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Ambala News: अंबाला लोकसभा में भारी पड़ी किसानों की नाराजगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:18 AM IST
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Farmers' displeasure was heavy in Ambala Lok Sabha
वैभव शर्मा
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अंबाला। लोकसभा चुनाव में 10 साल बाद अंबाला सीट पर कांग्रेस ने वापसी की है। यहां कांटे की टक्कर में कांग्रेस के वरुण चौधरी ने भाजपा की बंतो कटारिया को 47 हजार मतों से शिकस्त दी है। माना जा रहा है कि पंजाब की सीमा से लगे होने के कारण किसानों की नाराजगी का खामियाजा भाजपा को यहां भुगतना पड़ा। वहीं कांग्रेस की ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ और पिछले 10 साल के कार्यकाल में अपेक्षाकृत कार्य नहीं होने का खामियाजा भी भाजपा को उठाना पड़ा है। शायद यही कारण है कि क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी की रैली के बावजूद परिणाम भाजपा के खिलाफ गया।
अंबाला लोकसभा सीट पर पिछले दाे बार के लोकसभा चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा था। वर्ष 2014 व 2019 में लगातार भाजपा के रतनलाल कटारिया ने यहां से जीत दर्ज की थी। अहम बात यह है कि पिछले चुनाव में जिस सीट पर रतन लाल कटारिया ने करीब साढ़े तीन लाख मतों से कांग्रेस की दिग्गज कुमारी सैलजा को शिकस्त दी थी, उस सीट पर भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी। स्थिति यह रही कि सूबे के सीएम नायब सिंह सैनी, परिवहन राज्य मंत्री असीम गोयल, मंत्री कंवर पाल गुर्जर के हलकों से भी भाजपा को बढ़त नहीं मिल सकी। यही नहीं भाजपा को उम्मीद थी कि सहानुभूति मतों के साथ भाजपा की लहर का भी बंतो कटारिया को फायदा मिलेगा, लेकिन पिछले 10 साल के कार्यकाल में अपेक्षाकृत कार्य नहीं होने के कारण भाजपा प्रत्याशी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
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कांग्रेस की जीत के पीछे वरुण चौधरी की राजनीतिक पृष्ठभूमि और बदलाव की बयार काम आई। वहीं किसान आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशी को विरोध का भी सामना करना पड़ा। स्थिति यह रही कि सीएम से लेकर परिवहन मंत्री तक के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को हार मिली है। इस चुनाव में वरुण को 49.23 प्रतिशत वोट शेयर तो बंतो कटारिया को 45.7 प्रतिशत मत मिले, जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 56.72 प्रतिशत मत मिले थे और कांग्रेस को 30 प्रतिशत पर संतोष करना पड़ा था।
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सीएम के घर में भी हारी भाजपा



अंबाला लोकसभा में नारायणगढ़ विधानसभा की भी अहम भूमिका है। यहां पर सीएम नायब सिंह सैनी का पैतृक गांव है और वह खुद भी यहां से विधायक रह चुके हैं। ऐसे में इस विधानसभा की परफॉर्मेंस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं थी। यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी को भाजपा की तुलना में 20906 मतों से जीत मिली है।


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कांग्रेस की जीत के यह रहे तीन कारण

- कांग्रेस में गुटबाजी के बावजूद यहां कांग्रेसी नेता एक मंच पर आए और एकजुट हो दम दिखाया
- वरुण का मिलनसार व्यवहार, ईमानदार छवि और विस क्षेत्र में प्रदेश की आवाज बनने का लाभ मिला

- पिता फूलचंद मुलाना के नाम का भी अंबाला लोकसभा में फायदा मिला

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भाजपा की हार के तीन कारण

- किसान आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ माहौल बनना हार का प्रमुख कारण रहा।

- पिछले 10 साल के कार्यकाल में अपेक्षाकृत कार्य नहीं होना
- पूर्व सांसद दिवंगत रतनलाल कटारिया के निधन के बाद सहानुभूति फैक्टर भी काम नहीं आया

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