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Ambala News: कई नेताओं की खिसकी जमीन तो कई निर्दलीय मैदान में उतरने की कर रहे तैयारी
Sat, 24 Jan 2026 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:47 AM IST
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अंबाला सिटी। मेयर पद बीसी-बी महिला होने से कई नेता मेयर का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। कई नेता पहले से तैयारी में जुटे थे। यही नहीं कई ऐसे भी नेता हैं, जिनका वार्ड तो आरक्षित हो चुका था, लेकिन अब वह मेयर पद के लिए तैयारी में जुटे गए हैं। निगम में मेयर व पार्षदों के चुनाव की प्रक्रिया तेज होने पर शहर में पोस्टरों की बाढ़ आ गई है। कई नए नेताओं ने शहर में भी चुनावी तैयारी को लेकर पोस्टर व बैनर लगाने शुरू कर दिए हैं, इनमें कई नेता व कार्यकर्ता के चेहरे भी देखने को मिल रहे हैं। वहीं, चुनाव में कई पुराने चेहरे भी तैयारी में जुटे रहे हैं और निर्दलीय ही मैदान में दिख सकते हैं।
मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में चुनाव संभावित
मेयर पद का ड्रा होने पर चुनावी प्रक्रिया में तेजी आ सकती है, हालांकि कांग्रेस की ओर से भी हाइकोर्ट में एडहॉक कमेटी को चुनौती देते हुए याचिका डाली गई है। निगम चुनाव मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में संभावित बताए जा रहे हैं। वहीं, चुनाव लड़ने वाले नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है कि शहर में कौन नेता उतर सकता है और वह कैसे तैयारी को लेकर रणनीति बनाई जाए।
पत्नी व पति दोनों पार्षद रहे, अब दोनों मैदान में दिख सकते हैं निर्दलीय
2013 के कार्यकाल में निगम के वार्ड-1 से सोनिया चौधरी पार्षद बनी थी और 2019 के चुनाव में उनके पति विजय कुमार टोनी चौधरी पार्षद बने थे। वह दोनों ही बार निर्दलीय चुनाव में उतरे थे। अब मेयर पद बीसी-बी महिला होने से पूर्व पार्षद सोनिया चौधरी मैदान में निर्दलीय दिख सकती हैं। टोनी चौधरी वार्ड नंबर चार से पार्षद थे। अब उनका वार्ड नंबर चार बीसी-ए आरक्षित हो चुका है। टोनी चौधरी वार्ड नंबर तीन ओपन वार्ड होने से निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
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मिथुन वर्मा का वार्ड एससी आरक्षित हुआ, अब आगामी रणनीति बना रहे
बीते कार्यकाल में मिथुन वर्मा कांग्रेस से पार्षद बने थे। उनका कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म हुआ है। उन्होंने हाइकोर्ट में कांग्रेस की ओर से वार्डबंदी के लिए बनाई गई एडहॉक कमेटी को चुनौती दी है। मामले की अगली तारीख 5 फरवरी लगी है। मिथुन वर्मा ने बताया कि उनका वार्ड-11 एससी आरक्षित हुआ है। अब आगे क्या करना है, इसकी रणनीति बनाई जाएगी, अभी मामला हाइकोर्ट में भी है।
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मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में चुनाव संभावित
मेयर पद का ड्रा होने पर चुनावी प्रक्रिया में तेजी आ सकती है, हालांकि कांग्रेस की ओर से भी हाइकोर्ट में एडहॉक कमेटी को चुनौती देते हुए याचिका डाली गई है। निगम चुनाव मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में संभावित बताए जा रहे हैं। वहीं, चुनाव लड़ने वाले नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है कि शहर में कौन नेता उतर सकता है और वह कैसे तैयारी को लेकर रणनीति बनाई जाए।
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पत्नी व पति दोनों पार्षद रहे, अब दोनों मैदान में दिख सकते हैं निर्दलीय
2013 के कार्यकाल में निगम के वार्ड-1 से सोनिया चौधरी पार्षद बनी थी और 2019 के चुनाव में उनके पति विजय कुमार टोनी चौधरी पार्षद बने थे। वह दोनों ही बार निर्दलीय चुनाव में उतरे थे। अब मेयर पद बीसी-बी महिला होने से पूर्व पार्षद सोनिया चौधरी मैदान में निर्दलीय दिख सकती हैं। टोनी चौधरी वार्ड नंबर चार से पार्षद थे। अब उनका वार्ड नंबर चार बीसी-ए आरक्षित हो चुका है। टोनी चौधरी वार्ड नंबर तीन ओपन वार्ड होने से निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
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मिथुन वर्मा का वार्ड एससी आरक्षित हुआ, अब आगामी रणनीति बना रहे
बीते कार्यकाल में मिथुन वर्मा कांग्रेस से पार्षद बने थे। उनका कार्यकाल 13 जनवरी को खत्म हुआ है। उन्होंने हाइकोर्ट में कांग्रेस की ओर से वार्डबंदी के लिए बनाई गई एडहॉक कमेटी को चुनौती दी है। मामले की अगली तारीख 5 फरवरी लगी है। मिथुन वर्मा ने बताया कि उनका वार्ड-11 एससी आरक्षित हुआ है। अब आगे क्या करना है, इसकी रणनीति बनाई जाएगी, अभी मामला हाइकोर्ट में भी है।