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फर्जीवाड़े की जद में नगर निगम कार्यालय
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Sat, 26 Dec 2015 12:49 AM IST
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एसडीएम और सीएमओ की फर्जी मुहर लगाकर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने के मामले की जद में नगर निगम अंबाला कार्यालय भी आ गया है। नगर निगम कार्यालयों में मौजूद जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र शाखाओं से इन बर्थ सर्टिफिकेट को जारी किया जाता था। इस मामले में स्वास्थ्य महकमे के तीन कर्मचारी और दो एजेंटों की मिलीभगत सामने आ चुकी है।
अब पुलिस इस मामले में जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर नगर निगम का रिकार्ड भी खंगालेगी। उधर, पुलिस एसडीएम कार्यालय और सीएमओ कार्यालयों का भी रिकार्ड कब्जे में लेकर इस जांच को आगे बढ़ाएगी। क्योंकि इस मामले में एसडीएम और सीएमओ कार्यालयों की फर्जी मुहर बनवाकर इन्हीं कार्यालयों की संस्तुति और वेरिफिकेशन के बाद नगर निगम कार्यालयों से बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए।
पांच से पंद्रह हजार रुपये में होती थी सेटिंग
अभी तक जांच में जो सामने आया है, उसमें ये खुलासा हुआ है कि नगर निगम अंबाला कैंट व अंबाला सिटी की शाखाओं से जो बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे, उसके पांच से पंद्रह हजार रुपये लिए जाते थे। जबकि मामला ज्यादा पुराना हो तो उसे बीस से पच्चीस हजार रुपये तक भी ऐंठे जाते थे। ये वो बर्थ सर्टिफिकेट होते थे, जिन्हें बनवाने की निर्धारित सीमा गुजर चुकी थी। ये सर्टिफिकेट एक लंबी प्रक्रिया के बाद एसडीएम कार्यालय की वेरिफिकेशन और एसएमओ कार्यालय की संस्तुति के बाद ही नगर निगम से तैयार किए जाते थे।
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अभी तक जो तीन स्वास्थ्य कर्मी काबू किए गए हैं, उनमें से एक अंबाला कैंट नगर निगम शाखा में तैनात था और दो उगाला केंद्र में। यही लोग दो अन्य एजेंटों के माध्यम से जाली बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का खेल खेलते थे। एसडीएम कार्यालय से जल्द वेरिफिकेशन हो जाए, इसलिए फाइल पर सीएमओ की फर्जी मुहर लगाकर फाइल आगे बढ़ा देते थे और सीएमओ कार्यालय से फाइल चेकिंग के बाद जल्द संस्तुति मिल जाए, इसके लिए फाइल पर एसडीएम की फर्जी मुहर लगाकर फाइल पर फर्जी वेरिफिकेशन दिखा देते थे। उसके बाद आराम से नगर निगम से पुराना फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर हजारों रुपये ऐंठ लेते थे।
कर दिए डिप्टी सिविल सर्जन के जाली साइन
सेहत मंत्री अनिल विज के शहर में बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने में खेले जा रहे फर्जीवाड़े के इस खेल में केवल एसडीएम और सीएमओ की फर्जी मुहरों का ही इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि डिप्टी सिविल सर्जन डाक्टर सुरेंद्र मोहन के फर्जी साइन तक कर दिए गए। डिप्टी सिविल सर्जन के पास जब ये फाइलें ओके होने के लिए पहुंचीं तो उन्होंने करीब चार से पांच फाइलें ऐसी पकड़ी, जिस पर उनके फर्जी साइन थे। उन्होंने इस मामले से सीएमओ को अवगत करवाया और बताया कि इन फाइलों पर जो साइन हैं, वे उनके नहीं हैं। उसके बाद ही इस फर्जीवाड़े का शक हुआ और सीएमओ ने इस मामले से डीसी व डीसीपी से अवगत करवाते हुए पुलिस जांच की मांग की। इसी जांच में अब ये भी खुलासा हो गया कि डिप्टी सिविल सर्जन के फर्जी साइन ही नहीं, बल्कि फाइलों पर लगने वाली एसडीएम और सीएमओ की मुहरें भी फर्जी थी।
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इस मामले में जो स्वास्थ्य कर्मी फंसे हैं, उसमें से एक नगर निगम में कार्यरत था और वहीं से ये बर्थ सर्टिफिकेट जारी होते थे। इस मामले में पुलिस जांच थोड़ी लेट हो गई, लेकिन अब पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। लिहाजा एसडीएम, सीएमओ और नगर निगम का रिकार्ड खंगाला जाएगा।
-डाक्टर विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला।
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अब पुलिस इस मामले में जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर नगर निगम का रिकार्ड भी खंगालेगी। उधर, पुलिस एसडीएम कार्यालय और सीएमओ कार्यालयों का भी रिकार्ड कब्जे में लेकर इस जांच को आगे बढ़ाएगी। क्योंकि इस मामले में एसडीएम और सीएमओ कार्यालयों की फर्जी मुहर बनवाकर इन्हीं कार्यालयों की संस्तुति और वेरिफिकेशन के बाद नगर निगम कार्यालयों से बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए।
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पांच से पंद्रह हजार रुपये में होती थी सेटिंग
अभी तक जांच में जो सामने आया है, उसमें ये खुलासा हुआ है कि नगर निगम अंबाला कैंट व अंबाला सिटी की शाखाओं से जो बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे, उसके पांच से पंद्रह हजार रुपये लिए जाते थे। जबकि मामला ज्यादा पुराना हो तो उसे बीस से पच्चीस हजार रुपये तक भी ऐंठे जाते थे। ये वो बर्थ सर्टिफिकेट होते थे, जिन्हें बनवाने की निर्धारित सीमा गुजर चुकी थी। ये सर्टिफिकेट एक लंबी प्रक्रिया के बाद एसडीएम कार्यालय की वेरिफिकेशन और एसएमओ कार्यालय की संस्तुति के बाद ही नगर निगम से तैयार किए जाते थे।
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अभी तक जो तीन स्वास्थ्य कर्मी काबू किए गए हैं, उनमें से एक अंबाला कैंट नगर निगम शाखा में तैनात था और दो उगाला केंद्र में। यही लोग दो अन्य एजेंटों के माध्यम से जाली बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का खेल खेलते थे। एसडीएम कार्यालय से जल्द वेरिफिकेशन हो जाए, इसलिए फाइल पर सीएमओ की फर्जी मुहर लगाकर फाइल आगे बढ़ा देते थे और सीएमओ कार्यालय से फाइल चेकिंग के बाद जल्द संस्तुति मिल जाए, इसके लिए फाइल पर एसडीएम की फर्जी मुहर लगाकर फाइल पर फर्जी वेरिफिकेशन दिखा देते थे। उसके बाद आराम से नगर निगम से पुराना फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर हजारों रुपये ऐंठ लेते थे।
कर दिए डिप्टी सिविल सर्जन के जाली साइन
सेहत मंत्री अनिल विज के शहर में बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने में खेले जा रहे फर्जीवाड़े के इस खेल में केवल एसडीएम और सीएमओ की फर्जी मुहरों का ही इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि डिप्टी सिविल सर्जन डाक्टर सुरेंद्र मोहन के फर्जी साइन तक कर दिए गए। डिप्टी सिविल सर्जन के पास जब ये फाइलें ओके होने के लिए पहुंचीं तो उन्होंने करीब चार से पांच फाइलें ऐसी पकड़ी, जिस पर उनके फर्जी साइन थे। उन्होंने इस मामले से सीएमओ को अवगत करवाया और बताया कि इन फाइलों पर जो साइन हैं, वे उनके नहीं हैं। उसके बाद ही इस फर्जीवाड़े का शक हुआ और सीएमओ ने इस मामले से डीसी व डीसीपी से अवगत करवाते हुए पुलिस जांच की मांग की। इसी जांच में अब ये भी खुलासा हो गया कि डिप्टी सिविल सर्जन के फर्जी साइन ही नहीं, बल्कि फाइलों पर लगने वाली एसडीएम और सीएमओ की मुहरें भी फर्जी थी।
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इस मामले में जो स्वास्थ्य कर्मी फंसे हैं, उसमें से एक नगर निगम में कार्यरत था और वहीं से ये बर्थ सर्टिफिकेट जारी होते थे। इस मामले में पुलिस जांच थोड़ी लेट हो गई, लेकिन अब पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। लिहाजा एसडीएम, सीएमओ और नगर निगम का रिकार्ड खंगाला जाएगा।
-डाक्टर विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला।