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Ambala News: छह हत्याओं के बाद भी नहीं शिकन, भोजन के बाद ली नींद
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अंबाला। 22 जुलाई की कातिल रात। खेतों से सटे केवल दो मकान। बेरहमी से किए छह कत्ल...। रूह कंपा देने वाले नारायणगढ़-रायपुरानी के रतौर गांव के हत्याकांड की कहानी महज इतनी नहीं है। उस खूनी रात की साजिश तो और भी गहरी थी, जिसे भूषण पहले तैयार कर चुका था।
उसके मंसूबे किसी पेशेवर कातिल से कम ना थे। हत्याओं की पहली बार आरोपियों ने नारायणगढ़ थाने में बिताई। चारों आरोपियों के माथे पर कोई शिकन तक नहीं थी इतनी बर्बरता से हत्याएं की। थाने में दिया खाना खाने के बाद आराम से हवालात में चैन की नींद ली। हालांकि आरोपियों से मिलने कोई नहीं पहुंचा।
सूत्रों से पता चला है कि भूषण अपने सालों संग पहले ही हत्या का पूरा प्लान बना रखा था। इंतजार था तो बाजार गए पिता ओम प्रकाश के लौटने का। जैसे ही पिता लौटे व सुरती देवी एक साथ बाहर बेड़े में पड़ी कुर्सियों पर बैठे तो पूरी जमीन अपने नाम न करने की टीस लिए गंडासी व तलवारों से हमला कर दिया। दोनों को बहते खून के ऊपर से आरोपी घर के पीछे रहने वाले छोटे भाई के घर पहुंचा तो बर्बरता से एक के बाद एक की दो-दो वार कर गला रेत दिया। मासूम को भी नहीं बक्शा। हंसते खेलते घर में चंद ही मिनटों में मातम पसर गया।
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सुनसान रहा घर, रिश्तेदार पहुंचा न ग्रामीण
हत्याओं के बाद सोमवार रात को हुए शवों के संस्कार के बाद दोनों घर पूरी तरह से खाली थे। उन मकानों में कोई नहीं रुका था। मंगलवार को भी कोई नहीं गया। हालांकि कुछ रिश्तेदार थे लेकिन वो पास के डेरे में किसी दूसरे घर में थे जो उनके रिश्तेदार थे। बुधवार को शवों के फूल चुगे जाएंगे।
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उसके मंसूबे किसी पेशेवर कातिल से कम ना थे। हत्याओं की पहली बार आरोपियों ने नारायणगढ़ थाने में बिताई। चारों आरोपियों के माथे पर कोई शिकन तक नहीं थी इतनी बर्बरता से हत्याएं की। थाने में दिया खाना खाने के बाद आराम से हवालात में चैन की नींद ली। हालांकि आरोपियों से मिलने कोई नहीं पहुंचा।
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सूत्रों से पता चला है कि भूषण अपने सालों संग पहले ही हत्या का पूरा प्लान बना रखा था। इंतजार था तो बाजार गए पिता ओम प्रकाश के लौटने का। जैसे ही पिता लौटे व सुरती देवी एक साथ बाहर बेड़े में पड़ी कुर्सियों पर बैठे तो पूरी जमीन अपने नाम न करने की टीस लिए गंडासी व तलवारों से हमला कर दिया। दोनों को बहते खून के ऊपर से आरोपी घर के पीछे रहने वाले छोटे भाई के घर पहुंचा तो बर्बरता से एक के बाद एक की दो-दो वार कर गला रेत दिया। मासूम को भी नहीं बक्शा। हंसते खेलते घर में चंद ही मिनटों में मातम पसर गया।
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सुनसान रहा घर, रिश्तेदार पहुंचा न ग्रामीण
हत्याओं के बाद सोमवार रात को हुए शवों के संस्कार के बाद दोनों घर पूरी तरह से खाली थे। उन मकानों में कोई नहीं रुका था। मंगलवार को भी कोई नहीं गया। हालांकि कुछ रिश्तेदार थे लेकिन वो पास के डेरे में किसी दूसरे घर में थे जो उनके रिश्तेदार थे। बुधवार को शवों के फूल चुगे जाएंगे।