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Ambala News: हाईकोर्ट में 24 को जमा होंगे जमीन से जुड़े दस्तावेज
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अंबाला छावनी स्थित नगर परिषद का कार्यालय। फाइल फोटो
अंबाला। छावनी सदर क्षेत्र के 6469 अवैध अतिक्रमणकारियों से जुड़े मामले की सुनवाई बुधवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में हुई। इस दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने कोर्ट के समक्ष जवाब दिया कि जो नोटिस नगर परिषद की ओर से लोगों को दिए जा रहे हैं वे गलत हैं, क्योंकि नगर परिषद सदर क्षेत्र की मालिक ही नहीं हैं।
इस मामले पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाए जाएं कि जिस अवैध अतिक्रमण के लिए नगर परिषद की ओर से जो नोटिस दिए हैं वो सही हैं या नहीं। नगर परिषद को अब जमीन से जुड़े इंतकाल और संबंधित दस्तावेज हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। नगर परिषद ने कोर्ट से इसके लिए समय मांगा तो कोर्ट ने नगर परिषद के वकील को 25 दिन का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
नियमितीकरण नीति पर विचार
सरकार अंबाला छावनी सदर क्षेत्र के निवासियों को राहत देने के लिए नियमितीकरण नीति पर विचार कर रही है, हालांकि अभी इस प्रक्रिया को उजागर नहीं किया है। जबकि पंचकूला के निकाय मुख्यालय में इस मुद्दे पर मंत्रणा हो चुकी है। अब सिर्फ अधिसूचना का इंतजार हो रहा है, जिससे कि लोगों को राहत पहुंचाई जा सके। इस दौरान कब्जाधारियों की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जाएगा कि उनके पास कितनी अधिकृत और कितनी अनधिकृत जगह है। यह पैमाइश जगह के क्षेत्रफल के हिसाब से की जाएगी। इस दौरान नगर परिषद अपने दस्तावेजों को भी खंगालेगी ताकि सही व निष्पक्ष तरीके से हाईकोर्ट में अवैध अतिक्रमण की रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
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यह है मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार ने अंबाला छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार व नगर परिषद अंबाला सदर को भूमि स्थानांतरित की थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली भूमि पर भवन बना कर स्थायी कब्जा कर लिया। हाईकोर्ट में यह मामला वर्ष 1999 से लंबित है और लगातार इसकी सुनवाई चल रही है। जबकि प्रतिवादी के वकील का तर्क है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर परिषद की कार्रवाई काफी धीमी गति से चल रही है, इसलिए मामला बार-बार स्थगित हो रहा है।
वर्जन
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जमीन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। इसके लिए 24 फरवरी तक दस्तावेज जमा करने होंगे।
-रविंद्र कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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इस मामले पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाए जाएं कि जिस अवैध अतिक्रमण के लिए नगर परिषद की ओर से जो नोटिस दिए हैं वो सही हैं या नहीं। नगर परिषद को अब जमीन से जुड़े इंतकाल और संबंधित दस्तावेज हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। नगर परिषद ने कोर्ट से इसके लिए समय मांगा तो कोर्ट ने नगर परिषद के वकील को 25 दिन का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
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नियमितीकरण नीति पर विचार
सरकार अंबाला छावनी सदर क्षेत्र के निवासियों को राहत देने के लिए नियमितीकरण नीति पर विचार कर रही है, हालांकि अभी इस प्रक्रिया को उजागर नहीं किया है। जबकि पंचकूला के निकाय मुख्यालय में इस मुद्दे पर मंत्रणा हो चुकी है। अब सिर्फ अधिसूचना का इंतजार हो रहा है, जिससे कि लोगों को राहत पहुंचाई जा सके। इस दौरान कब्जाधारियों की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जाएगा कि उनके पास कितनी अधिकृत और कितनी अनधिकृत जगह है। यह पैमाइश जगह के क्षेत्रफल के हिसाब से की जाएगी। इस दौरान नगर परिषद अपने दस्तावेजों को भी खंगालेगी ताकि सही व निष्पक्ष तरीके से हाईकोर्ट में अवैध अतिक्रमण की रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
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यह है मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार ने अंबाला छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार व नगर परिषद अंबाला सदर को भूमि स्थानांतरित की थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली भूमि पर भवन बना कर स्थायी कब्जा कर लिया। हाईकोर्ट में यह मामला वर्ष 1999 से लंबित है और लगातार इसकी सुनवाई चल रही है। जबकि प्रतिवादी के वकील का तर्क है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर परिषद की कार्रवाई काफी धीमी गति से चल रही है, इसलिए मामला बार-बार स्थगित हो रहा है।
वर्जन
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जमीन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। इसके लिए 24 फरवरी तक दस्तावेज जमा करने होंगे।
-रविंद्र कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद