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धक्के खाकर भी नहीं मिल रही पेंशन, बुजुर्गों को टेंशन

Wed, 23 Nov 2016 12:46 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला Updated Wed, 23 Nov 2016 12:46 AM IST
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not penshion, old is in tenshion
कैश के लिए लाइन में खड़े लोग - फोटो : amar ujala
‘मैं पिछले दिनों 30 रुपये खर्च करके रिक्शा से अपने बैंक में पेंशन लेने गई थी तो बैंक क्लर्क ने मुझसे कहा कि माता जी आपके अकाउंट में अभी 4 रुपये पड़े हैं पेंशन नहीं आई है। आज फिर बैंक में गई, लेकिन फिर पेंशन नहीं मिली। इसी पेंशन से मेरा गुजारा चलता है, लेकिन अभी उधार चला रही हूं, हां रिक्शा खर्च में जो राशि बर्बाद हो जाती है, उसका बहुत दुख लगता है।’
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यह दर्द बयां किया बाला देवी ने, जो पेंशन के लिए धक्के खाकर वापस घर की ओर रवाना हो रही थी। इसी तरह चंद्रकांता ने कहा कि ‘मैं वैसे ही अपने घुटनों से परेशान हूं, लोग बमुश्किल मुझे पकड़कर बैंक तक लाते हैं, दो बार बैंक तक आई, लेकिन भीड़ देखकर बाहर ही रूक गई। गार्ड से पूछा तो उसने कहा पेंशन नहीं आई है, बाद में आना, मैं लौट गई।’
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बुजुर्ग ओम कुमार कहते हैं कि ‘एक्सीडेंट की वजह से मेरे कूल्हे की हड्डी टूटी है, वॉकर से चलता हूं, दो बार रिक्शा पर बैंक तक गया, लेकिन पेंशन नहीं आई, ये जवाब देकर वापस भेज दिया गया। दोनों बार रिक्शा का किराया बेकार गया। आने-जाने में ही 80 रुपये खर्च हो गए।’
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बुजुर्ग वाहिद काजमी कहते हैं कि ‘पेंशन के लिए बैंक तक तीन बार गया, एक बार तो सीढिय़ों से ही लुढ़क गया, हाथ और पीठ पर काफी अंदरूनी चोटें आई हैं। अभी भी चोट से तबीयत ठीक नहीं रहती। अब बैंक में जाने की हिम्मत नहीं होती। मोदी साहब बुजुर्गों का दर्द को देखते हुए यदि उनके घर-घर ही पेंशन रकम का मनीऑर्डर से भिजवा देते या घर में पेंशन दिलवाने की व्यवस्था करवा देते तो, बड़ा सहारा रहता।’

उधर, कृष्णा रानी कहती है कि पोते को पहले तो बैंक में पेंशन के बारे में पता करने के लिए भेजा, लेकिन बैंक वालों ने कहा कि दादी को लाओ, अब मैं धक्के खा रही हूं, तबीयत भी खराब हो गई है।  बुजुर्ग गुरजंट, कांता रानी, सरोजनी, रमेश कुमार कहते हैं विधवा, बेसहारा, विकलांग और बुजुर्ग सभी लोग इस वक्त पेंशन को लेकर बहुत ही ज्यादा परेशान है। उन्होंने डीसी अंबाला से मांग की है कि वे बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर लगवाकर सम्मान से उन्हे पेंशन का लाभ दिलवाएं।

तो इसलिए बैंक कर रहे हैं आनकानी
उधर, कई बैंकों में पेंशन तो बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों व अन्य बेसहारा लोगों के खाते में पहुंच गई है, लेकिन उसके बावजूद भी बैंक कर्मचारी बुजुर्गों को पेंशन देने से इनकार कर रहे हैं। यह वजह है छोटे नोटों की दिक्कत। एक बैंक के क्लर्क ने बताया कि अब पेंशन के रूप में बुजुर्गों को 1400 रुपये देने हैं। एक हजार का नोट बंद हो गया है और 100-100 के नोट का कैश कम आता है। बैंक बुजुर्गों को 2000 का नोट देता है, तो बुजुर्ग 600 रुपये वापस करने की क्षमता में नहीं होते। इसलिए पेंशन वितरण में अभी दिक्कत आ रही हैं, क्योंकि बैंक काउंटर दूसरे लोगों की भीड़ से व्यस्त रहते हैं। बैंक क्लर्क के अनुसार इसलिए बुजुर्गों को सलाह दी जा रही है कि कुछ दिन बाद बैंक में आ जाएं, आराम से पेंशन मिल जाएगी और 100-100 के नोट की कैश की उपलब्धता भी हो जाएगी।

कई बैंकों में ऐसे मामले देखे हैं, जहां बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही है। लेकिन पेंशन विभाग ने तो सभी के खातों में पेंशन ट्रांसफर कर दी है। सभी बैंकों से आग्रह है कि वे बुजुर्गों व अन्य पेंशनधारकों के लिए अलग काउंटर बनवाकर उन्हे जल्द पेंशन उपलब्ध करवाएं। क्योंकि लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं।
-सुरजीत कौर, जिला समाज कल्याण अधिकारी, अंबाला-
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पुलिस की मौजूदगी में निपटा बहस का मामला
उधर, अंबाला कैंट के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में गत दिवस हुए हंगामे में बैंक उपभोक्ता ने पुलिस की मौजूदगी में समझौता किया। बैंक अफसर ने बताया कि बैंक कर्मचारियों पूरी तन्मयता से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन कई बार कुछेक उपभोक्ता बैंक कर्मचारियों की परेशानी नहीं समझते, उल्टा बेसब्रेपन से माहौल खराब करने की  कोशिश करते हैं, जिससे दूसरे उपभोक्ता को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। बैंक मैनेजर के अनुसार गत दिवस बहस करने वाले उपभोक्ता ने पुलिस की मौजूदगी में खेद व्यक्त कर दिया है।
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शादी: बैंड-बाजा-बारात पर हावी हुए सरकार के नियम

अंबाला कैंट। शादी के लिए पहले घर में कैश का बंदोबस्त किया और अब नोटबंदी के बाद यह कैश मुसीबत बन रहा है। जिन घरों में शादी है, वे परेशान हैं कि अब क्या करें और बैंक वाले भी अब नियम पूरे करने के बाद कैश देने की बात कर रहे हैं। ऐसे हालातों में सरकार के नियम इन परिवारों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं।

सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद उन परिवारों के लिए परेशानियां खड़ी हो गई, जिन्होंने शादी के लिए कैश जमा किया था। अब यही कैश इनके लिए सिर्फ कागज के टुकड़ों से कम नहीं दिख रहा है। अब इनके लिए कैश का इंतजाम करना ही मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि सरकार ने शादी का कार्ड दिखाकर बैंक से ढाई लाख रुपये तक कैश निकवालने की घोषणा की थी, जबकि अब आरबीआई के सर्कुलर ने और परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस सर्कुलर में इतने नियम थोपे गए हैं कि शादी वाले घर के लिए यह नियम पूरे करना ही मुश्किल होगा। नए नियमों के तहत ऐसे परिवार वालों ने जिनको कैश पेमेंट करनी है, उसकी रसीद देनी होगी और यह भी लिखवाना होगा कि उनका बैंक अकाउंट नहीं है। इसी तरह ऐसे परिवारों को 8 नवंबर से पहले उनके बैंक अकाउंट में जितने रुपये थे, उसमें से ही राशि मिलेगी, जबकि ढाई लाख रुपये से ज्यादा पेमेंट नहीं हो सकेगी। इसके अलावा खाताधारक की केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए तभी यह रकम मिल सकेगी, जबकि यह राशि भी उन परिवारों को मिलेगी, जिनकी शादी 30 दिसंबर तक है, जबकि कुछ अन्य शर्तें भी ऐसे परिवारों को पूरी करनी होगी।

शादी कैसे निपटाएं यह चिंता सता रही है
गांव आजमपुर के रहने वाले कर्मचंद के बेटे की शादी 9 दिसंबर की है। उन्होंने बताया कि शादी के लिए कैश जमा किया था, लेकिन अचानक सरकार ने नोटबंदी का फैसला ले लिया है। अब जो कैश घर में 500 और 1000 रुपये की शक्ल में था वह बेकार हो गया। बैंक में जाते हैं तो सीलिंग की बात कर बैंक भी राहत नहीं दे रहा। दूसरा अब आरबीआई ने जो नियम लागू किए हैं, उनको पूरा करें या फिर शादी का इंतजाम। अब किसी तरह से इधर-उधर से उधार लेकर कुछ काम चला रहे हैं, जबकि परेशानी है कि पेमेंट कैसे करेंगे?

नियमों में उलझ गई जिंदगी, 14 दिन बाद राहत नहीं
नोटबंदी के 14 दिन बीत जाने के बाद भी जनता की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। बैंक के कैश काउंटर से पूरी रकम नहीं मिल रही है, जबकि एटीएम से भी सीमित मात्रा में ही रुपये निकल रहे हैं। इसी तरह पुराने नोट बदलने में भी दिक्कतें आ रही हैं। कईं तो चेक लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन बैंक में भी कम राशि का चेक लाने को कह रहे हैं। बैंक में चेक लेकर पहुंचे अमित शर्मा व राहुल ने बताया कि बाइस हजार रुपये का चेक था, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने पहले तो आनाकानी की लेकिन बाद में इसे क्लीयर किया गया। लेकिन इस दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसी तरह नोट बदलवाने के लिए जो सीलिंग लगाई गई, उतने नोट भी नहीं बदले जा रहे हैं।

एटीएम कैसेट रीडिजाइन, फिर भी लाइनें
एटीएम कैसेट रीडिजाइन करने के बाद भी उपभोक्ताओं की लाइनें कम नहीं हो रही हैं। सुबह ही लोग लाइनों में लगने के बाद एटीएम से नकदी निकलवा रहे हैं। जिला अंबाला में 291 एटीएम हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत एटीएम की कैश कैसेट रीडिजाइन हो चुके हैं। इन में से दो हजार और पांच सौ के नोट डाले गए हैं, जो उपभोक्ताओं को मिल रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों की लाइनें एटीएम के बाहर कम नहीं हो रही हैं।
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एटीएम से कैश निकासी हो रही है और जनता को 500 और 2000 रुपये के नए नोट मिल रहे हैं, जबकि 100 रुपये की करेंसी भी एटीएम में डाली गई है। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है, जबकि शादी वाले परिवारों के लिए आरबीआई की गाइडलाइन जारी हो चुकी है। इसके तहत शर्तें पूरी करने वाले परिवारों को ढाई लाख रुपये तक की राशि निकालने की छूट है, बशर्तें की यह राशि 8 नवंबर से पहले बैंक में डाली गई हो।
- नरेश गुप्ता, पीएनबी लीड बैंक मैनेजर -

नोटिफिकेशन का इंतजार, उधर पूरा हुआ बिजाई का नब्बे फीसद काम
अंबाला सिटी। सरकार के नियंत्रित बीज केंद्रों पर 500 रुपये के पुराने नोट से किसानों द्वारा बीज खरीदे जाने के निर्देश संबंधी नोटिफिकेश अभी हरियाणा कृषि विभाग के पास पहुंची नहीं है। लेेकिन उसके बावजूद खास बात यह कि किसानों को दिक्कत न हो, अंबाला में कुछ सरकारी नियंत्रण वाले बीज केंद्रों ने 500 के पुराने नोट पर किसानों को बीज की बिक्री की। जबकि कुछ बीज केंद्र इस बाबत अभी सरकारी आदेश न आने की वजह से पसोपेश की स्थिति में दिखाई दिए।

किसान अच्छर सिंह व कुलवंत सिंह उगाड़ा कहते हैं कि सरकार को ये फैसला लेते-लेते काफी देर हो गई। क्योंकि जिले में 90 फीसदी गेहूं की बिजाई तो पूरी हो गई है। किसानों को महंगे दामों पर प्राइवेट केंद्रों से पुराने नोट देकर बीज खरीदने को मजबूर होना पड़ा। अब जब सरकार ने ये नोटिफिकेशन जारी की है, तब तक तो अधिकतर किसान बीज खरीदकर बिजाई भी कर चुका है।


उधर, हरियाणा कृषि विभाग के उप निदेशक हेडक्वार्टर गिरीश नागपाल कहते हैं कि केंद्र सरकार ने 500 के पुराने नोट पर बीज खरीदने की जो भी नोटिफिकेशन जारी की है, उसे हरियाणा कृषि विभाग पूरे प्रदेश में लागू करवाएगा। उनके अनुसार प्रदेश भर में सरकार के नियंत्रित बीज केंद्रों को भी निर्देश भेजे जाएंगे कि वे संबंधित नोटिफिकेशन के अनुरूप किसानों को राहत देते हुए 500 रुपये के पुराने नोट पर बीज उपलब्ध करवाएं। अंबाला में गेहूं की बिजाई का टारगेट 85 हजार हेक्टेयर रखा गया है, जिसमें से 80 हजार हेक्टेयर में बिजाई का काम हो चुका है।
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