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Ambala News: गन्ने के दाम में महज प्रति क्विंटल 15 रुपये की बढ़ोतरी से भड़के किसान
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नारायणगढ़ में भारतीय किसान यूनियन चढूनी और गन्ना संघर्ष समिति के पदाधिकारी प्रदर्शन करते हुए। स
- फोटो : ARchive
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। प्रदेश सरकार की ओर से गन्ने के भाव में मात्र 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने के फैसले पर किसान संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है।
इस मामूली बढ़ोतरी को किसानों के साथ भद्दा मजाक बताते हुए शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) अंबाला और गन्ना संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से नारायणगढ़ में प्रदर्शन किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए सरकार का पुतला फूंककर रोष जताया।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भाकियू (चढ़ूनी) के जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का मतलब प्रति किलो महज 15 पैसे की बढ़ोतरी है। एक तरफ चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं डीजल 100 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है और मजदूरी के रेट भी 10 से 15 रुपये तक बढ़ गए हैं।
ऐसे में 15 पैसे किलो बढ़ाकर सरकार किसानों को क्या देना चाहती है। उन्होंने कहा कि सालभर खून-पसीना बहाने के बाद भी किसान अपनी लागत नहीं निकाल पा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गन्ने की खेती घाटे का सौदा बनती रही, तो किसान सफेदा व अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने को मजबूर होंगे।
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सरकार का दावा- दो साल में 35 रुपये बढ़ाकर बढ़ाएंगे आय : सरकार ने हाल ही में पेराई सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 415 रुपये से बढ़ाकर 430 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। साथ ही 2027-28 के लिए भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने का एलान किया है। फैसले से किसानों की प्रति एकड़ आय में 10 हजार से 11,300 रुपये तक का इजाफा होगा। हालांकि, प्रदर्शन में मौजूद भाकियू के महासचिव राजीव शर्मा, युवा जिला प्रधान गुलाब पूनिया, गन्ना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद राणा व बॉबी राणा समेत तमाम किसान नेताओं ने सरकार के इन दावों को खारिज करते हुए बढ़ाए गए दामों को तुरंत वापस लेकर सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग की है।
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अंबाला। प्रदेश सरकार की ओर से गन्ने के भाव में मात्र 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने के फैसले पर किसान संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है।
इस मामूली बढ़ोतरी को किसानों के साथ भद्दा मजाक बताते हुए शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) अंबाला और गन्ना संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से नारायणगढ़ में प्रदर्शन किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए सरकार का पुतला फूंककर रोष जताया।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भाकियू (चढ़ूनी) के जिला प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का मतलब प्रति किलो महज 15 पैसे की बढ़ोतरी है। एक तरफ चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं डीजल 100 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है और मजदूरी के रेट भी 10 से 15 रुपये तक बढ़ गए हैं।
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ऐसे में 15 पैसे किलो बढ़ाकर सरकार किसानों को क्या देना चाहती है। उन्होंने कहा कि सालभर खून-पसीना बहाने के बाद भी किसान अपनी लागत नहीं निकाल पा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गन्ने की खेती घाटे का सौदा बनती रही, तो किसान सफेदा व अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने को मजबूर होंगे।
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सरकार का दावा- दो साल में 35 रुपये बढ़ाकर बढ़ाएंगे आय : सरकार ने हाल ही में पेराई सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 415 रुपये से बढ़ाकर 430 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। साथ ही 2027-28 के लिए भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने का एलान किया है। फैसले से किसानों की प्रति एकड़ आय में 10 हजार से 11,300 रुपये तक का इजाफा होगा। हालांकि, प्रदर्शन में मौजूद भाकियू के महासचिव राजीव शर्मा, युवा जिला प्रधान गुलाब पूनिया, गन्ना संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद राणा व बॉबी राणा समेत तमाम किसान नेताओं ने सरकार के इन दावों को खारिज करते हुए बढ़ाए गए दामों को तुरंत वापस लेकर सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग की है।

नारायणगढ़ में भारतीय किसान यूनियन चढूनी और गन्ना संघर्ष समिति के पदाधिकारी प्रदर्शन करते हुए। स- फोटो : ARchive