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Ambala News: 3.11 किलो अफीम के साथ नशा तस्कर गिरफ्तार
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अंबाला कैंट स्टेशन पर रेलवे कोर्ट में पेशी के बाद रिमांड पर लेकर जाती सीआईए टीम। संवाद
- फोटो : 1
- पूछताछ में बोला- पत्नी के प्रसव के लिए 15 हजार रुपये का इंतजाम न होने पर बना तस्कर
हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। जीआरपी की सीआईए टीम ने अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1-ए से 3 किलो 11 ग्राम अफीम के साथ एक अंतरराज्यीय नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी बिहार के पूर्वी चंपारण का निवासी 27 वर्षीय अमन कुमार है जोकि नेपाल बॉर्डर से लगता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि पत्नी के प्रसव के लिए 15 हजार रुपये नहीं होने के कारण उसने यह रास्ता चुना।
सीआईए जीआरपी की पूछताछ में आरोपी अमन ने बताया कि वो मजदूरी करके परिवार पालता था। पत्नी की डिलीवरी (प्रसव) होने वाली थी और उसे 15 हजार रुपये की जरूरत थी। पैसों का कोई और इंतजाम न होने पर उसने नशा तस्करी का रास्ता चुन लिया। उसने बताया कि पड़ोस का ही एक व्यक्ति इस कारोबार से जुड़ा हुआ था। पहले स्थानीय स्तर पर अफीम की छोटी खेप सप्लाई करने पर उसे 2 से 3 हजार रुपये मिलते थे। इस बार नेपाल से अफीम लाकर आम्रपाली एक्सप्रेस के एसी कोच में बैठकर वह सीधे अंबाला पहुंचा था। -संवाद
लाल टी-शर्ट का कोडवर्ड और तोड़कर फेंकते थे सिम
सीआईए प्रभारी श्याम सिंह ने बताया कि नशा भेजने वाले गिरोह का सरगना शातिर है। वह पुलिस से बचने के लिए गरीब और जरूरतमंद लोगों को ही कूरियर के रूप में चुनता है ताकि पकड़े जाने पर भी पुलिस उस तक न पहुंच सके। तस्करों को पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं दी जाती। मोबाइल नंबर के जरिये संपर्क साधा जाता था और सप्लाई के लिए लाल टी-शर्ट को कोडवर्ड बनाया गया था। माल की डिलीवरी होते ही सिम तोड़कर फेंक दिया जाता था।
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ईटीओ पवन कुमार की मौजूदगी में तलाशी के दौरान आरोपी की जींस और पिट्ठू बैग से यह खेप मिली। आरोपी को रेलवे कोर्ट में पेश कर 7 दिन के रिमांड की मांग की, जहां से अदालत ने 5 दिन का रिमांड मंजूर किया है। अब जीआरपी की टीम पंजाब, हरियाणा और बिहार स्थित ठिकानों पर दबिश देकर नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। इस कार्रवाई में सीआईए के एएसआई राजेश, प्रदीप, कुलबीर सिंह, जयसिंह और आरपीएफ के एएसआई नूरदीन की विशेष भूमिका रही।
9 महीनों में 17 मामलों में 310 किग्रा से अधिक नशीले पदार्थ जब्त
ट्रेनों के माध्यम से नशे की खेप को एक से दूसरी जगह पर भेजने का सिलसिला लगातार जारी है। लेकिन जीआरपी व सीआईए टीम के कारण सभी मामलों में तस्कर पकड़े गए हैं जोकि अब सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं। यह खुलासा जीआरपी थाने में 9 माह के अंदर दर्ज हुए 17 मामलों से लगाया जा सकता है। इन मामलों के तहत कुल 310 किग्रा के करीब नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके तहत टीमों ने भारी मात्रा में डोडा पोस्त, गांजा और अफीम बरामद की है।
अफीम नेपाल से, गांजा और चूरा पोस्त ओडिशा-एमपी से आ रहा
दो वर्षों में नशा करने वाले बढ़े हैं तो नशा तस्करी के विभिन्न तरीकों में भी इजाफा हुआ है। तस्करी के लिए रेल मार्ग और बस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि यहां भीड़ में तस्करों की पहचान नहीं हो सकती है। अगर यह पकड़े भी जाते हैं तो अधिकांश मामलों में मुखबिर द्वारा सूचना लीक करने पर ही कार्रवाई होती है। अन्यथा ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि यात्रियों की भीड़ में इन तस्करों की पहचान हो सके। इसके अलावा ऐसे मामलों की जांच करने वाले अधिकारी बताते हैं कि तस्कर खुद तस्करी न कर आम लोगों को चिह्नित करते हैं। जिन लोगों को रुपयों की जरूरत है उन्हें लालच देकर जाल में फंसा लेते हैं। कैंट रेलवे स्टेशन पर बीते दो वर्षों में पकड़े गए अधिकांश आरोपियों में आम लोग ही थे। अधिकारियों की मानें तो अफीम नेपाल के रास्ते आ रही है तो वहीं ओडिशा और मध्यप्रदेश से चूरा पोस्त पंजाब और उत्तर के अन्य राज्यों में सप्लाई हो रहा है। इस साल 17 नशे की प्राथमिकियों में नशा पंजाब सप्लाई होने जा रहा था।
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हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। जीआरपी की सीआईए टीम ने अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1-ए से 3 किलो 11 ग्राम अफीम के साथ एक अंतरराज्यीय नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी बिहार के पूर्वी चंपारण का निवासी 27 वर्षीय अमन कुमार है जोकि नेपाल बॉर्डर से लगता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि पत्नी के प्रसव के लिए 15 हजार रुपये नहीं होने के कारण उसने यह रास्ता चुना।
सीआईए जीआरपी की पूछताछ में आरोपी अमन ने बताया कि वो मजदूरी करके परिवार पालता था। पत्नी की डिलीवरी (प्रसव) होने वाली थी और उसे 15 हजार रुपये की जरूरत थी। पैसों का कोई और इंतजाम न होने पर उसने नशा तस्करी का रास्ता चुन लिया। उसने बताया कि पड़ोस का ही एक व्यक्ति इस कारोबार से जुड़ा हुआ था। पहले स्थानीय स्तर पर अफीम की छोटी खेप सप्लाई करने पर उसे 2 से 3 हजार रुपये मिलते थे। इस बार नेपाल से अफीम लाकर आम्रपाली एक्सप्रेस के एसी कोच में बैठकर वह सीधे अंबाला पहुंचा था। -संवाद
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लाल टी-शर्ट का कोडवर्ड और तोड़कर फेंकते थे सिम
सीआईए प्रभारी श्याम सिंह ने बताया कि नशा भेजने वाले गिरोह का सरगना शातिर है। वह पुलिस से बचने के लिए गरीब और जरूरतमंद लोगों को ही कूरियर के रूप में चुनता है ताकि पकड़े जाने पर भी पुलिस उस तक न पहुंच सके। तस्करों को पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं दी जाती। मोबाइल नंबर के जरिये संपर्क साधा जाता था और सप्लाई के लिए लाल टी-शर्ट को कोडवर्ड बनाया गया था। माल की डिलीवरी होते ही सिम तोड़कर फेंक दिया जाता था।
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ईटीओ पवन कुमार की मौजूदगी में तलाशी के दौरान आरोपी की जींस और पिट्ठू बैग से यह खेप मिली। आरोपी को रेलवे कोर्ट में पेश कर 7 दिन के रिमांड की मांग की, जहां से अदालत ने 5 दिन का रिमांड मंजूर किया है। अब जीआरपी की टीम पंजाब, हरियाणा और बिहार स्थित ठिकानों पर दबिश देकर नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। इस कार्रवाई में सीआईए के एएसआई राजेश, प्रदीप, कुलबीर सिंह, जयसिंह और आरपीएफ के एएसआई नूरदीन की विशेष भूमिका रही।
9 महीनों में 17 मामलों में 310 किग्रा से अधिक नशीले पदार्थ जब्त
ट्रेनों के माध्यम से नशे की खेप को एक से दूसरी जगह पर भेजने का सिलसिला लगातार जारी है। लेकिन जीआरपी व सीआईए टीम के कारण सभी मामलों में तस्कर पकड़े गए हैं जोकि अब सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं। यह खुलासा जीआरपी थाने में 9 माह के अंदर दर्ज हुए 17 मामलों से लगाया जा सकता है। इन मामलों के तहत कुल 310 किग्रा के करीब नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके तहत टीमों ने भारी मात्रा में डोडा पोस्त, गांजा और अफीम बरामद की है।
अफीम नेपाल से, गांजा और चूरा पोस्त ओडिशा-एमपी से आ रहा
दो वर्षों में नशा करने वाले बढ़े हैं तो नशा तस्करी के विभिन्न तरीकों में भी इजाफा हुआ है। तस्करी के लिए रेल मार्ग और बस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि यहां भीड़ में तस्करों की पहचान नहीं हो सकती है। अगर यह पकड़े भी जाते हैं तो अधिकांश मामलों में मुखबिर द्वारा सूचना लीक करने पर ही कार्रवाई होती है। अन्यथा ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि यात्रियों की भीड़ में इन तस्करों की पहचान हो सके। इसके अलावा ऐसे मामलों की जांच करने वाले अधिकारी बताते हैं कि तस्कर खुद तस्करी न कर आम लोगों को चिह्नित करते हैं। जिन लोगों को रुपयों की जरूरत है उन्हें लालच देकर जाल में फंसा लेते हैं। कैंट रेलवे स्टेशन पर बीते दो वर्षों में पकड़े गए अधिकांश आरोपियों में आम लोग ही थे। अधिकारियों की मानें तो अफीम नेपाल के रास्ते आ रही है तो वहीं ओडिशा और मध्यप्रदेश से चूरा पोस्त पंजाब और उत्तर के अन्य राज्यों में सप्लाई हो रहा है। इस साल 17 नशे की प्राथमिकियों में नशा पंजाब सप्लाई होने जा रहा था।