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विद्यार्थियों की बढ़ती गई संख्या पर सरकारी स्कूलों की नहीं
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लगातार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। मगर, सरकारी स्कूलों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। इस समय कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर कई-कई किलोमीटर में एक भी स्कूल नहीं है। इस कारण विद्यार्थियों को लंबा सफर तय कर पढ़ाई करने के लिए स्कूलों में पहुंचना पड़ रहा है। जिले की बात करें तो इस समय जिले में 767 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में 82 हजार 749 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले करीब 20 सालों में एक भी नए स्कूल का इजाफा नहीं हुआ है।
पिछले साल सरकारी स्कूलों में 77 हजार 289 विद्यार्थी थे, इस साल इनकी संख्या पांच हजार 190 बढ़ गई। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले सालों में यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है। इसके विपरीत 2014 में करीब 40 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया था। वहीं हर साल स्कूलों को मर्ज करने की बात भी चलती रहती है। राहत की बात यह है कि 2014 के बाद स्कूलों को बंद नहीं किया गया। दूसरी ओर, प्राइवेट स्कूलों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। जो सरकारी स्कूलों के कम होने का फायदा उठा रहे हैं। इस समय जिले में 325 पंजीकृत स्कूल हैं, इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है। संवाद
यह है स्कूलों की स्थिति
राजकीय स्कूल प्रेमनगर के बाद हिसार रोड पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बलाना में है। यह करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा राजकीय स्कूल जलबेड़ा भी करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कांवला में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्कूल है। मगर यहां तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। सेक्टर 10 में हुडा की ओर से स्कूल के लिए भवन दिया गया है। मगर यहां पर स्कूल नहीं खोला गया।
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यह है प्राइवेट स्कूल की स्थिति
जिले में इस समय 325 प्राइवेट पंजीकृत स्कूल हैं। इसमें अंबाला-1 में 99, अंबाला-2 में 97, साहा में 33, बराड़ा में 46, शहजादपुर में 18, नारायणगढ़ में 32 स्कूल हैं।
करीब 2002-03 में अंतिम स्कूल का निर्माण हुआ था। उसके बाद से किसी भी नए सरकारी स्कूल का निर्माण नहीं हुआ है। पिछले कई सालों से स्कूलों को मर्ज करने को लेकर चर्चा चल रही थी। मगर, उस दौरान स्कूलों को मर्ज नहीं किया गया था। सरकार को ऐसे क्षेत्रों में स्कूलों का निर्माण करना चाहिए, जहां स्कूल नहीं हैं। इसके इतर सरकार स्कूलों को बंद करने पर विचार कर रही है। जो स्कूल प्राइवेट भवन में चल रहे हैं, उन्हें भी शिफ्ट करना चाहिए।
- अमित छाबड़ा, प्रधान, जिला राजकीय प्राथमिक स्कूल संघ।
इस समय जिले में 767 स्कूल हैं। जहां पर छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में विद्यार्थियों बढ़ती की संख्या को देखते हुए स्कूलों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। बाकी जैसा सरकार की ओर से आदेश आएंगे उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।
- सुुधीर कालड़ा, डीपीसी, शिक्षा विभाग।
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पिछले साल सरकारी स्कूलों में 77 हजार 289 विद्यार्थी थे, इस साल इनकी संख्या पांच हजार 190 बढ़ गई। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले सालों में यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है। इसके विपरीत 2014 में करीब 40 सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया था। वहीं हर साल स्कूलों को मर्ज करने की बात भी चलती रहती है। राहत की बात यह है कि 2014 के बाद स्कूलों को बंद नहीं किया गया। दूसरी ओर, प्राइवेट स्कूलों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। जो सरकारी स्कूलों के कम होने का फायदा उठा रहे हैं। इस समय जिले में 325 पंजीकृत स्कूल हैं, इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है। संवाद
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यह है स्कूलों की स्थिति
राजकीय स्कूल प्रेमनगर के बाद हिसार रोड पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बलाना में है। यह करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा राजकीय स्कूल जलबेड़ा भी करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कांवला में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्कूल है। मगर यहां तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। सेक्टर 10 में हुडा की ओर से स्कूल के लिए भवन दिया गया है। मगर यहां पर स्कूल नहीं खोला गया।
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यह है प्राइवेट स्कूल की स्थिति
जिले में इस समय 325 प्राइवेट पंजीकृत स्कूल हैं। इसमें अंबाला-1 में 99, अंबाला-2 में 97, साहा में 33, बराड़ा में 46, शहजादपुर में 18, नारायणगढ़ में 32 स्कूल हैं।
करीब 2002-03 में अंतिम स्कूल का निर्माण हुआ था। उसके बाद से किसी भी नए सरकारी स्कूल का निर्माण नहीं हुआ है। पिछले कई सालों से स्कूलों को मर्ज करने को लेकर चर्चा चल रही थी। मगर, उस दौरान स्कूलों को मर्ज नहीं किया गया था। सरकार को ऐसे क्षेत्रों में स्कूलों का निर्माण करना चाहिए, जहां स्कूल नहीं हैं। इसके इतर सरकार स्कूलों को बंद करने पर विचार कर रही है। जो स्कूल प्राइवेट भवन में चल रहे हैं, उन्हें भी शिफ्ट करना चाहिए।
- अमित छाबड़ा, प्रधान, जिला राजकीय प्राथमिक स्कूल संघ।
इस समय जिले में 767 स्कूल हैं। जहां पर छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में विद्यार्थियों बढ़ती की संख्या को देखते हुए स्कूलों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। बाकी जैसा सरकार की ओर से आदेश आएंगे उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।
- सुुधीर कालड़ा, डीपीसी, शिक्षा विभाग।