेगी, पता नहीं, लेकिन फिलहाल कैश के लिए काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।
बराड़ा के रहने वाले परमिंदर सिंह, मोहित, पाला राम, गुरबख्श सिंह, मोहड़ी के गुरबाज सिंह, जोध सिंह, मरदों साहिब के नरेश सिंह, मुलाना के बलकार, गोपाल, साहा के जसराज, मनप्रीत सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाएं काफी कम हैं। इसी कारण से एक शाखा से ही कईं गांव जुड़े हैं। ऐसे में कैश के लिए इन गांवों के लोग सुबह ही बैंकों की कतारों में खड़े हो जाते हैं। नोटबंदी से पहले एक ही बार कैश लेने के लिए बैंक जाते थे और पूरे महीने का खर्च अपने खाते से निकलवाकर लाते थे। लेकिन अब दो हजार से ज्यादा देते नहीं, जबकि एटीएम से भी कैश जल्द खत्म हो जाता है और घंटों तक इस में कैश डाला ही नहीं जाता। इसी कारण से ग्रामीणों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिसके चलते उनका कामकाज भी प्रभावित होता है।
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स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और एटीएम वर्किंग में हैं। अरबन एरिया में तो अब एटीएम के बाहर लाइनें ज्यादा नहीं हैं, जबकि बैंकों में कैश की किल्लत भी अब सुधरने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल्द ही सुधार होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
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- नरेश सिंगला, लीड बैंक मैनेजर, अंबाला