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सालभर में नहीं आया आईसोलेशन कोच में कोई मरीज, अब लौटेंगे ट्रैक पर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 12:38 AM IST
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No patient came in Isolation coach in a year
छावनी रेलवे यार्ड में खड़े आईसोलेशन कोच - फोटो : Ambala
कोरोना मरीजों के लिए 50 हजार रुपये की लागत से तैयार करवाए गए आईसोलेशन कोच में पिछले 11 माह से अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ। अब लगातार कोरोना मरीजों की संख्या घटती जा रही है। जिले में इस समय 40 से कम एक्टिव मरीज ही बचे हैं। अलबत्ता अब रेलवे इन्हें यात्रियों की सुविधा के लिए चलाने की योजना बना रहा है। हालांकि अभी रेलवे बोर्ड के आदेशों का इंतजार चल रहा है।
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दरअसल कोरोना में प्रदेश सरकार की सहायता से कोच तैयार किए गए थे। तभी से छावनी स्टेशन पर भी लगभग 16 कोच रेलवे यार्ड वॉशिंग लाइन के नजदीक खड़े हुए हैं। इनकी देखरेख का जिम्मा भी रेलवे पूरी तरह निभा रही है। साफ-सफाई सहित कोच में लगे अन्य उपकरणों की समय अनुसार जांच की जा रही है, लेकिन मार्च माह में तैयार किए गए इन कोचों में एक भी मरीज नहीं आया।
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50 हजार की लागत से तैयार हुए थे कोच
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर जगाधरी रेलवे वर्कशाप ने मई माह में कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए पुराने कोचों का आईसोलेशन वार्ड में तब्दील किया था, ताकि अस्पताल में जगह न होने पर कोविड मरीजों को आईसोलेशन कोच में भर्ती किया जा सके। 15 कोच छावनी स्टेशन नजदीक पटरियों पर खड़े किए गए, ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों की एंबुलेंस सीधा आईसोलेशल कोच तक पहुंच सके। सूत्रों का कहना है कि एक कोच को आईसोलेशन वार्ड में तब्दील करने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया। एक कोच में एक समय में आठ मरीज भर्ती किए जा सकते हैं। कोच की ऊपर और बीच की बर्थ निकालकर केवल नीचे की बर्थ छोड़ी गई, ताकि मरीज को उठने-बैठने और स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज करने में दिक्कत न हो। कोच तैयार करने के बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग को सुपुर्द कर दिया गया था।
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आईसोलेशन कोच को ट्रेनों में जोड़ने को लेकर अभी कोई आदेश नहीं आए हैं। रेलवे बोर्ड से जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उनकी पालना की जाएगी और उसके आधार पर ही रेल प्रबंधक से विचार-विमर्श कर फैसला लिया जाएगा।
- पंकज गुप्ता, एडीआरएम आपरेशन, अंबाला मंडल।
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