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शहीदों को सम्मान हमारा परम दायित्व: अनिल विज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 01:59 AM IST
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Honoring the martyrs is our utmost responsibility: Anil Vij
बब्याल में स्मृतिद्वार के उद्घाटन पर शहीद की पत्नी को नमन करते गृह मंत्री अनिल विज। - फोटो : Ambala
अंबाला। बब्याल में शौर्य चक्र विजेता शहीद लक्ष्मण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी याद में बनाए गए अमर शहीद लक्ष्मण सिंह स्मृति द्वार का गृहमंत्री अनिल विज ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि शहीदों को सम्मान देना हमारा परम कर्तव्य है और उन्हीं की बदौलत देश महफूज है।
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कार्यक्रम शौर्य चक्र विजेता शहीद की धर्मपत्नी मीणा कुमारी उनके सुपुत्र अजीत राणा व रजत राणा समेत बड़ी संख्या में बब्याल के लोग और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। नगर परिषद अंबाला सदर के माध्यम से इस स्मृति द्वार का निर्माण कार्य 4.31 लाख रुपये की लागत से पूरा किया गया। बब्याल राजकीय स्कूल के पास स्मृति द्वार बनने से अब क्षेत्र के लोग शहीद लक्ष्मण सिंह के बारे में जान सकेंगे। शहीद लक्ष्मण सिंह कैसे शहीद हुए इसका पूरी जानकारी भी स्मृति द्वार पर दर्ज की गई है। ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी बहादुरी की दास्तां को जान सकेंगी। कार्यक्रम में भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष किरणपाल चौहान, मदन लाल शर्मा, नरेंद्र राणा, अनिल मेहता आदि मौजूद रहे।
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शहीद की पत्नी के आंखों से छलके पड़े आंसू
गृह मंत्री अनिल विज ने उद्घाटन के बाद जब शहीद की पत्नी मीणा कुमारी को हाथ जोड़कर नमन किया तो शहीद की पत्नी की आंखों से आंसू छलक गए। मीणा कुमारी ने गृह मंत्री अनिल विज का आभार व्यक्त किया और नम आंखों से धन्यवाद जताया। बता दें कि बीते वर्ष 18 फरवरी को अमर शहीद लक्ष्मण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर इस स्मृतिद्वार के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया था।
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हिमस्खलन की चपेट में आकर बर्फ में दब गए थे लक्ष्मण
लक्ष्मण सिंह रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन की जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स में बतौर ओईएम पद पर तैनात थे। उनकी तैनाती वर्ष 2005 में विषम परिस्थितियों वाले खरदूंगला दर्रे पर थी, 18 फरवरी 2005 में हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे और बर्फ में दब गए थे। इस घटना के बाद चार जुलाई 2005 को उनका शव सेना ढूंढ सकी थी। वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद ने शहीद लक्ष्मण सिंह को मरणोपरांत उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया और यह सम्मान उनकी पत्नी मीणा कुमारी को सौंपा गया था। मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित होने के कई वर्षों बाद शहीद को अपने ही शहर में पहचान नहीं मिल सकी थी। अब गृह मंत्री अनिल विज के प्रयासों से शहीद की याद में स्मृतिद्वार का निर्माण कर उन्हें पहचान दिलाने का कार्य किया जा सका है।
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