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Ambala News: आंदोलन में कई प्रदेशों से पहुंचे किसान, बाकी असमंजस में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Feb 2024 03:10 AM IST
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Farmers from many states arrived in the movement, the rest were in confusion
अंबाला सिटी। दिल्ली कूच करने वाले किसान वार्ता का मन बना चुके हैं। मजदूर किसान मोर्चा ने सभी संगठनों के साथ यही फैसला लिया है कि इस मुद्दे पर सरकार जितना बात करना चाहेगी वे करेंगे। मगर यह भी सच्चाई है कि सरकार मामले को निपटाने में जितना समय लगाएगी उतना ही आंदोलन को मजबूती मिलेगी।
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किसान संगठनों की ये है मंशा
अभी तक कई राज्यों के किसान संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया है। इसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। यहां से किसान संगठनों के नेता शंभू सीमा पर पहुंच रहे हैं और आंदोलन के समर्थन दे रहे हैं। अब किसान संगठन की महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश के किसान संगठनों से बात चल रही है। मगर वे असमंजस में हैं। सभी राज्यों के किसानों को जोड़ने के पीछे मोर्चे की मंशा है कि इससे सरकार के उन आरोपों को खारिज किया जाए कि यह आंदाेलन सिर्फ पंजाब का है। अगर हर राज्य से किसान संगठन जुड़ेंगे तो पिछली बार हुए किसान आंदोलन की तर्ज पर इसे भी बड़ा किया जा सकेगा।
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राजस्थान से समर्थन के लिए पहुंची चार ट्रालियां

किसान आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है। वैसे ही समर्थन देने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान की तरफ से पहले भी समर्थन दिया है और इस बार वे किसानों के साथ पक्के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आगे आई है। राजस्थान के किसान नेता अपने साथ चार ट्रालियां लेकर पहुंचे हैं। राजस्थान के ग्रामीण किसान मजदूर समिति और आंदोलन के मीडिया प्रभारी रणजीत राजू ने बताया कि उनके साथ चार ट्रालियां आई हैं। हालांकि सरकार की तरफ से बॉर्डरों को सील कर रखा है, लेकिन वे लिंक से शंभू सीमा तक पहुंची।
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विदेश में रहने के बावजूद किसानों के लिए धड़क रहा दिल, फोन कर बढ़ा रहे हौसला



किसानों का आंदोलन जगा रहा मोहब्बत
शंभू बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। दूसरी ओर विदेशों में बैठे किसानों के दिलों में अपने भाइयों के लिए मोहब्बत जगा दी है। अलग-अलग राज्यों के किसानों के अलावा कनाडा और यूके देशों में सालों से रह रहे लोग जो किसान परिवार से संबंध रखते हैं वो भी किसान नेताओं को फोन में संपर्क कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। बोल रहे हैं कि वो पूरी तरह से आंदोलन में उनके साथ है। मौका मिला तो वे भी आएंगे। किसान नेता रणजीत राजू ने बताया कि उनके पास करीब 12 फोन आ चुके हैं और ये कनाडा और यूके से हैं। किसान परिवारों से जुड़े युवा और किसान उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।



कोई लड़े, मगर फायदा सभी किसानों को होगा

अधिक से अधिक किसानों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर किसान नेताओं का कहना है कि किसानों की लड़ाई कोई भी संगठन लड़े, मगर सरकार जब इन मांगों पर राजी होकर काम करेगी तो हर किसान को इसका फायदा होगा। फिर चाहें वह उत्तर प्रदेश का किसान हो या तेलंगाना का किसान। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी प्रत्येक किसान को मिलेगी।

आरोप : आंदोलन को बिगाड़ने की हो रही साजिश

भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि आंदोलन को बिगाड़ने की साजिश हो सकती है। इसके लिए हमने कुछ युवाओं की टीम तैनात की है जो आंदोलन में ऐसे लोगों पर नजर बनाए है जो संदिग्ध प्रतीत होते हैं। शनिवार को एक पत्थर फेंकने वाले व्यक्ति को भी पकड़ा था। पत्रकारों के लिए भी कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे कि वह पहचाने जा सें। क्योंकि इस आंदोलन पर नजर रखना बहुत जरूरी है।




वर्जन

किसान आंदोलन में देशभर के किसानों को शामिल किया जा रहा है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश के किसान संगठनों से अभी बात चल रही है। अभी उनका तय नहीं है, मगर हमें उम्मीद है कि वह जल्दी आएंगे।
-रणजीत राजू, मीडिया प्रभारी, किसान आंदोलन और राजस्थान के ग्रामीण किसान मजदूर समिति
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