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तीन घंटे चार नेशनल और एक स्टेट हाईवे जाम
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कड़ासन में पंचकूला नेशनल हाईव जाम कर बैठे किसान
- फोटो : Ambala
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कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने जिले में तीन नहीं बल्कि चार नेशनल और एक स्टेट हाईवे शनिवार को 3 घंटे जाम रखे। अंबाला-अमृतसर, धनाना में देहरादून, कड़ासन में पंचकूला और बराड़ा में जगाधरी नेशनल हाईवे के अलावा अंबाला-हिसार हाईवे भी जाम रहा।
जाम दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चला। जब तक किसान सड़क पर बैठे रहे तब तक प्रशासन और पुलिस की सांसें अटकी रहीं। जिला प्रशासन सीआईडी व अपने कर्मियों के माध्यम से पल-पल की जानकारी जुटता रहा, लेकिन अन्नदाता ने अपना संयम नहीं खोया और धीरज से काम लेते हुए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखा।
हालांकि अंबाला-हिसार नेशनल हाईवे अंबाला में नहीं बल्कि सैन माजरा कुरुक्षेत्र में जाम रहा, लेकिन इसके चलते अंबाला से हिसार और कैथल जाने वालों को दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा। इसी तरह पिहोवा की ओर से अंबाला शहर आने वालों को भी परेशानियां झेलनी पड़ीं। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी सतर्कता और धैर्य से काम लिया। जाम से पहले ही पुलिस ने रूट को डायवर्ट कर दिया। इससे स्थिति खराब नहीं हुई। जाम को देखते हुए पुलिस की पांच कंपनियां अलग-अलग जगह तैनात रहीं। इसके अलावा प्रशासन ने फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस इत्यादि की भी व्यवस्था की हुई थी।
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बुजुर्गों ने युवाओं को थपकी दे जोश को दिखाई सही रहा
आंदोलन के दौरान कई बार स्थिति विकट हो गई। एक शंभू बार्डर पर पंजाब की ओर दोपहर करीब दो बजे स्थिति बिगड़ गई। एक वाहन में कुछ लोगों के चलते युवा किसान भड़क गए और स्थिति विकट हो गई लेकिन मौके पर मौजूद बुजुर्ग और सीनियर किसान नेताओं ने थपकी देकर इस युवा जोश को शांत करवाते हुए लंगर बरताने व अन्य सेवा में लगाए रखा। इसीलिए स्थिति नहीं बिगड़ते-बिगड़ते टल गई।
कार्ड दिखाए तो किसानों ने खुद खड़े होकर वाहनों को निकलवाया
जाम के दौरान यदि किसी मरीज के तीमारदार ने गाड़ी में पड़े मरीज और उसकी पर्ची दिखाई तो किसानों ने खुद खड़े होकर पहले राह में बैठे अपने किसान भाइयों का उठाया, बल्कि जहां बीच में गाड़ी खड़ी दिखी उन्हें भी हटाया और जाम से निकलवाने में पूरी मदद की। इसी तरह एंबुलेंस और सैन्य की वर्दी पहनकर अपनी गाड़ी में जाने वालों को भी किसानों ने नहीं रोका। हालांकि किसी अन्य वाहन जैसे सवारियों से भरे ऑटो, निजी वाहन, किसी को किसानों ने जाम के 3 घंटे के दौरान आगे नहीं जाने दिया।
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जाम दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चला। जब तक किसान सड़क पर बैठे रहे तब तक प्रशासन और पुलिस की सांसें अटकी रहीं। जिला प्रशासन सीआईडी व अपने कर्मियों के माध्यम से पल-पल की जानकारी जुटता रहा, लेकिन अन्नदाता ने अपना संयम नहीं खोया और धीरज से काम लेते हुए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखा।
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हालांकि अंबाला-हिसार नेशनल हाईवे अंबाला में नहीं बल्कि सैन माजरा कुरुक्षेत्र में जाम रहा, लेकिन इसके चलते अंबाला से हिसार और कैथल जाने वालों को दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा। इसी तरह पिहोवा की ओर से अंबाला शहर आने वालों को भी परेशानियां झेलनी पड़ीं। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी सतर्कता और धैर्य से काम लिया। जाम से पहले ही पुलिस ने रूट को डायवर्ट कर दिया। इससे स्थिति खराब नहीं हुई। जाम को देखते हुए पुलिस की पांच कंपनियां अलग-अलग जगह तैनात रहीं। इसके अलावा प्रशासन ने फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस इत्यादि की भी व्यवस्था की हुई थी।
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बुजुर्गों ने युवाओं को थपकी दे जोश को दिखाई सही रहा
आंदोलन के दौरान कई बार स्थिति विकट हो गई। एक शंभू बार्डर पर पंजाब की ओर दोपहर करीब दो बजे स्थिति बिगड़ गई। एक वाहन में कुछ लोगों के चलते युवा किसान भड़क गए और स्थिति विकट हो गई लेकिन मौके पर मौजूद बुजुर्ग और सीनियर किसान नेताओं ने थपकी देकर इस युवा जोश को शांत करवाते हुए लंगर बरताने व अन्य सेवा में लगाए रखा। इसीलिए स्थिति नहीं बिगड़ते-बिगड़ते टल गई।
कार्ड दिखाए तो किसानों ने खुद खड़े होकर वाहनों को निकलवाया
जाम के दौरान यदि किसी मरीज के तीमारदार ने गाड़ी में पड़े मरीज और उसकी पर्ची दिखाई तो किसानों ने खुद खड़े होकर पहले राह में बैठे अपने किसान भाइयों का उठाया, बल्कि जहां बीच में गाड़ी खड़ी दिखी उन्हें भी हटाया और जाम से निकलवाने में पूरी मदद की। इसी तरह एंबुलेंस और सैन्य की वर्दी पहनकर अपनी गाड़ी में जाने वालों को भी किसानों ने नहीं रोका। हालांकि किसी अन्य वाहन जैसे सवारियों से भरे ऑटो, निजी वाहन, किसी को किसानों ने जाम के 3 घंटे के दौरान आगे नहीं जाने दिया।