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Ambala News: बेपटरी जिंदगी, बह गए सपने...
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अंबाला। साहब मेहनत, मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से गुजारा करते हैं, लेकिन बाढ़ ने जो दर्द दिया, उसे भुलाना बहुत मुश्किल है। दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जमीन पर सोते हैं। घर का नया सामान जुटाने की हिम्मत नहीं।
यह पीड़ा टांगरी बांध के किनारे रहने वाले बाढ़ प्रभावित लोगों की है। उन्होंने बताया कि मदद के नाम पर झूठे आश्वासन मिले। एक या दो बार ही खाने के लिए राशन मिला। इसके बाद खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी। लोगों और रिश्तेदारों से उधार मांगकर गुजारा करते हैं। आज भी यही हालात हैं, बेशक बाढ़ का पानी उतर गया हो, लेकिन समस्याएं बरकरार हैं।
यहां के घरों में आज भी तबाही के निशान दीवारों पर नजर आते हैं। सरकारी मदद के नाम पर एक पाई नहीं मिली। जबकि सरकारी पोर्टल पर फोटो सहित नुकसान की पूरी जानकारी दी थी। एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। कुछ बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सरकार से मुआवजा मिले या नहीं। टांगरी पर बांध का निर्माण होना चाहिए, जिससे कि बाढ़ का पानी रिहायशी क्षेत्रों में न घुस पाए।
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डर से सास ने तोड़ा दम : बबली
विश्वकर्मा नगर की रहने वाली बबली बताती हैं कि बाढ़ के पानी ने ऐसी तबाही मचाई कि जो आज भी झकझोर कर रख देती है। बारिश होते ही दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। बाढ़ का कहर इस तरह टूटा की अम्मा (सास) को डर की वजह से दिल का दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई।
शादी में मिला सामान खराब : विशाल
विश्वकर्मा नगर के रहने वाले विशाल का कहना है कि बाढ़ के दौरान कोई मदद नहीं मिली। पानी के कारण शादी में मिला सारा सामान खराब हो गया। इसमें बेड, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और सोफा सहित लाखों रुपये का सामान था, जोकि शायद अब दोबारा न बन पाए।
नहीं आया कोई सुध लेने : सीमा
विश्वकर्मा नगर की सीमा का कहना है कि बाढ़ को खत्म हुए दो माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन आजतक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी हालात का जायजा लेने नहीं आया। घर का सारा सामान गली में ही रखा है जोकि पूरी तरह से सड़-गल चुका है।
मकान मालिक ने मांग लिया किराया : दिलीप
न्यू प्रीत नगर के रहने वाले दिलीप का बनाया कि वे किराये के मकान में रहते हैं। बाढ़ के कारण घर का पूरा सामान खराब हो गया। मेहनत-मजदूरी करके बमुश्किल 200 से 300 रुपये कमा पाता हूं। मकान मालिक ने भी राहत नहीं दी और पिछला किराया भी वसूल लिया।
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यह पीड़ा टांगरी बांध के किनारे रहने वाले बाढ़ प्रभावित लोगों की है। उन्होंने बताया कि मदद के नाम पर झूठे आश्वासन मिले। एक या दो बार ही खाने के लिए राशन मिला। इसके बाद खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी। लोगों और रिश्तेदारों से उधार मांगकर गुजारा करते हैं। आज भी यही हालात हैं, बेशक बाढ़ का पानी उतर गया हो, लेकिन समस्याएं बरकरार हैं।
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यहां के घरों में आज भी तबाही के निशान दीवारों पर नजर आते हैं। सरकारी मदद के नाम पर एक पाई नहीं मिली। जबकि सरकारी पोर्टल पर फोटो सहित नुकसान की पूरी जानकारी दी थी। एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। कुछ बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सरकार से मुआवजा मिले या नहीं। टांगरी पर बांध का निर्माण होना चाहिए, जिससे कि बाढ़ का पानी रिहायशी क्षेत्रों में न घुस पाए।
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डर से सास ने तोड़ा दम : बबली
विश्वकर्मा नगर की रहने वाली बबली बताती हैं कि बाढ़ के पानी ने ऐसी तबाही मचाई कि जो आज भी झकझोर कर रख देती है। बारिश होते ही दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। बाढ़ का कहर इस तरह टूटा की अम्मा (सास) को डर की वजह से दिल का दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई।
शादी में मिला सामान खराब : विशाल
विश्वकर्मा नगर के रहने वाले विशाल का कहना है कि बाढ़ के दौरान कोई मदद नहीं मिली। पानी के कारण शादी में मिला सारा सामान खराब हो गया। इसमें बेड, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और सोफा सहित लाखों रुपये का सामान था, जोकि शायद अब दोबारा न बन पाए।
नहीं आया कोई सुध लेने : सीमा
विश्वकर्मा नगर की सीमा का कहना है कि बाढ़ को खत्म हुए दो माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन आजतक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी हालात का जायजा लेने नहीं आया। घर का सारा सामान गली में ही रखा है जोकि पूरी तरह से सड़-गल चुका है।
मकान मालिक ने मांग लिया किराया : दिलीप
न्यू प्रीत नगर के रहने वाले दिलीप का बनाया कि वे किराये के मकान में रहते हैं। बाढ़ के कारण घर का पूरा सामान खराब हो गया। मेहनत-मजदूरी करके बमुश्किल 200 से 300 रुपये कमा पाता हूं। मकान मालिक ने भी राहत नहीं दी और पिछला किराया भी वसूल लिया।