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जिंदगी परेशानी भरी, अब विकल्प ढूंढने लगे लोग
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
Updated Mon, 05 Dec 2016 11:58 PM IST
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अंबाला कैंट। नोटबंदी के बाद बेशक जिंदगी परेशानियों से घिर गई है, लेकिन 27 दिन बीतने के बाद अब लोग इसका विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। डेबिट कार्ड से खरीददारी होने लगी है, जबकि लोगों की जेब से कैश धीरे-धीरे खत्म होने लगा है। हालांकि यह सब शुरुआती दौर में है, लेकिन लोग अब खरीददारी के लिए अपनी आदतों को बदलने में जुट गए हैं।
यह है फिलहाल परेशानी
नोटबंदी के सत्ताइस दिन बीत जाने के बाद अभी तक लोगों को कैश पर ही भरोसा है। इसके लिए लोग लाइनों में लगे हुए हैं, जबकि एटीएम पर भी लाइनें लगी हैं। लोग कैश लेकर ही खरीददारी तो कर रहे हैं, जबकि अधिकतर दुकानों के पास स्वाइप मशीनें नहीं हैं। अब कैश पूरा नहीं मिल रहा है और यही कारण है कि कैश लेकर खरीददारी करना अब मुश्किल हो रहा है। इसी तरह अन्य रूटीन के खर्च भी कैश के जरिये होते थे, लेकिन इनको निपटाने में भी कैश की दिक्कत आड़े आ रही है, जबकि अब लोगों ने इसका विकल्प तलाशना शुरु कर दिया है। धीरे-धीरे अब लोग कैश छोड़कर अन्य तरीकों से खरीददारी में जुट गए हैं।
- दवा की जरूरत थी, लेकिन कैश में दो हजार रुपये का नोट था। करीब एक सौ साठ रुपये की दवा का बिल बना, लेकिन दो हजार रुपये दिया, तो दुकानदार ने लेने से मना कर दिया। साथ ही दुकानदार ने यह आप्शन भी दिया कि यदि डेबिट कार्ड है, तो स्वाइप करवाएं और एक सौ साठ रुपये डेबिट कार्ड से ही दुकानदार को दिए। काफी आसान लगा है और अब इसे ही ज्यादा इस्तेमाल करेंगे।
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- रजनीश गुप्ता, नौकरीपेशा, अंबाला कैंट
महीने भर का राशन लेने के लिए मॉल में गए थे। हालांकि जितना बिल बना था, उतने रुपये जेब में कैश थे, लेकिन जब देखा कि डेबिट से पेमेंट ली जा रही है, तो पहली बार कार्ड से पेमेंट की। हालांकि यह आप्शन पहली बार अपनाया, लेकिन काफी बेहतर लगा। अब आगे इसी तरह से पेमेंट करेंगे, जबकि कैश रखने का झंझट ही खत्म होगा।
- कमलजीत सिंह, जॉब कंसलटेंट, अंबाला कैंट
बच्चों के लिए गर्म कपड़े खरीदने के लिए मार्केट गई थी, जबकि बिल भी करीब साढ़े तीन हजार रुपये का बना गया था। कैश कम था, लेकिन अच्छा था कि डेबिट कार्ड साथ लेकर गई थी। दुकानदार को डेबिट कार्ड से पेमेंट कर दिया और बिल ले लिया। जरूरत के हिसाब से उसी दुकान की तलाश करेंगे, जहां पर यह कार्ड चले और उनका काम भी चल जाए।
- वंदना शर्मा, गृहणी, अंबाला सिटी
यह कहते हैं दुकानदार
पहले लोग कैश लेकर आते थे और कईं बार तो बकाया देने में ही परेशानी होती थी। अब लोगों के पास सीमित कैश है और सैलरी तक भी पूरी नहीं मिल रही है। ऐसे में शॉपिंग करने आने वाले कार्ड से पेमेंट कर जाते हैं। वे भी अब कार्ड से पेमेंट करने लगे हैं, जो हमेशा कैश देकर जाते थे।
- कविश भसीन, शोरूम संचालक
लोगों के लिए खरीददारी आसान हो गई है, जबकि डेबिट कार्ड मशीन से खरीददारी में दिक्कत नहीं आती। हां, यदि सर्वर डाउन हो, तो दिक्कत है, लेकिन फिर भी काफी राहत है। जब से नोटबंदी शुरु हुई है और ई पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है, लोगों ने कार्ड का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है।
- सुरेंद्र सिंह, रेडिमेड गारमेंट्स दुकानदार
पेंशन व खाताधारक कैश के लिए परेशान
अंबाला कैंट/नारायणगढ़। नोटबंदी के 27 दिन बीत जाने के बाद भी खाताधारक और पेंशनर परेशान हैं। चार दिनों से लगातार बैंकों तक लोग जा रहे हैं, लेकिन फिर भी कैश नहीं मिल पा रहा है। नारायणगढ़ में एसबीआई की शाखा के बाहर लंबी लाइनें लगी रहीं, जबकि कैश के लिए जो परेशान दिखे। सोमवार को कई बुजुर्ग बैंक शाखा के बाहर सरकार की इस व्यवस्था को कोसते रहे। कई पेंशनरों का घर का गुजरा इस पेंशन पर टिका है, वहीं सोमवार को खाताधारकों को कुछ हजार रुपये ही मिले। इसी तरह एटीएम से भी मात्र दो हजार रुपये ही निकले, जबकि लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। अंबाला कैंट के माल रोड स्थित एसबीआई शाखा में कुछ लोगों में बहसबाजी हो गई। कैश निकलवाने के लिए लाइनों में लगे लोगो को अनदेखा कर एक व्यक्ति ने जब बैक में घुसने की कोशिश की, तो लोगों ने आपत्ति उठा दी। इसी पर लाइन में लगे लोगों व व बैंक में घुस रहे लोगों के बीच बहसबाजी हो गई, जिसे अन्य लोगों ने शांत कराया।
बिना बिल का सामान यानी नोटबंदी अभियान में छेद
- बिना बिल सामान लेने से फिर बढ़ेगा कालाधन
अंबाला कैंट। बिना बिल का सामान खरीदने की आदत नोटबंदी के अभियान में एक तरह से छेड का काम कर रही है। अंबाला में ग्राहकों की यह आदत जहां कालाधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं सरकार की मुहिम में भी आड़े आ रही है। इस मामले में बेशक प्रशासन भी लोगों को जागरूक कर रहा है, लेकिन दुकानदार भी मांगने पर लोगों को बिल नहीं दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अंबाला में कईं कारोबारी सीधे दिल्ली व अन्य क्षेत्रों से सामान लाकर अंबाला में अपना कारोबार चला रहे हैं। यहत सारा सामान बिना बिल के अंबाला तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि धड़ल्ले से इसकी बिक्री भी हो रही है। बताया जाता है कि ग्राहकों को भी यह सारा सामान बिना बिल के ही थमाया जाता है। कईं ग्राहक यदि बिल मांगते भी है, तो यह कारोबारी साफ इनकार कर देते हैं। बिल की सारी राशि बिना टैक्स के कारोबारी के जेब में जा रही है, जबकि जिस मकसद को लेकर नोटबंदी ेकी गई थी, उस में उपभोक्ता की नजरंदाजी एक तरह से छेद का काम कर रही है। पिछले करीब दो दशकों में इस तरह की मार्केट पूरी तरह से अपने पांव अंबाला में जमा चुका है। इस तरह की मार्केट सरकार को काफी नुकसान पहुंचा रही है, जबकि इस पर अभी तक शिकंजा कसा नहीं गया है।
कैंट के रहने वाले आशीष गुप्ता, संजय शर्मा, मनोज तिवारी, रामकिशन मल्होत्रा, दीपांशु, सिटी के हरजीत सिंह, शेखर कुमार, राजेश गुप्ता, महेंद्र सिंह, जसप्रीत सिंह का कहना है कि जब भी जरूरत पड़ती है, तो अक्सर दुकानदार से बिल मांगते हैं, लेकिन दुकानदार बिल देने से साफ इनकार कर देते हैं। यही कारण है कि अंबाला में इस तरह की मार्केट लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा नुकसान सरकार को है, जबकि इसी कारण से उपभोक्ता का एक नंबर का पैसा दुकानदार के पास दो नंबर की कमाई बन जाता है। यदि संबंधित विभाग इस में सख्ती करे और उपभोक्ता भी बिल की डिमांड सख्ती से करें, तो ही बात बनेगी।
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यह है फिलहाल परेशानी
नोटबंदी के सत्ताइस दिन बीत जाने के बाद अभी तक लोगों को कैश पर ही भरोसा है। इसके लिए लोग लाइनों में लगे हुए हैं, जबकि एटीएम पर भी लाइनें लगी हैं। लोग कैश लेकर ही खरीददारी तो कर रहे हैं, जबकि अधिकतर दुकानों के पास स्वाइप मशीनें नहीं हैं। अब कैश पूरा नहीं मिल रहा है और यही कारण है कि कैश लेकर खरीददारी करना अब मुश्किल हो रहा है। इसी तरह अन्य रूटीन के खर्च भी कैश के जरिये होते थे, लेकिन इनको निपटाने में भी कैश की दिक्कत आड़े आ रही है, जबकि अब लोगों ने इसका विकल्प तलाशना शुरु कर दिया है। धीरे-धीरे अब लोग कैश छोड़कर अन्य तरीकों से खरीददारी में जुट गए हैं।
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- दवा की जरूरत थी, लेकिन कैश में दो हजार रुपये का नोट था। करीब एक सौ साठ रुपये की दवा का बिल बना, लेकिन दो हजार रुपये दिया, तो दुकानदार ने लेने से मना कर दिया। साथ ही दुकानदार ने यह आप्शन भी दिया कि यदि डेबिट कार्ड है, तो स्वाइप करवाएं और एक सौ साठ रुपये डेबिट कार्ड से ही दुकानदार को दिए। काफी आसान लगा है और अब इसे ही ज्यादा इस्तेमाल करेंगे।
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- रजनीश गुप्ता, नौकरीपेशा, अंबाला कैंट
महीने भर का राशन लेने के लिए मॉल में गए थे। हालांकि जितना बिल बना था, उतने रुपये जेब में कैश थे, लेकिन जब देखा कि डेबिट से पेमेंट ली जा रही है, तो पहली बार कार्ड से पेमेंट की। हालांकि यह आप्शन पहली बार अपनाया, लेकिन काफी बेहतर लगा। अब आगे इसी तरह से पेमेंट करेंगे, जबकि कैश रखने का झंझट ही खत्म होगा।
- कमलजीत सिंह, जॉब कंसलटेंट, अंबाला कैंट
बच्चों के लिए गर्म कपड़े खरीदने के लिए मार्केट गई थी, जबकि बिल भी करीब साढ़े तीन हजार रुपये का बना गया था। कैश कम था, लेकिन अच्छा था कि डेबिट कार्ड साथ लेकर गई थी। दुकानदार को डेबिट कार्ड से पेमेंट कर दिया और बिल ले लिया। जरूरत के हिसाब से उसी दुकान की तलाश करेंगे, जहां पर यह कार्ड चले और उनका काम भी चल जाए।
- वंदना शर्मा, गृहणी, अंबाला सिटी
यह कहते हैं दुकानदार
पहले लोग कैश लेकर आते थे और कईं बार तो बकाया देने में ही परेशानी होती थी। अब लोगों के पास सीमित कैश है और सैलरी तक भी पूरी नहीं मिल रही है। ऐसे में शॉपिंग करने आने वाले कार्ड से पेमेंट कर जाते हैं। वे भी अब कार्ड से पेमेंट करने लगे हैं, जो हमेशा कैश देकर जाते थे।
- कविश भसीन, शोरूम संचालक
लोगों के लिए खरीददारी आसान हो गई है, जबकि डेबिट कार्ड मशीन से खरीददारी में दिक्कत नहीं आती। हां, यदि सर्वर डाउन हो, तो दिक्कत है, लेकिन फिर भी काफी राहत है। जब से नोटबंदी शुरु हुई है और ई पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है, लोगों ने कार्ड का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है।
- सुरेंद्र सिंह, रेडिमेड गारमेंट्स दुकानदार
पेंशन व खाताधारक कैश के लिए परेशान
अंबाला कैंट/नारायणगढ़। नोटबंदी के 27 दिन बीत जाने के बाद भी खाताधारक और पेंशनर परेशान हैं। चार दिनों से लगातार बैंकों तक लोग जा रहे हैं, लेकिन फिर भी कैश नहीं मिल पा रहा है। नारायणगढ़ में एसबीआई की शाखा के बाहर लंबी लाइनें लगी रहीं, जबकि कैश के लिए जो परेशान दिखे। सोमवार को कई बुजुर्ग बैंक शाखा के बाहर सरकार की इस व्यवस्था को कोसते रहे। कई पेंशनरों का घर का गुजरा इस पेंशन पर टिका है, वहीं सोमवार को खाताधारकों को कुछ हजार रुपये ही मिले। इसी तरह एटीएम से भी मात्र दो हजार रुपये ही निकले, जबकि लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। अंबाला कैंट के माल रोड स्थित एसबीआई शाखा में कुछ लोगों में बहसबाजी हो गई। कैश निकलवाने के लिए लाइनों में लगे लोगो को अनदेखा कर एक व्यक्ति ने जब बैक में घुसने की कोशिश की, तो लोगों ने आपत्ति उठा दी। इसी पर लाइन में लगे लोगों व व बैंक में घुस रहे लोगों के बीच बहसबाजी हो गई, जिसे अन्य लोगों ने शांत कराया।
बिना बिल का सामान यानी नोटबंदी अभियान में छेद
- बिना बिल सामान लेने से फिर बढ़ेगा कालाधन
अंबाला कैंट। बिना बिल का सामान खरीदने की आदत नोटबंदी के अभियान में एक तरह से छेड का काम कर रही है। अंबाला में ग्राहकों की यह आदत जहां कालाधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं सरकार की मुहिम में भी आड़े आ रही है। इस मामले में बेशक प्रशासन भी लोगों को जागरूक कर रहा है, लेकिन दुकानदार भी मांगने पर लोगों को बिल नहीं दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अंबाला में कईं कारोबारी सीधे दिल्ली व अन्य क्षेत्रों से सामान लाकर अंबाला में अपना कारोबार चला रहे हैं। यहत सारा सामान बिना बिल के अंबाला तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि धड़ल्ले से इसकी बिक्री भी हो रही है। बताया जाता है कि ग्राहकों को भी यह सारा सामान बिना बिल के ही थमाया जाता है। कईं ग्राहक यदि बिल मांगते भी है, तो यह कारोबारी साफ इनकार कर देते हैं। बिल की सारी राशि बिना टैक्स के कारोबारी के जेब में जा रही है, जबकि जिस मकसद को लेकर नोटबंदी ेकी गई थी, उस में उपभोक्ता की नजरंदाजी एक तरह से छेद का काम कर रही है। पिछले करीब दो दशकों में इस तरह की मार्केट पूरी तरह से अपने पांव अंबाला में जमा चुका है। इस तरह की मार्केट सरकार को काफी नुकसान पहुंचा रही है, जबकि इस पर अभी तक शिकंजा कसा नहीं गया है।
कैंट के रहने वाले आशीष गुप्ता, संजय शर्मा, मनोज तिवारी, रामकिशन मल्होत्रा, दीपांशु, सिटी के हरजीत सिंह, शेखर कुमार, राजेश गुप्ता, महेंद्र सिंह, जसप्रीत सिंह का कहना है कि जब भी जरूरत पड़ती है, तो अक्सर दुकानदार से बिल मांगते हैं, लेकिन दुकानदार बिल देने से साफ इनकार कर देते हैं। यही कारण है कि अंबाला में इस तरह की मार्केट लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा नुकसान सरकार को है, जबकि इसी कारण से उपभोक्ता का एक नंबर का पैसा दुकानदार के पास दो नंबर की कमाई बन जाता है। यदि संबंधित विभाग इस में सख्ती करे और उपभोक्ता भी बिल की डिमांड सख्ती से करें, तो ही बात बनेगी।