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छोरे पहलवानों से लड़कर जोड़ती थी टूर का पैसा
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
Updated Sat, 20 Jun 2015 12:53 AM IST
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‘न तो दिल्ली सरकार और न ही किसी अन्य सरकार ने आर्थिक मदद की। किसी भी खेल प्रतियोगिता में आने-जाने का खर्चा निकालने के लिए लड़कों से कुश्ती करनी पड़ती थी।
इसके बाद ही टूर के खर्च के लिए पैसे एकत्रित हो पाते थे।’ यह दर्द है एशियाई कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली राष्ट्रीय चैंपियन और मजदूर की बेटी पहलवान दिव्या सैन का, जो उन्होंने अंबाला में व्यक्त किया।
दिव्या यूपी के मुज्जफरनगर की रहने वाली हैं, मगर दिल्ली की ओर से खेलती हैं। दिव्या का कहना है कि कई गोल्ड मेडल हासिल करने के बावजूद उन्हें दिल्ली और यूपी सरकार ने वह सम्मान नहीं किया, जिसकी वे हकदार थीं।
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दिव्या का कहना है कि वे अंबाला में आईं, तो उन्हें बहुत सम्मान मिला। इसलिए उनकी दिली इच्छा है कि वे अब हरियाणा की ओर से खेलें। शुक्रवार को राष्ट्रीय सैन समाज संघ के तत्वाधान में अंबाला कैंट में हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष शिवाजी काकरान ने दिव्या का स्वागत किया।
उन्होंने पहलवान दीपिका जाखड़ को अपना रोल मॉडल बताते हुए कहा कि जब वे उनसे मिलीं, तो उन्होंने उससे कहा था कि वे उनकी जैसे बनना चाहती है। इस पर दीपिका ने पीठ ठोकते हुए कहा था कि वे उसके जैसी नहीं, उससे भी तगड़ी पहलवान बनेगी। दिव्या के अनुसार दीपिका की यही बात उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही।
लोगों ने भी किया अभिनंदन
सम्मान के बाद दिव्या सैन को खुली जीप में शहर में घुमाया गया। इसके चलते अंबाला के लोगों ने भी उनका अभिनंदन किया। समाज सेविका धनवंती देवी ने 11 हजार रुपये देकर दिव्या सैन को सम्मानित किया। दिव्या इस मुकाम तक पहुंचने का श्रेय अपने पिता सूरज पहलवान को देती हैं।
जीत चुकी हैं ढेरों मेडल
दिव्या सैन ने बताया कि नेशनल गेम्स में दो बार 60 किलोग्राम वर्ग और 70 किलोग्राम वर्ग में मेडल जीते हैं। एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में 70 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
वह अभी तक नेशनल गोल्ड मेडल और 14 स्टेट गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इस मौके पर संगठन सचिव राम प्रकाश, रविंद्र, सोमदत्त चंदेल, खदेह मटू, सोहनलाल नागी, रामकुमार, दिलबाग सिंह, वीरेंद्र मारवाह आदि मौजूद रहे।
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इसके बाद ही टूर के खर्च के लिए पैसे एकत्रित हो पाते थे।’ यह दर्द है एशियाई कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली राष्ट्रीय चैंपियन और मजदूर की बेटी पहलवान दिव्या सैन का, जो उन्होंने अंबाला में व्यक्त किया।
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दिव्या यूपी के मुज्जफरनगर की रहने वाली हैं, मगर दिल्ली की ओर से खेलती हैं। दिव्या का कहना है कि कई गोल्ड मेडल हासिल करने के बावजूद उन्हें दिल्ली और यूपी सरकार ने वह सम्मान नहीं किया, जिसकी वे हकदार थीं।
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दिव्या का कहना है कि वे अंबाला में आईं, तो उन्हें बहुत सम्मान मिला। इसलिए उनकी दिली इच्छा है कि वे अब हरियाणा की ओर से खेलें। शुक्रवार को राष्ट्रीय सैन समाज संघ के तत्वाधान में अंबाला कैंट में हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष शिवाजी काकरान ने दिव्या का स्वागत किया।
उन्होंने पहलवान दीपिका जाखड़ को अपना रोल मॉडल बताते हुए कहा कि जब वे उनसे मिलीं, तो उन्होंने उससे कहा था कि वे उनकी जैसे बनना चाहती है। इस पर दीपिका ने पीठ ठोकते हुए कहा था कि वे उसके जैसी नहीं, उससे भी तगड़ी पहलवान बनेगी। दिव्या के अनुसार दीपिका की यही बात उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही।
लोगों ने भी किया अभिनंदन
सम्मान के बाद दिव्या सैन को खुली जीप में शहर में घुमाया गया। इसके चलते अंबाला के लोगों ने भी उनका अभिनंदन किया। समाज सेविका धनवंती देवी ने 11 हजार रुपये देकर दिव्या सैन को सम्मानित किया। दिव्या इस मुकाम तक पहुंचने का श्रेय अपने पिता सूरज पहलवान को देती हैं।
जीत चुकी हैं ढेरों मेडल
दिव्या सैन ने बताया कि नेशनल गेम्स में दो बार 60 किलोग्राम वर्ग और 70 किलोग्राम वर्ग में मेडल जीते हैं। एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में 70 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
वह अभी तक नेशनल गोल्ड मेडल और 14 स्टेट गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इस मौके पर संगठन सचिव राम प्रकाश, रविंद्र, सोमदत्त चंदेल, खदेह मटू, सोहनलाल नागी, रामकुमार, दिलबाग सिंह, वीरेंद्र मारवाह आदि मौजूद रहे।