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गड़बड़ी : सिरिंज कंपनी बदली तो घटी गुणवत्ता, दवा भरने से पहले ही टूट रहे लॉक
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जांच के दौरान टूटी हुई पांच एमएल की नई सिरिंज। संवाद
सुखबीर सिंह
अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में एक बार फिर से उपचार सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में तीन दिन पहले आई पांच एमएल की सिरिंज हल्की गुणवत्ता हैं।
ये सिरिंज के लाॅक प्रयोग होने से पहले ही टूट रहे हैं। जब अधिक लॉक टूटने लगे तो अब नई सिरिंज की गुणवत्ता पर ट्राॅमा सेंटर ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके लिए सिटी के नागरिक अस्पताल के प्रबंधन को पत्र लिखकर सिरिंज की गुणवत्ता की जानकारी दी गई है। इस मामले की जब पड़ताल की तो पाया कि हाल ही में सिरिंज की सप्लाई नई कंपनी से ली है। इसका इस्तेमाल होते ही कमी नजर आने लग गई। सबसे अधिक कमियां पांच एमएल की सिरिंज में हैं।
50 में से 10 सिरिंज निकल रहीं खराब
इससे पहले कुल सिरिंजों में से दो प्रतिशत खराबी देखने को मिली है। इस सिरिंज में दवा भरने के लिए खोला जाता है तो उससे पहले ही उसका लॉक टूट जाता है। इस बार ये संख्या बढ़ गई हैं। 50 में से करीब 10 सिरिंज खराब हो रही हैं। इसके अतिरिक्त अगर टूट-फूट होती है तो उस वस्तु की जांच कराई जाती है।
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कंपनी बदलने के बाद घटी गुणवत्ता
नागरिक अस्पताल और जिला भर के अस्पताल को अंबाला में स्थित वेयरहाउस से दवाओं और उपकरण की सप्लाई होती है। यहीं से कुरुक्षेत्र और यमुनानगर को भी सप्लाई जाती है। वेयरहाउस को सरकार के एमएमएससी पोर्टल से उपकरणों और दवाओं का स्टॉक मिलता है। बीते माह तक पांच एमएल की सिरिंज हाईटेक कंपनी की आ रही थी, जिनमें अधिक खराबी नहीं मिलती थी। अब हाल ही में कंपनी बदलकर प्रीकॉन नामक कंपनी से सिरिंज ली जा रही है। बाजार में इस सिरिंज की कीमत पांच से 10 रुपये तक की है। इसके तहत नागरिक अस्पताल के स्टोर में इन सिरिंजों के स्टॉक की आपूर्ति की गई थी। इसके बाद एक मई को स्टोर से सिरिंज का यह स्टॉक ट्रामा सेंटर में भेजा गया था। जब कर्मचारियों ने इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज का प्रयोग किया तो इनकी लॉक टूटने लगा।
पीएमओ को लिखा पत्र
ट्राॅमा सेंटर की ओर से अब इस समस्या के लिए पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि उक्त सिरिंज की गुणवत्ता सही नहीं है। इसके इस्तेमाल से समय भी अधिक लगता है और मरीज के उपचार में भी देरी हो रही है। इसी महीने से इन सिरिंज का इस्तेमाल शुरू किया गया है। ट्रामा सेंटर को करीब दो हजार सिरिंज दी गई थी।
रोजाना होती है 500 सिरिंज की खपत
नागरिक अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में रोजाना करीब ढाई एम, पांच एमएल और 10 एमएल की करीब 500 सिरिंज का इस्तेमाल होता है। इन सिरिंज से पेट दर्द के करीब 100 मरीज, कुत्ते के काटने के करीब 15 मरीज, हादसों में घायल हुए मरीजों को 50 तो अन्य मामलों और भर्ती मरीजों को टीके लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सुई भीतर रहने का भी खतरा
अब इन सिरिंज के इस्तेमाल करने से पहले अस्पताल कर्मचारी पहले जांच कर रहे हैं। इसके बाद दवा भर रहे हैं। इससे मरीज के शरीर में सुई न रहे जाए। डॉ. संजय ने बताया कि अगर सुई मरीज के शरीर में रह जाए या गलत जगह लग जाए तो संक्रमण भी हो सकता है। जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
लॉक कमजोर होने का यह भी तर्क
मेडिकल स्टोर कर्मचारियों का कहना है कि कई बार नशे के आदी अस्पताल से सिरिंज चुराकर नशे के लिए उसे इस्तेमाल कर लेते है। इसलिए अब सिरिंज में लॉक काफी हल्का दिया जाता है। इससे अगर सिरिंज को दोबारा इस्तेमाल करे तो वह टूट जाए।
वर्जन
यह मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आया है। दो प्रतिशत तक टूट-फूट चल जाती है। अगर इससे अधिक टूट-फूट सामने आ रही है तो इस बारे में नागरिक अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. राकेश सहल, सीएमओ स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में एक बार फिर से उपचार सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में तीन दिन पहले आई पांच एमएल की सिरिंज हल्की गुणवत्ता हैं।
ये सिरिंज के लाॅक प्रयोग होने से पहले ही टूट रहे हैं। जब अधिक लॉक टूटने लगे तो अब नई सिरिंज की गुणवत्ता पर ट्राॅमा सेंटर ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके लिए सिटी के नागरिक अस्पताल के प्रबंधन को पत्र लिखकर सिरिंज की गुणवत्ता की जानकारी दी गई है। इस मामले की जब पड़ताल की तो पाया कि हाल ही में सिरिंज की सप्लाई नई कंपनी से ली है। इसका इस्तेमाल होते ही कमी नजर आने लग गई। सबसे अधिक कमियां पांच एमएल की सिरिंज में हैं।
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50 में से 10 सिरिंज निकल रहीं खराब
इससे पहले कुल सिरिंजों में से दो प्रतिशत खराबी देखने को मिली है। इस सिरिंज में दवा भरने के लिए खोला जाता है तो उससे पहले ही उसका लॉक टूट जाता है। इस बार ये संख्या बढ़ गई हैं। 50 में से करीब 10 सिरिंज खराब हो रही हैं। इसके अतिरिक्त अगर टूट-फूट होती है तो उस वस्तु की जांच कराई जाती है।
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कंपनी बदलने के बाद घटी गुणवत्ता
नागरिक अस्पताल और जिला भर के अस्पताल को अंबाला में स्थित वेयरहाउस से दवाओं और उपकरण की सप्लाई होती है। यहीं से कुरुक्षेत्र और यमुनानगर को भी सप्लाई जाती है। वेयरहाउस को सरकार के एमएमएससी पोर्टल से उपकरणों और दवाओं का स्टॉक मिलता है। बीते माह तक पांच एमएल की सिरिंज हाईटेक कंपनी की आ रही थी, जिनमें अधिक खराबी नहीं मिलती थी। अब हाल ही में कंपनी बदलकर प्रीकॉन नामक कंपनी से सिरिंज ली जा रही है। बाजार में इस सिरिंज की कीमत पांच से 10 रुपये तक की है। इसके तहत नागरिक अस्पताल के स्टोर में इन सिरिंजों के स्टॉक की आपूर्ति की गई थी। इसके बाद एक मई को स्टोर से सिरिंज का यह स्टॉक ट्रामा सेंटर में भेजा गया था। जब कर्मचारियों ने इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज का प्रयोग किया तो इनकी लॉक टूटने लगा।
पीएमओ को लिखा पत्र
ट्राॅमा सेंटर की ओर से अब इस समस्या के लिए पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि उक्त सिरिंज की गुणवत्ता सही नहीं है। इसके इस्तेमाल से समय भी अधिक लगता है और मरीज के उपचार में भी देरी हो रही है। इसी महीने से इन सिरिंज का इस्तेमाल शुरू किया गया है। ट्रामा सेंटर को करीब दो हजार सिरिंज दी गई थी।
रोजाना होती है 500 सिरिंज की खपत
नागरिक अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में रोजाना करीब ढाई एम, पांच एमएल और 10 एमएल की करीब 500 सिरिंज का इस्तेमाल होता है। इन सिरिंज से पेट दर्द के करीब 100 मरीज, कुत्ते के काटने के करीब 15 मरीज, हादसों में घायल हुए मरीजों को 50 तो अन्य मामलों और भर्ती मरीजों को टीके लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सुई भीतर रहने का भी खतरा
अब इन सिरिंज के इस्तेमाल करने से पहले अस्पताल कर्मचारी पहले जांच कर रहे हैं। इसके बाद दवा भर रहे हैं। इससे मरीज के शरीर में सुई न रहे जाए। डॉ. संजय ने बताया कि अगर सुई मरीज के शरीर में रह जाए या गलत जगह लग जाए तो संक्रमण भी हो सकता है। जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
लॉक कमजोर होने का यह भी तर्क
मेडिकल स्टोर कर्मचारियों का कहना है कि कई बार नशे के आदी अस्पताल से सिरिंज चुराकर नशे के लिए उसे इस्तेमाल कर लेते है। इसलिए अब सिरिंज में लॉक काफी हल्का दिया जाता है। इससे अगर सिरिंज को दोबारा इस्तेमाल करे तो वह टूट जाए।
वर्जन
यह मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आया है। दो प्रतिशत तक टूट-फूट चल जाती है। अगर इससे अधिक टूट-फूट सामने आ रही है तो इस बारे में नागरिक अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. राकेश सहल, सीएमओ स्वास्थ्य विभाग अंबाला।

जांच के दौरान टूटी हुई पांच एमएल की नई सिरिंज। संवाद

जांच के दौरान टूटी हुई पांच एमएल की नई सिरिंज। संवाद