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सेहत और पीएचडी विभाग आमने-सामने
अंबाला
Updated Fri, 11 Oct 2013 11:26 PM IST
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अंबाला में ट्यूबवेलों से क्लोरीन गायब होने के मामले में जनस्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर ही चेकिंग करता है, जबकि चेकिंग के दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाता। क्लोरीन को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग सतर्क है।
गौरतलब है कि 30 सितंबर और 8 अक्तूबर को जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से वाटर सैंपलिंग के दौरान की गई चेकिंग में पाया गया था कि 56 में से 44 सैंपल ऐसे थे, जिनमें क्लोरीन की मात्रा नहीं थी। इसी को लेकर कैंट सिविल अस्पताल से जनस्वास्थ्य विभाग को लेटर भी भेजा गया, जिसमें इस स्थिति के बारे में भी बताया गया।
उधर, जनस्वास्थ्य विभाग ने इस सैंपलिंग और चेकिंग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग का कहना है कि क्लोरीन की मात्रा पूरी रखी जाती है, जबकि ऐसा नहीं हो सकता कि ट्यूबवेल के पानी में क्लोरीन की मात्रा न हो।
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विभाग ने साफ कहा कि आपरेटरों को साफ निर्देश हैं कि वे क्लोरीन की मात्रा का पूरा ध्यान रखें। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करता, जबकि उनके विभाग के अधिकारी को शामिल नहीं किया जा सकता।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर ही चेकिंग करता है, जबकि चेकिंग के दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाता। क्लोरीन को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग सतर्क है।
गौरतलब है कि 30 सितंबर और 8 अक्तूबर को जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से वाटर सैंपलिंग के दौरान की गई चेकिंग में पाया गया था कि 56 में से 44 सैंपल ऐसे थे, जिनमें क्लोरीन की मात्रा नहीं थी। इसी को लेकर कैंट सिविल अस्पताल से जनस्वास्थ्य विभाग को लेटर भी भेजा गया, जिसमें इस स्थिति के बारे में भी बताया गया।
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उधर, जनस्वास्थ्य विभाग ने इस सैंपलिंग और चेकिंग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग का कहना है कि क्लोरीन की मात्रा पूरी रखी जाती है, जबकि ऐसा नहीं हो सकता कि ट्यूबवेल के पानी में क्लोरीन की मात्रा न हो।
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विभाग ने साफ कहा कि आपरेटरों को साफ निर्देश हैं कि वे क्लोरीन की मात्रा का पूरा ध्यान रखें। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करता, जबकि उनके विभाग के अधिकारी को शामिल नहीं किया जा सकता।