जमीन देने वाले ग्रामीणों को आईटीआई कोर्स करवाएगा रेलवे
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केंद्र सरकार की कोरपोरेट सामाजिक दायित्व नीति पर मिनीस्ट्री ऑफ रेलवे के अंतर्गत ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया ने अपना एक विशेष अभियान शुरू कर दिया है। जिसके तहत कोरिडोर कोरपोशन अब उन ग्रामीणों के परिजनों को आईटीआई में विशेष ट्रेनिंग दिलवाएगा, जिन ग्रामीणों की जमीन कोरपोरेशन ने फ्रेट कोरिडोर के लिए के एक्वायर की है।
ये कोरपोरेशन की अनोखी पहल है, जिसके पहली बार शुरू किया जा रहा है। इन अभियान की शुरूआत अंबाला मंडल के अंतर्गत लुधियाना से सहारनपुर सेक्शन में की जाएगी। इसके लिए कोरपोरेशन ने अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी है और जल्द ही इस सामाजिक अभियान को कोरपोरेशन द्वारा अमलीजामा पहना दिया जाएगा।
इस विशेष अभियान में लुधियाना से सहारनपुर तक करीबन 65 गांवों के 4 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा। पहले चरण में करीबन 125 परिवारों को आईटीआई में निशुल्क प्रशिक्षण दिलवाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए कोरपोरेशन ने अभी फिलहाल अंबाला-सहारनपुर सेक्शन के बीच पड़ने वाले तीन अंबाला कैंट, बराड़ा व सरसावा आईटीआई केंद्रों से अनुबंध कर लिया है। ये केंद्र अपने यहां विद्यार्थियों को ट्रेनिंग देगा और प्रति छात्र पर आने वाला खर्च करीबन 10 से 12 हजार रुपये डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर कारपोरेशन द्वारा वहन किया जाएगा।
इन छात्रों को आईटीआई केंद्रों में बेसिक इलेक्ट्रिकल एंड हाउस वायरिंग, एयर कंडीनेशन एंड रेफ्रीजरेशन, आटोमोटिव सर्विसिंग टू एंड फोर व्हीलर इत्यादि कोर्सों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन कोर्सों की अवधि तीन माह की होगी, जिसके बाद उन्हे संबंधित सरकारी आईटीआई केंद्रों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
ये है विशेष अभियान का मकसद सहायक परियोजना अधिकारी राजेश नवहाल ने बताया कि ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया के इस विशेष अभियान का मकसद उन ग्रामीणों के परिजनों को स्वरोजगार स्वावलंबी बनाना है, जिनकी जमीन रेलवे ने फ्रेट कोरिडोर के लिए एक्वायर की है। इस परियोजना में संबंधित ग्रामीणों के परिवार में से कोई भी योग्य व्यक्ति की इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर सकता है। इस कोर्स को करने के बाद संबंधित व्यक्ति अपना खुद को व्यवसाय स्थापित कर सकता है या कई और नौकरी भी कर सकता है। पहले चरण में अंबाला-सहारनपुर सेक्शन में और दूसरे चरण में अंबाला-लुधियाना सेक्शन में इस ट्रेनिंग करवाने का प्रावधान किया जाएगा। इसके लिए संबंधित गांव में जाकर इस विशेष अभियान के बारें में डोर-टू-डोर संपर्क कर ग्रामीणों से कोर्स के लिए आवेदन भरवाए जा रहे हैं।