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आठ घंटे के बाद पता चला- दो बाजारों में दुकानों की बोली नहीं होगी
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अंबाला। नगर परिषद द्वारा न्यू फिश मार्केट सहित बीसी बाजार की दुकानों की बोली टालने पर लोग मायूस होकर वापस हो गए। सुबह 9 बजे से आए लोग शाम साढ़े पांच बजे लौट गए। लोगों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली को जमकर कोसा।
लोगों का कहना था कि परिषद द्वारा पहले ही 63 दुकानों की बोली को दो चरणों में बांटना चाहिए था। इतने कम समय में इतनी दुकानों की बोली होना मुश्किल लग रहा था। सभी दुकानों से सिक्योरिटी के तौर पर पहले ही रुपये जमा करवा लिए गए थे। ऊपर से सुबह से शाम तक इंतजार करवाने के बाद उनका गुस्सा और बढ़ गया। ऐसे में उनका काम-धंधा भी प्रभावित हुआ।
सुबह 9 बजे ही नगर परिषद कार्यालय में पहुंच गए थे। 11 बजे बोली का समय दिया गया था, लेकिन साढ़े तीन घंटे इंतजार के बाद बोली शुरू हुई और उसमें भी फिश मार्केट का जिक्र नहीं हुआ। यह नगर परिषद की अव्यवस्थाओं का ही नतीजा है।
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अनिल कुमार, दुकानदार
सारा कामकाज छोड़कर बोली प्रक्रिया में हिस्सा लेने आया था। पहले ही नगर परिषद के अधिकारियों को दो चरणों में बोली बांट देनी चाहिए थी, तो यह परेशानी न उठानी पड़ती।
भोला, दुकानदार
8 घंटे इंतजार करने के बाद जाकर पता चला कि फिश मार्केट व बीसी बाजार की दुकानों की बोली ही नहीं होगी। आखिरी समय में जाकर बोली न होने की जानकारी दी गई। पहले ही बता देते तो अपना कामकाज कर लेते।
सिमरनप्रीत, अंबाला शहर
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लोगों का कहना था कि परिषद द्वारा पहले ही 63 दुकानों की बोली को दो चरणों में बांटना चाहिए था। इतने कम समय में इतनी दुकानों की बोली होना मुश्किल लग रहा था। सभी दुकानों से सिक्योरिटी के तौर पर पहले ही रुपये जमा करवा लिए गए थे। ऊपर से सुबह से शाम तक इंतजार करवाने के बाद उनका गुस्सा और बढ़ गया। ऐसे में उनका काम-धंधा भी प्रभावित हुआ।
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सुबह 9 बजे ही नगर परिषद कार्यालय में पहुंच गए थे। 11 बजे बोली का समय दिया गया था, लेकिन साढ़े तीन घंटे इंतजार के बाद बोली शुरू हुई और उसमें भी फिश मार्केट का जिक्र नहीं हुआ। यह नगर परिषद की अव्यवस्थाओं का ही नतीजा है।
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अनिल कुमार, दुकानदार
सारा कामकाज छोड़कर बोली प्रक्रिया में हिस्सा लेने आया था। पहले ही नगर परिषद के अधिकारियों को दो चरणों में बोली बांट देनी चाहिए थी, तो यह परेशानी न उठानी पड़ती।
भोला, दुकानदार
8 घंटे इंतजार करने के बाद जाकर पता चला कि फिश मार्केट व बीसी बाजार की दुकानों की बोली ही नहीं होगी। आखिरी समय में जाकर बोली न होने की जानकारी दी गई। पहले ही बता देते तो अपना कामकाज कर लेते।
सिमरनप्रीत, अंबाला शहर