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दुष्टों का नाश करने को अवतार लेते हैं प्रभु : सिद्धांती
Fri, 15 Mar 2024 04:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 15 Mar 2024 04:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बराड़ा। श्री गोविंद गोशाला के तत्वावधान में आयोजित भागवत कथा के पंचम दिन का शुभारंभ कृष्ण भक्त सत् प्रकाश बंसल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया। कथा व्यास सिद्धांती महाराज ने गवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं एवं बाल सुलभ चेष्टाओं का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि भगवान अजन्मा होते हुए भी जन्म ग्रहण करते हैं। श्री कृष्ण जो श्याम आनंद की साक्षात मूर्ति हैं, उन्होंने नंद महाराज के घर में जन्म लिया। कृष्ण इस धरती पर दुष्टों का नाश करने तो आते ही हैं, परंतु उनका मुख्य उद्देश्य अपने भक्तों को आनंद भी प्रदान करना है। जिस प्रकार से श्री कृष्ण ने ग्वाल बाल, सखाओं, नंद बाबा, यशोदा मैया, गोपियों इत्यादि को ब्रज में आनंद प्रदान किया। वह भगवान की किसी भी लीला में नहीं देखा जाता।
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बुधवार, अर्धरात्रि, अभिजीत नामक मुहूर्त और हर्ष नामक योग में हुआ। भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाओं से यह दर्शाया की तुम मुझे किसी भी रूप में भज सकते हो। सिद्धांती महाराज शनिवार को हरि नाम दीक्षा प्रदान करेंगे। इच्छुक श्रद्धालु सुबह आठ बजे पहुंच कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। इस अवसर पर प्रधान राजेश सिंगला उपप्रधान, प्रमोद जैन, बृज मोहन, अशोक बंसल, अजय जैन, रविन्द्र, श्रवण गोयल मौजूद रहे।
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बराड़ा। श्री गोविंद गोशाला के तत्वावधान में आयोजित भागवत कथा के पंचम दिन का शुभारंभ कृष्ण भक्त सत् प्रकाश बंसल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया। कथा व्यास सिद्धांती महाराज ने गवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं एवं बाल सुलभ चेष्टाओं का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि भगवान अजन्मा होते हुए भी जन्म ग्रहण करते हैं। श्री कृष्ण जो श्याम आनंद की साक्षात मूर्ति हैं, उन्होंने नंद महाराज के घर में जन्म लिया। कृष्ण इस धरती पर दुष्टों का नाश करने तो आते ही हैं, परंतु उनका मुख्य उद्देश्य अपने भक्तों को आनंद भी प्रदान करना है। जिस प्रकार से श्री कृष्ण ने ग्वाल बाल, सखाओं, नंद बाबा, यशोदा मैया, गोपियों इत्यादि को ब्रज में आनंद प्रदान किया। वह भगवान की किसी भी लीला में नहीं देखा जाता।
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भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बुधवार, अर्धरात्रि, अभिजीत नामक मुहूर्त और हर्ष नामक योग में हुआ। भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाओं से यह दर्शाया की तुम मुझे किसी भी रूप में भज सकते हो। सिद्धांती महाराज शनिवार को हरि नाम दीक्षा प्रदान करेंगे। इच्छुक श्रद्धालु सुबह आठ बजे पहुंच कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। इस अवसर पर प्रधान राजेश सिंगला उपप्रधान, प्रमोद जैन, बृज मोहन, अशोक बंसल, अजय जैन, रविन्द्र, श्रवण गोयल मौजूद रहे।
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