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इंतजार और विरोध में फंसी ‘पब्लिक’ की ‘पालिसी’
अंबाला
Updated Thu, 03 Oct 2013 12:57 AM IST
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सरकार की नई परिवहन पालिसी के पहले चरण में ही आवेदकों ने बेरुखी दिखा दी है। चार चरणों में दिए जाने वाले जिला के 198 परमिटों में पहले चरण में करीब चार आवेदकों ने ही रूटों के लिए आवेदन किया है।
यह वे रूट हैं, जो वर्तमान में चल रहे हैं। ऐसे में जहां जनता को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए कम से कम आठ माह का इंतजार करना होगा, वहीं इस पर भी संशय है कि क्या आवेदक परमिट के लिए आवेदन करेंगे।
ऐसे में कम से कम आठ माह तक जनता को इंतजार करना होगा, जिसके बाद साफ होगा कि क्या जनता को इस नई पालिसी का फायदा मिलेगा या नहीं। लेकिन शुरुआत में ही इस पालिसी को अंबाला में झटका लगता दिखाई दे रहा है।
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सरकार की नई परिवहन पालिसी के तहत जिला में 198 परमिट दिए जाने हैं, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रक्रिया शुरू होने के बाद पहले चरण में ही आवेदकों ने मुंह फेर लिया है।
परमिट देने का यह कार्य चार चरणों में पूरा किया जाना है, जिसके पहले चरण में मौजूदा रूटों पर परमिट लेने वालों को आवेदन करना था, लेकिन मौजूद रूटों पर चलने के लिए कोई भी बस आपरेटर तैयार नहीं है। यही कारण है कि पहले चरण में करीब 4 आवेदन ही आरटीए कार्यालय में पहुंचे हैं।
ऐसे होगा परमिट की अलाटमेंट व इंतजार
चार चरणों में नई परिवहन पालिसी के तहत परमिट दिए जाने हैं। पहला चरण उन मौजूद रूटों के लिए है, जबकि इसके बाद पहली बार बने रूटों के लिए, जिले के बाहर के रूटों के लिए और फिर आम लोगों के लिए परमिट दिए जाएंगे। प्रत्येक चरण को पंद्रह दिनों का रखा गया है।
इस में परमिट के लिए आवेदन और इसे फाइनल करना है। इसके बाद परमिट धारक को छह माह का समय दिया जाएगा। इस समय में परमिट धारक को नई बस या फिर वह बस, जिसको रजिस्ट्रेशन के बाद दस साल पूरे नहीं हुए हैं, को सड़क पर उतारना होगा। इन सारी प्रक्रियाओं में कम से कम आठ माह का समय लगेगा, जिसके लिए लोगों को इंतजार करना होगा।
12 लाख की आबादी को इंतजार
जिला की बारह लाख की आबादी को इंतजार है कि कब यह रूट अलाटमेंट पूरी हो और बसें सड़कों पर दौड़ें। क्योंकि वर्तमान में निजी वाहनों पर ही अधिकतर आबादी निर्भर है। वर्तमान में अंबाला में कुल 14 कोऑपरेटिव सोसाइटी की करीब 52 बसें चल रही हैं। नई पालिसी के तहत यदि यह रूट चल पड़ते हैं, तो जिला में बसों की संख्या करीब 410 (परिवहन समिति व रोडवेज) हो जाएगी।
यह कहती है जनता
कैंट के रहने वाले अनिल कुमार श्रीवास्तव, दीपक कनौजिया, सतविंदर सिंह, भानोखेड़ी के जसमेर सिंह, उगाड़ा के करनैल सिंह का कहना है कि नई पालिसी के शुरु होने से परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी तथा जनता को भी सुविधा होगी। साथ ही निजी वाहन चालकों के एकाधिकार से भी जनता को छुट्टी मिलेगी।
परिवहन पालिसी पर विरोध
सरकार की इस परिवहन पालिसी पर विरोध शुरू हो चुका है। इसी के तहत हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन (संबंधित सर्व कर्मचारी संघ) विभिन्न चरणों में विरोध शुरू करेगा।
यूनियन के जिला प्रधान इंद्र सिंह बधाना ने बताया कि चौबीस घंटे के पड़ाव के साथ विरोध शुरू होगा, जबकि इसके बाद हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। यह हस्ताक्षर डीसी के माध्यम से सरकार को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई परिवहन नीति रोडवेज के हित में नहीं है, जबकि सरकार को अपना रोडवेज का बेड़ा बढ़ाना चाहिए, जिससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
‘पहले चरण में करीब चार आवेदन ही आए हैं, जिन्होंने रूट परमिट के लिए आवेदन किया है। पहले चरण में वे रूट रखे गए, जिन पर मौजूदा समय में बसें चल रही हैं। अब आगे देखते हैं कि परमिट लेने के लिए कितने आवेदक आते हैं।’
- रामनाथ राणा, जिला प्रधान दी हरियाणा सहकारी परिवहन कल्याण संघ
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यह वे रूट हैं, जो वर्तमान में चल रहे हैं। ऐसे में जहां जनता को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए कम से कम आठ माह का इंतजार करना होगा, वहीं इस पर भी संशय है कि क्या आवेदक परमिट के लिए आवेदन करेंगे।
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ऐसे में कम से कम आठ माह तक जनता को इंतजार करना होगा, जिसके बाद साफ होगा कि क्या जनता को इस नई पालिसी का फायदा मिलेगा या नहीं। लेकिन शुरुआत में ही इस पालिसी को अंबाला में झटका लगता दिखाई दे रहा है।
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सरकार की नई परिवहन पालिसी के तहत जिला में 198 परमिट दिए जाने हैं, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रक्रिया शुरू होने के बाद पहले चरण में ही आवेदकों ने मुंह फेर लिया है।
परमिट देने का यह कार्य चार चरणों में पूरा किया जाना है, जिसके पहले चरण में मौजूदा रूटों पर परमिट लेने वालों को आवेदन करना था, लेकिन मौजूद रूटों पर चलने के लिए कोई भी बस आपरेटर तैयार नहीं है। यही कारण है कि पहले चरण में करीब 4 आवेदन ही आरटीए कार्यालय में पहुंचे हैं।
ऐसे होगा परमिट की अलाटमेंट व इंतजार
चार चरणों में नई परिवहन पालिसी के तहत परमिट दिए जाने हैं। पहला चरण उन मौजूद रूटों के लिए है, जबकि इसके बाद पहली बार बने रूटों के लिए, जिले के बाहर के रूटों के लिए और फिर आम लोगों के लिए परमिट दिए जाएंगे। प्रत्येक चरण को पंद्रह दिनों का रखा गया है।
इस में परमिट के लिए आवेदन और इसे फाइनल करना है। इसके बाद परमिट धारक को छह माह का समय दिया जाएगा। इस समय में परमिट धारक को नई बस या फिर वह बस, जिसको रजिस्ट्रेशन के बाद दस साल पूरे नहीं हुए हैं, को सड़क पर उतारना होगा। इन सारी प्रक्रियाओं में कम से कम आठ माह का समय लगेगा, जिसके लिए लोगों को इंतजार करना होगा।
12 लाख की आबादी को इंतजार
जिला की बारह लाख की आबादी को इंतजार है कि कब यह रूट अलाटमेंट पूरी हो और बसें सड़कों पर दौड़ें। क्योंकि वर्तमान में निजी वाहनों पर ही अधिकतर आबादी निर्भर है। वर्तमान में अंबाला में कुल 14 कोऑपरेटिव सोसाइटी की करीब 52 बसें चल रही हैं। नई पालिसी के तहत यदि यह रूट चल पड़ते हैं, तो जिला में बसों की संख्या करीब 410 (परिवहन समिति व रोडवेज) हो जाएगी।
यह कहती है जनता
कैंट के रहने वाले अनिल कुमार श्रीवास्तव, दीपक कनौजिया, सतविंदर सिंह, भानोखेड़ी के जसमेर सिंह, उगाड़ा के करनैल सिंह का कहना है कि नई पालिसी के शुरु होने से परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी तथा जनता को भी सुविधा होगी। साथ ही निजी वाहन चालकों के एकाधिकार से भी जनता को छुट्टी मिलेगी।
परिवहन पालिसी पर विरोध
सरकार की इस परिवहन पालिसी पर विरोध शुरू हो चुका है। इसी के तहत हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन (संबंधित सर्व कर्मचारी संघ) विभिन्न चरणों में विरोध शुरू करेगा।
यूनियन के जिला प्रधान इंद्र सिंह बधाना ने बताया कि चौबीस घंटे के पड़ाव के साथ विरोध शुरू होगा, जबकि इसके बाद हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। यह हस्ताक्षर डीसी के माध्यम से सरकार को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई परिवहन नीति रोडवेज के हित में नहीं है, जबकि सरकार को अपना रोडवेज का बेड़ा बढ़ाना चाहिए, जिससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
‘पहले चरण में करीब चार आवेदन ही आए हैं, जिन्होंने रूट परमिट के लिए आवेदन किया है। पहले चरण में वे रूट रखे गए, जिन पर मौजूदा समय में बसें चल रही हैं। अब आगे देखते हैं कि परमिट लेने के लिए कितने आवेदक आते हैं।’
- रामनाथ राणा, जिला प्रधान दी हरियाणा सहकारी परिवहन कल्याण संघ