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Ambala News: बिना काम ही लौटने पड़ा पटवारखानों से
Sat, 22 Aug 2026 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 22 Aug 2026 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसीअंबाला। पटवारी और कानूनगो की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। जिले के सभी पटवारखानों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। अंबाला छावनी, अंबाला सिटी, बराड़ा, नारायणगढ़, शहजादपुर और साहा की तहसीलों व उप-तहसीलों के पटवारखानों पर दिनभर ताले लटके रहे। इससे दूर-दराज के गांवों और कस्बों से अपने जरूरी काम कराने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोग बैंक लोन, कोर्ट केस से जुड़े दस्तावेज, इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन और अन्य राजस्व कार्यों के लिए पटवारखानों में पहुंचे, लेकिन पटवारियों के हड़ताल पर होने के कारण उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। जिले में हड़ताल के चलते करीब 11 हजार इंतकाल, 800 विरासत इंतकाल, 250 मूल निवासी प्रमाण पत्र, 250 पुरानी जमाबंदी व पुरानी नकल गिरदावरी, 21 कोर्ट केस, 170 जाति प्रमाण पत्र सत्यापन और 135 लोन संबंधी काम प्रभावित रहे।
वहीं, राज्यव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को अंबाला सिटी स्थित पटवारखाना परिसर में जिले के करीब 90 पटवारी और कानूनगो एकत्र हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। धरने में अंबाला छावनी, अंबाला सिटी, बराड़ा, नारायणगढ़, शहजादपुर और साहा तहसील व उप-तहसील के पटवारी और कानूनगो शामिल हुए।
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एसोसिएशन के राज्य प्रधान जयबीर चहल ने कहा कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में एसोसिएशन ने 24 और 25 अगस्त को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर दो दिवसीय सांकेतिक धरना देने का एलान किया है।
चार महीने से ऑनलाइन इंतकाल का इंतजार
अंबाला सिटी निवासी विजय गौड़ ने बताया कि उनकी जमीन में गलत इंतकाल चढ़ गया था, जिसे ठीक कर दिया गया है, लेकिन अब तक ऑनलाइन नहीं हुआ। वह पिछले चार महीने से चक्कर लगा रहे हैं।
तीन महीने से विरासत इंतकाल के लिए परेशान
इंडस्ट्री एरिया निवासी दीपक ने बताया कि उन्हें अपनी जमीन का विरासत इंतकाल करवाना है। तीन महीने से चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार को भी काम कराने पहुंचे, लेकिन पटवारी हड़ताल पर होने के कारण वापस लौटना पड़ा।
15 दिन बाद बुलाया पहुंचे तो हड़ताल पर मिले
डिफेंस कॉलोनी निवासी बुजुर्ग गुरमीत कौर ने बताया कि वह 15 दिन पहले इंतकाल लेने आई थीं। पटवारी ने उन्हें शुक्रवार को आने का समय दिया था, लेकिन शुक्रवार को पहुंचने पर पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं।
जाति सत्यापन के लिए पहुंची महिला भी लौटी
तसिम्बली निवासी सोनिया ने बताया कि उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाना था। इसके लिए जाति सत्यापन कराने पटवारखाने पहुंचीं, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं। पता नहीं कब काम हो सकेगा।
प्रॉपर्टी पर लोन चढ़वाने पहुंचे, मिला ताला
चंद्रपुरी निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्हें अपनी प्रॉपर्टी पर लोन चढ़वाना था। इसके लिए
तहसील में फोटो भी करवा ली थी। अब पटवारी के हस्ताक्षर करवाने पहुंचे तो पटवारखाने पर ताला लटका मिला।
पटवारियों और कानूनगो की सात प्रमुख मांगें
n
जमाबंदी और इंतकाल के नए पोर्टल में आ रही तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए और पोर्टल की गलतियों की जवाबदेही आईटी विभाग की तय की जाए।
n
नए पोर्टल को कानूनी मान्यता देने के लिए संशोधित लैंड रिकॉर्ड मैनुअल जारी किया जाए। पूर्ण सुधार होने तक इसे किसी एक गांव या तहसील में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाए।
n
सर्वे का काम निजी एजेंसियों से कराया जाए या इसकी रेंज 80 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर की जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में फेस ऑथेंटिकेशन से छूट दी जाए।
n रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश के लिए कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और कानूनगो को तकनीकी रूप से सक्षम ऑपरेटर उपलब्ध कराया जाए।
n
वर्षों से लंबित एलटीसी और गिरदावरी सहायक मानदेय का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
n
कानूनगो की पिछले तीन साल से लंबित इंक्रीमेंट फाइल को तुरंत मंजूरी दी जाए।
n
ऑनलाइन कामकाज के लिए तहसीलों में कंप्यूटर, प्रिंटर और स्कैनर उपलब्ध करवाए जाएं तथा फील्ड वर्क के लिए पटवारियों को टैबलेट दिए जाएं।
शुक्रवार को भी पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर रहे, जिसके कारण इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति सत्यापन, मूल निवास प्रमाण पत्र, लोन केस सहित अन्य काम बंद रहे। -आशीष, नायब तहसीलदार, अंबाला छावनी
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लोग बैंक लोन, कोर्ट केस से जुड़े दस्तावेज, इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन और अन्य राजस्व कार्यों के लिए पटवारखानों में पहुंचे, लेकिन पटवारियों के हड़ताल पर होने के कारण उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। जिले में हड़ताल के चलते करीब 11 हजार इंतकाल, 800 विरासत इंतकाल, 250 मूल निवासी प्रमाण पत्र, 250 पुरानी जमाबंदी व पुरानी नकल गिरदावरी, 21 कोर्ट केस, 170 जाति प्रमाण पत्र सत्यापन और 135 लोन संबंधी काम प्रभावित रहे।
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वहीं, राज्यव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को अंबाला सिटी स्थित पटवारखाना परिसर में जिले के करीब 90 पटवारी और कानूनगो एकत्र हुए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। धरने में अंबाला छावनी, अंबाला सिटी, बराड़ा, नारायणगढ़, शहजादपुर और साहा तहसील व उप-तहसील के पटवारी और कानूनगो शामिल हुए।
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एसोसिएशन के राज्य प्रधान जयबीर चहल ने कहा कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में एसोसिएशन ने 24 और 25 अगस्त को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर दो दिवसीय सांकेतिक धरना देने का एलान किया है।
चार महीने से ऑनलाइन इंतकाल का इंतजार
अंबाला सिटी निवासी विजय गौड़ ने बताया कि उनकी जमीन में गलत इंतकाल चढ़ गया था, जिसे ठीक कर दिया गया है, लेकिन अब तक ऑनलाइन नहीं हुआ। वह पिछले चार महीने से चक्कर लगा रहे हैं।
तीन महीने से विरासत इंतकाल के लिए परेशान
इंडस्ट्री एरिया निवासी दीपक ने बताया कि उन्हें अपनी जमीन का विरासत इंतकाल करवाना है। तीन महीने से चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार को भी काम कराने पहुंचे, लेकिन पटवारी हड़ताल पर होने के कारण वापस लौटना पड़ा।
15 दिन बाद बुलाया पहुंचे तो हड़ताल पर मिले
डिफेंस कॉलोनी निवासी बुजुर्ग गुरमीत कौर ने बताया कि वह 15 दिन पहले इंतकाल लेने आई थीं। पटवारी ने उन्हें शुक्रवार को आने का समय दिया था, लेकिन शुक्रवार को पहुंचने पर पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं।
जाति सत्यापन के लिए पहुंची महिला भी लौटी
तसिम्बली निवासी सोनिया ने बताया कि उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाना था। इसके लिए जाति सत्यापन कराने पटवारखाने पहुंचीं, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि पटवारी हड़ताल पर हैं। पता नहीं कब काम हो सकेगा।
प्रॉपर्टी पर लोन चढ़वाने पहुंचे, मिला ताला
चंद्रपुरी निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्हें अपनी प्रॉपर्टी पर लोन चढ़वाना था। इसके लिए
तहसील में फोटो भी करवा ली थी। अब पटवारी के हस्ताक्षर करवाने पहुंचे तो पटवारखाने पर ताला लटका मिला।
पटवारियों और कानूनगो की सात प्रमुख मांगें
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जमाबंदी और इंतकाल के नए पोर्टल में आ रही तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए और पोर्टल की गलतियों की जवाबदेही आईटी विभाग की तय की जाए।
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नए पोर्टल को कानूनी मान्यता देने के लिए संशोधित लैंड रिकॉर्ड मैनुअल जारी किया जाए। पूर्ण सुधार होने तक इसे किसी एक गांव या तहसील में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाए।
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सर्वे का काम निजी एजेंसियों से कराया जाए या इसकी रेंज 80 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर की जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में फेस ऑथेंटिकेशन से छूट दी जाए।
n रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश के लिए कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और कानूनगो को तकनीकी रूप से सक्षम ऑपरेटर उपलब्ध कराया जाए।
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वर्षों से लंबित एलटीसी और गिरदावरी सहायक मानदेय का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
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कानूनगो की पिछले तीन साल से लंबित इंक्रीमेंट फाइल को तुरंत मंजूरी दी जाए।
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ऑनलाइन कामकाज के लिए तहसीलों में कंप्यूटर, प्रिंटर और स्कैनर उपलब्ध करवाए जाएं तथा फील्ड वर्क के लिए पटवारियों को टैबलेट दिए जाएं।
शुक्रवार को भी पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर रहे, जिसके कारण इंतकाल, विरासत इंतकाल, जाति सत्यापन, मूल निवास प्रमाण पत्र, लोन केस सहित अन्य काम बंद रहे। -आशीष, नायब तहसीलदार, अंबाला छावनी