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नृत्य में दिखी हरियाणवी संस्कृति की झलक
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अंबाला। आर्य गर्ल्स कॉलेज छावनी के प्रांगण में यूथ क्लब व आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यशाला से प्रशिक्षित पेरी, आकांक्षा, हीना, पूजा, महक, पल्लवी, प्रिया, कन्नू, सिमरन, आरती, रवीना, काजल, विशाखा आदि छात्राओं ने हरियाणवी नृत्य कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्राओं ने ग्रुप डांस पेश कर हरियाणा की संस्कृति की झलक दिखाई।
कार्यक्रम में संस्कृति गरिमा मंच की पूर्व प्रधान मंजू नांद्रा मुख्यातिथि के रूप में शामिल रही। कार्यशाला के प्रशिक्षक बुधराम (आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन) ने पिछले 10 दिनों में नृत्य की विधाओं के बारे में छात्राओं को अवगत कराते हुए उनकी कला को निखारा। लकी ट्रैवलिंग थिएटर एक्टर ने ‘मां मुझे टैगोर बना दे’ ड्रामा का प्रदर्शन किया। उन्होंने एक बच्चे के जीवन के बारे में दिखाया कि कितनी मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह टैगोर नहीं बन पाया पर अब दूसरों को टैगोर बनाने में वह सफल हुआ।
थिएटर के डायरेक्टर अशोक लहरी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो नृत्य नहीं जानता। यह एक ऐसी कला है जो एक साल का बच्चा भी अपने हाथ पांव हिलाकर करता है। इस मौके पर अंजलि वाधवन, आदि मंच के थिएटर डायरेक्टर जगदीश शर्मा, डॉ. शशि धमीजा, पूनम खुराना, यूथ क्लब की कंवीनर प्रो. सिल्वी अग्रवाल, डॉ. रेखा वासु, डॉ. सुनीता, डॉ. अनु वर्मा आदि मौजूद रहे।
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रोजगार दिलाता है नृत्य : अनुपमा
कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य ने बताया कि नृत्य सीखने के पश्चात साधक नृत्य को एक रोजगार के रूप में भी अपना सकता है। समाज व देश की संस्कृति को समझने के लिए नृत्य एक उत्तम माध्यम है। नृत्य के लिए दो पांव ही नहीं दिल भी चाहिए। वैसे तो पांवों का काम चलना होता है मगर नृत्य करना पांवों का शौक होता है।
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कार्यक्रम में संस्कृति गरिमा मंच की पूर्व प्रधान मंजू नांद्रा मुख्यातिथि के रूप में शामिल रही। कार्यशाला के प्रशिक्षक बुधराम (आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन) ने पिछले 10 दिनों में नृत्य की विधाओं के बारे में छात्राओं को अवगत कराते हुए उनकी कला को निखारा। लकी ट्रैवलिंग थिएटर एक्टर ने ‘मां मुझे टैगोर बना दे’ ड्रामा का प्रदर्शन किया। उन्होंने एक बच्चे के जीवन के बारे में दिखाया कि कितनी मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह टैगोर नहीं बन पाया पर अब दूसरों को टैगोर बनाने में वह सफल हुआ।
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थिएटर के डायरेक्टर अशोक लहरी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो नृत्य नहीं जानता। यह एक ऐसी कला है जो एक साल का बच्चा भी अपने हाथ पांव हिलाकर करता है। इस मौके पर अंजलि वाधवन, आदि मंच के थिएटर डायरेक्टर जगदीश शर्मा, डॉ. शशि धमीजा, पूनम खुराना, यूथ क्लब की कंवीनर प्रो. सिल्वी अग्रवाल, डॉ. रेखा वासु, डॉ. सुनीता, डॉ. अनु वर्मा आदि मौजूद रहे।
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रोजगार दिलाता है नृत्य : अनुपमा
कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य ने बताया कि नृत्य सीखने के पश्चात साधक नृत्य को एक रोजगार के रूप में भी अपना सकता है। समाज व देश की संस्कृति को समझने के लिए नृत्य एक उत्तम माध्यम है। नृत्य के लिए दो पांव ही नहीं दिल भी चाहिए। वैसे तो पांवों का काम चलना होता है मगर नृत्य करना पांवों का शौक होता है।