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Ambala News: उपकरणों का अभाव, मरहम पट्टी तक सिमटे सीएचसी
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अंबाला सिटी। कर्मचारियों और दवाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के पास उपकरणों और उन्हें चलाने के लिए तकनीकी कर्मचारी भी नहीं हैं। सिटी और छावनी नागरिक और नारायणगढ़ के अस्पताल को छोड़कर किसी भी सीएचसी पर सामान्य टेस्ट कराने और एक्सरे कराने की सुविधा भी नहीं मिलती।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को या तो पैसे खर्च कर निजी केंद्रों में ही अपनी जांच करवानी पड़ रही है। इधर सिटी के नागरिक अस्पताल में ईको की मशीन भी नहीं है इसके कारण अल्ट्रासाउंड की एकमात्र मशीन से ही लोगों का ईको टेस्ट किया जाता है। ऐसे में समय भी अधिक लगता है और 15 से 20 दिनों तक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जिले में पांच सीएचसी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें आने वाले घायलों को प्राथमिक उपचार के नाम पर सिर्फ मरहम पट्टी ही मिल पाती है। इसके बाद एक्स रे या फिर अन्य टेस्ट कराने के लिए तो सीएचसी केंद्रों से घायलों को नजदीकी नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जबकि यहां पर कम से कम एक्स रे सुविधा होने का प्रावधान होता है। विभाग के तीन सीएचसी केंद्रों में एक्स रे मशीन नहीं है तो वहीं जहां पर मशीनें हैं। वहां पर उन्हें चलाने के लिए रेडियोग्राफर नहीं है। इतना ही नहीं नागरिक अस्पतालों में भी चिकित्सकों को डेप्यूटेशन पर लगाकर अल्ट्रासाउंड की सेवाएं चलाई जा रही हैं।
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इन केंद्रों में उपकरणों का टोटा
सिटी नागरिक अस्पताल, अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल और नारायणगढ़ अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। सीटी स्कैन की सुविधा फिलहाल सिर्फ नागरिक अस्पतालों तक ही मिल रही है। यहां पर भी यह सुविधा पीपीपी मोड पर चलाई जाती है। बीपीएल परिवाराें के लिए निशुल्क सुविधा है जबकि अन्य मरीजों को 700 रुपये से 1400 रुपये तक देने पड़ते हैं। इसके अलावा सीएचसी मुलाना और शहजादपुर में ही एक्स रे की सुविधा है। अन्य केंद्रों में एक्स रे मशीन भी नहीं है। हाल ही में बराड़ा को पोर्टेबल एक्स रे मशीन टीबी विभाग की तरफ से भेजी गई थी, लेकिन सही तरीके से काम न करने के कारण बराड़ा सीएचसी ने मशीन को वापिस भेज दिया।
राेजाना दो हजार मरीजों की होती है जांच
सिटी और छावनी नागरिक अस्पताल में रोजाना चार हजार मरीज आते हैं। इनमें से दो हजार लोगों के रोजाना सैंपल लिए जाते हैं और इन्हीं में 250 लोगों के अल्ट्रासाउंड, 400 एक्स रे और 100 के करीब ईको जांच होती है।ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का टोटा होने के कारण वहां के मरीजों का बोझ भी छावनी और सिटी नागरिक अस्पताल पर आ जाता है। इतना ही नहीं सिटी नागरिक अस्पताल में 20 प्रतिशत मरीज पंजाब के गांवों से ही आते हैं। वहीं खून की जांच के लिए भी रोजाना करीब एक हजार लोग आते हैं। इसके कारण रिपोर्ट मिलने में भी विलंब होता है।
वर्जन
विभाग की ओर से तीनों सीएचसी के लिए डिमांड भेजी गई है। एचसीएमएल को निदेशालय से निर्देश हो चुके हैं। वहीं, रेडियोग्राफर के लिए भी पत्राचार चलता रहता है। नागरिक अस्पताल में भी पोलीक्लीनिक से नई एक्स रे मशीन लाई जाएगी। जिससे मरीजों को सुविधा मिलेगी। विभाग का प्रयास रहता है कि व्यवस्था किसी भी तरह से ना बिगड़े।
-संजय लाडवाल, बीएमई स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को या तो पैसे खर्च कर निजी केंद्रों में ही अपनी जांच करवानी पड़ रही है। इधर सिटी के नागरिक अस्पताल में ईको की मशीन भी नहीं है इसके कारण अल्ट्रासाउंड की एकमात्र मशीन से ही लोगों का ईको टेस्ट किया जाता है। ऐसे में समय भी अधिक लगता है और 15 से 20 दिनों तक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
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जिले में पांच सीएचसी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें आने वाले घायलों को प्राथमिक उपचार के नाम पर सिर्फ मरहम पट्टी ही मिल पाती है। इसके बाद एक्स रे या फिर अन्य टेस्ट कराने के लिए तो सीएचसी केंद्रों से घायलों को नजदीकी नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जबकि यहां पर कम से कम एक्स रे सुविधा होने का प्रावधान होता है। विभाग के तीन सीएचसी केंद्रों में एक्स रे मशीन नहीं है तो वहीं जहां पर मशीनें हैं। वहां पर उन्हें चलाने के लिए रेडियोग्राफर नहीं है। इतना ही नहीं नागरिक अस्पतालों में भी चिकित्सकों को डेप्यूटेशन पर लगाकर अल्ट्रासाउंड की सेवाएं चलाई जा रही हैं।
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इन केंद्रों में उपकरणों का टोटा
सिटी नागरिक अस्पताल, अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल और नारायणगढ़ अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। सीटी स्कैन की सुविधा फिलहाल सिर्फ नागरिक अस्पतालों तक ही मिल रही है। यहां पर भी यह सुविधा पीपीपी मोड पर चलाई जाती है। बीपीएल परिवाराें के लिए निशुल्क सुविधा है जबकि अन्य मरीजों को 700 रुपये से 1400 रुपये तक देने पड़ते हैं। इसके अलावा सीएचसी मुलाना और शहजादपुर में ही एक्स रे की सुविधा है। अन्य केंद्रों में एक्स रे मशीन भी नहीं है। हाल ही में बराड़ा को पोर्टेबल एक्स रे मशीन टीबी विभाग की तरफ से भेजी गई थी, लेकिन सही तरीके से काम न करने के कारण बराड़ा सीएचसी ने मशीन को वापिस भेज दिया।
राेजाना दो हजार मरीजों की होती है जांच
सिटी और छावनी नागरिक अस्पताल में रोजाना चार हजार मरीज आते हैं। इनमें से दो हजार लोगों के रोजाना सैंपल लिए जाते हैं और इन्हीं में 250 लोगों के अल्ट्रासाउंड, 400 एक्स रे और 100 के करीब ईको जांच होती है।ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का टोटा होने के कारण वहां के मरीजों का बोझ भी छावनी और सिटी नागरिक अस्पताल पर आ जाता है। इतना ही नहीं सिटी नागरिक अस्पताल में 20 प्रतिशत मरीज पंजाब के गांवों से ही आते हैं। वहीं खून की जांच के लिए भी रोजाना करीब एक हजार लोग आते हैं। इसके कारण रिपोर्ट मिलने में भी विलंब होता है।
वर्जन
विभाग की ओर से तीनों सीएचसी के लिए डिमांड भेजी गई है। एचसीएमएल को निदेशालय से निर्देश हो चुके हैं। वहीं, रेडियोग्राफर के लिए भी पत्राचार चलता रहता है। नागरिक अस्पताल में भी पोलीक्लीनिक से नई एक्स रे मशीन लाई जाएगी। जिससे मरीजों को सुविधा मिलेगी। विभाग का प्रयास रहता है कि व्यवस्था किसी भी तरह से ना बिगड़े।
-संजय लाडवाल, बीएमई स्वास्थ्य विभाग अंबाला।