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पंचायत एवं ग्रामीणों के आपसी सहयोग ने बदली गांव लखनौरा की तस्वीर
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गांव लखनौरा में स्थित थ्री पौंड सिस्टम।
- फोटो : Ambala
नारायणगढ़। पानी संग्रहण और जल संचयन में गांव लखनौरा के ग्रामीणों ने नया कीर्तिमान हासिल किया है। उन्होंने आपसी सहयोग से पूरे गांव की तस्वीर ही बदल दी है और जल संरक्षण के कई नए उदाहरण पेश किए हैं। इस गांव में बारिश के पानी को संग्रहित एवं संचित करने सहित गांव के गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था की गई है। गांव में थ्री और फाइव पोंड सिस्टम बनाए गए थे जो कि बेहतर सफल साबित हुए हैं।
इनके जरिये से गंदे पानी को फिल्टर कर लगभग 50 से 60 एकड़ भूमि में सिंचाई की जा रही है। गांव के जोहड़ों को संवार कर उनके किनारे पर तीन सुंदर पार्क भी बनाए गए हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। निवर्तमान सरपंच राजीव मेहता ने बताया कि गांव में वर्षा जल संचित करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। गांव के स्कूल और वृद्धा आश्रम जैसे सार्वजनिक भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है, इससे जमीन के भीतर पानी पहुंचाया जा रहा है। ट्यूबवेल के जो बोर फेल हो चुके हैं, उनसे भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में काम लिया जा रहा है।
मनरेगा स्कीम के तहत खोदाई कर तैयार किया जोहड़
पंचायत की जमीन में एक ओर जोहड़ मनरेगा स्कीम में खोदाई करवाकर तैयार किया गया है। इसमें भी वर्षा के पानी का संचय कर सिंचाई के काम में लिया गया है। थ्री पोंड सिस्टम और फाइव पोंड सिस्टम से गांव के गंदे पानी की निकासी नालों एवं नालियों के द्वारा इन जौहड़ों में हो रही है। पोंड सिस्टम से तो गांव की पंचायत भूमि तक लगभग तीन किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाली गई है। इससे जमीन की सिंचाई करने में गांव वासियों को काफी मदद मिल रही है।
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इनके जरिये से गंदे पानी को फिल्टर कर लगभग 50 से 60 एकड़ भूमि में सिंचाई की जा रही है। गांव के जोहड़ों को संवार कर उनके किनारे पर तीन सुंदर पार्क भी बनाए गए हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। निवर्तमान सरपंच राजीव मेहता ने बताया कि गांव में वर्षा जल संचित करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। गांव के स्कूल और वृद्धा आश्रम जैसे सार्वजनिक भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है, इससे जमीन के भीतर पानी पहुंचाया जा रहा है। ट्यूबवेल के जो बोर फेल हो चुके हैं, उनसे भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में काम लिया जा रहा है।
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मनरेगा स्कीम के तहत खोदाई कर तैयार किया जोहड़
पंचायत की जमीन में एक ओर जोहड़ मनरेगा स्कीम में खोदाई करवाकर तैयार किया गया है। इसमें भी वर्षा के पानी का संचय कर सिंचाई के काम में लिया गया है। थ्री पोंड सिस्टम और फाइव पोंड सिस्टम से गांव के गंदे पानी की निकासी नालों एवं नालियों के द्वारा इन जौहड़ों में हो रही है। पोंड सिस्टम से तो गांव की पंचायत भूमि तक लगभग तीन किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाली गई है। इससे जमीन की सिंचाई करने में गांव वासियों को काफी मदद मिल रही है।
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