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निर्देश : चार सप्ताह में सरकार फाइनल करें कब्जाधारियों के लिए योजना
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अंबाला छावनी के सदर क्षेत्र में बनी इमारतें। फाइल फोटो
अंबाला। छावनी के 6459 कब्जाधारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। सोमवार को हाईकोर्ट में सरकार ने पक्ष रखा और योजना को धरातल पर उतारने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा लेकिन कोर्ट ने इस योजना को फाइनल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। आगामी 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान इसकी जानकारी कोर्ट में भी जमा करवानी होगी।
ऐसे में अब कब्जाधारियों को कुछ राहत मिल सकती है। वहीं सरकार योजना को फाइनल करने से पहले धरातल पर उतरकर अतिक्रमण की रूपरेखा तैयार करेगी। यह आंकलन अधिक संपत्ति वाले धारकों का किया जाएगा। जिनके नक्शे में अधिक जगह दर्शाई गई है। ऐसे में छोटे और बड़े कब्जाधारियों के लिए अलग-अलग योजना को फाइनल किया जा सकता है, जिससे कि लोगों पर अतिरिक्त खर्च का भार न पड़े। हालांकि योजना में अतिक्रमण की गई जगह को लीज पर दिया जाएगा या फिर इसकी संबंधित के पक्ष में रजिस्ट्री करवाई जाएगी, यह प्रक्रिया भी आगामी योजना में ही फाइनल करनी पड़ेगी।
मंथन में जुटी सरकार
हाईकोर्ट में 28 अप्रैल को सुनवाई से पहले ही सरकार ने 6,469 कब्जाधारियों को राहत देने के लिए खाका तैयार कर लिया था। इसके तहत तीन प्रकार की योजनाएं बनाई हैं। पहले लीज के आधार पर जगह उपलब्ध कराना तो दूसरा ओल्ड ग्रांट नियम के आधार पर और तीसरा अतिक्रमण के तहत जगह का निर्धारण करके इसे संबंधित व्यक्ति के सुपुर्द करना। इन तीनों योजनाओं के तहत भूमि पर रहने वाले व्यक्ति को कलेक्टर रेट के हिसाब से सरकार को पैसे जमा कराने होंगे। लीज योजना के तहत मौजूदा कलेक्टर रेट के तहत अवैध निर्माण करने वाले से पैसे लिए जाएंगे। ओल्ड ग्रांट योजना के तहत आधी दर पर कलेक्टर रेट का निर्धारण और तीसरी योजना के तहत अवैध अतिक्रमण के हिस्से को वैध में बदलने के लिए दो गुना कलेक्टर रेट के हिसाब से पैसा लिया जाएगा।
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अवैध कब्जे की ये है सूची
ओल्ड ग्रांट पर दी भूमि के 48.19 एकड़ पर 5094 लोगों ने अवैध कब्जा किया है। इसी प्रकार लीज पर दी भूमि के साथ खाली पड़ी 1.30 एकड़ पर 102 लोगों की ओर से अवैध कब्जा किया है। वहीं, विभिन्न स्थानों पर लगभग 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर 1194 लोगों की ओर से कब्जा किया है। जबकि वर्ष 2003 में नियमित की 13 कॉलोनियां में खाली 7.18 एकड़ भूमि पर 124 लोगों ने कब्जा किया है। इसमें सरकार की ओर से समय-2 पर गैर कृषि कार्यों के लिए 97.41 एकड़ भूमि लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि और 224 प्रॉपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि जोकि 45 लोगों को कृषि के काम के लिए लीज पर दी थी, उसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
यह है पूरा मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटा कर हरियाणा सरकार और नगर परिषद सदर को भूमि स्थानांतरित की गई थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। इस पर समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली पड़ी भूमि पर भवन बना कर स्थाई कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी के कार्यालय से ज्ञात हुआ है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय की ओर से उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए थे।
वर्जन
मामले की सुनवाई 28 अप्रैल को हुई थी। इसमें तीन तरह की योजनाओं की जानकारी रखी गई। सरकार ने इसके लिए छह सप्ताह का समय मांगा था। लेकिन हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में इस प्रक्रिया को फाइनल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की गई है।
राजेश कुमार, सचिव नगर परिषद सदर अंबाला।
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ऐसे में अब कब्जाधारियों को कुछ राहत मिल सकती है। वहीं सरकार योजना को फाइनल करने से पहले धरातल पर उतरकर अतिक्रमण की रूपरेखा तैयार करेगी। यह आंकलन अधिक संपत्ति वाले धारकों का किया जाएगा। जिनके नक्शे में अधिक जगह दर्शाई गई है। ऐसे में छोटे और बड़े कब्जाधारियों के लिए अलग-अलग योजना को फाइनल किया जा सकता है, जिससे कि लोगों पर अतिरिक्त खर्च का भार न पड़े। हालांकि योजना में अतिक्रमण की गई जगह को लीज पर दिया जाएगा या फिर इसकी संबंधित के पक्ष में रजिस्ट्री करवाई जाएगी, यह प्रक्रिया भी आगामी योजना में ही फाइनल करनी पड़ेगी।
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मंथन में जुटी सरकार
हाईकोर्ट में 28 अप्रैल को सुनवाई से पहले ही सरकार ने 6,469 कब्जाधारियों को राहत देने के लिए खाका तैयार कर लिया था। इसके तहत तीन प्रकार की योजनाएं बनाई हैं। पहले लीज के आधार पर जगह उपलब्ध कराना तो दूसरा ओल्ड ग्रांट नियम के आधार पर और तीसरा अतिक्रमण के तहत जगह का निर्धारण करके इसे संबंधित व्यक्ति के सुपुर्द करना। इन तीनों योजनाओं के तहत भूमि पर रहने वाले व्यक्ति को कलेक्टर रेट के हिसाब से सरकार को पैसे जमा कराने होंगे। लीज योजना के तहत मौजूदा कलेक्टर रेट के तहत अवैध निर्माण करने वाले से पैसे लिए जाएंगे। ओल्ड ग्रांट योजना के तहत आधी दर पर कलेक्टर रेट का निर्धारण और तीसरी योजना के तहत अवैध अतिक्रमण के हिस्से को वैध में बदलने के लिए दो गुना कलेक्टर रेट के हिसाब से पैसा लिया जाएगा।
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अवैध कब्जे की ये है सूची
ओल्ड ग्रांट पर दी भूमि के 48.19 एकड़ पर 5094 लोगों ने अवैध कब्जा किया है। इसी प्रकार लीज पर दी भूमि के साथ खाली पड़ी 1.30 एकड़ पर 102 लोगों की ओर से अवैध कब्जा किया है। वहीं, विभिन्न स्थानों पर लगभग 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर 1194 लोगों की ओर से कब्जा किया है। जबकि वर्ष 2003 में नियमित की 13 कॉलोनियां में खाली 7.18 एकड़ भूमि पर 124 लोगों ने कब्जा किया है। इसमें सरकार की ओर से समय-2 पर गैर कृषि कार्यों के लिए 97.41 एकड़ भूमि लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि और 224 प्रॉपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि जोकि 45 लोगों को कृषि के काम के लिए लीज पर दी थी, उसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
यह है पूरा मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटा कर हरियाणा सरकार और नगर परिषद सदर को भूमि स्थानांतरित की गई थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। इस पर समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली पड़ी भूमि पर भवन बना कर स्थाई कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी के कार्यालय से ज्ञात हुआ है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय की ओर से उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए थे।
वर्जन
मामले की सुनवाई 28 अप्रैल को हुई थी। इसमें तीन तरह की योजनाओं की जानकारी रखी गई। सरकार ने इसके लिए छह सप्ताह का समय मांगा था। लेकिन हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में इस प्रक्रिया को फाइनल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की गई है।
राजेश कुमार, सचिव नगर परिषद सदर अंबाला।