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Ambala News: नगर निगम में कूड़ा उठान के नाम पर 91.52 लाख रुपये की बर्बादी
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वर्ष 2035 का कूड़ा 2026 में ही दिखा रहे, एसीबी और एसीएस यूएलबी से की शिकायत
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। नगर निगम अंबाला में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान, छंटाई और कचरा निस्तारण के नाम पर सरकारी खजाने की बर्बादी सामने आई है। जून में नगर निगम ने तीन माह (16 जून से 15 सितंबर) के लिए शहर में घरों से कचरा उठाने, छंटाई, ढुलाई और निस्तारण के लिए निविदा निकाली थी। इस 90 दिन के काम के लिए नगर निगम ने अनुमानित लागत 2.49 करोड़ रुपये तय की थी। मगर इस काम की निविदा 3.41 करोड़ रुपये में मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज को जारी कर दी गई।
यानी सिर्फ तीन महीने के छोटे से काम के लिए अनुमानित लागत से 91.52 लाख रुपये अधिक धनराशि का बोझ बढ़ाकर सरकारी खजाने की बर्बादी की गई। इतना ही नहीं जो कचरा वर्ष 2035 में निकलना था, उन दामों में इस ठेके को कर दिया गया। यह सभी आरोप अंबाला सिटी के बलदेव नगर निवासी राकेश कुमार ने नगर निगम प्रशासन पर लगाए हैं।
इस संबंध में उन्होंने जांच के लिए सबूतों के साथ शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक और एसीएस यूएलबी को भेजी है, ताकि सच्चाई लोगों के सामने आ सके। अक्सर सरकारी विभागों की कोशिश होती है कि जितनी अनुमानित राशि का ठेका निकालें उससे कम बोली लगाने वाले को ठेका दें, मगर इस केस में तो उल्टा हुआ। सभी फर्मों ने बड़ी हुई कीमतों में ही बोली लगाई।
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इन्हीं में से कम बोली वाली एजेंसी का चयन किया गया। निविदा दोबारा निकाले या कीमत कम कराने पर बल ही नहीं दिया गया। यहां सरकारी दफ्तरों में महीनों लटकने वाली फाइलों की चाल इस निविदा में बुलेट ट्रेन से भी तेज रही। महज आठ दिनों में पूरी निविदा जारी कर दी गई।
नगर निगम प्रशासन पर आरोप
36.64 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी, आदेश में बताया सिर्फ 26.82 प्रतिशत
राकेश ने आरोप लगाया कि नगर निगम फरीदाबाद के चीफ इंजीनियर द्वारा 12 जून को लिखे पत्र में दावा किया गया था कि मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज को दिया गया 3.41 करोड़ रुपये का काम अनुमानित लागत से मात्र 26.82 प्रतिशत अधिक है। मगर हकीकत में ठेके के वर्क ऑर्डर की राशि सीधे तौर पर 36.64 प्रतिशत अधिक बैठती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि 10 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी क्यों की गई।
तकनीकी नोट में दो बोलीदाता, हकीकत में तीन
शिकायत में आरोप है कि तकनीकी मूल्यांकन समिति की 9 जून की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि निविदा में दो बोलीदाताओं ने भाग लिया। लेकिन इसी रिपोर्ट में ठीक नीचे मै. पूजा कंसल्टेंसी, मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज, मै. श्री श्याम एसोसिएट्स का नाम दिया है। कागजों में यह अंतर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। इस ठेके में मै. श्री श्याम ने 2800 रुपये, मै. पूजा ने 2600 रुपये तो सबसे कम मै. एक्सोर ने 2400 रुपये की बोली लगाई थी। ऐसे में ठेका रोहतक की मै. एक्सोर को दिया गया।
रेट अंबाला का, मंजूरी फरीदाबाद से क्यों
शिकायतकर्ता राकेश बताते हैं कि नगर निगम के इस काम के लिए रेट जस्टिफिकेशन और स्वीकृति स्थानीय स्तर के बजाय फरीदाबाद निगम के चीफ इंजीनियर से कराई। यह मंजूरी नगर निगम आयुक्त अंबाला ने दी। तीन महीने के ठेके को फरीदाबाद तक क्यों घुमाया गया।
999
वर्ष 2023 की निविदा से तुलना
राकेश के अनुसार, वर्ष 2023 में नगर निगम ने दो साल के लिए पूजा कंसल्टेंसी को कार्य आदेश जारी किया था। उनके मूल अनुबंध से तुलना की जाए तो नगर निगम वर्ष 2035 के अनुमान में कचरा उठान की निविदा का आकलन कर रहा है। पुराने अनुबंध के अनुसार, अंबाला में उस वक्त कचरा 137 टन प्रतिदिन था, जो 10 फीसदी की दशकीय वृद्धि दर से वर्ष 2035 तक 158 टन प्रतिदिन पहुंचने का अनुमान था। इस 90 दिन वाली निविदा के रेट को देखें तो निविदा में 3,41,28,000 रुपये का बजट 2400 प्रति टन के हिसाब से स्वीकृत किया है।
इसका सीधा हिसाब लगाने पर कुल कचरा 14,220 टन बैठता है, यानी रोजाना 158 टन। आरोप है कि जो कचरा प्राकृतिक आबादी वृद्धि के हिसाब से साल 2035 में पैदा होना था, निगम के अफसरों ने 2026 में ही कागजों पर रोजाना 158 टन कचरा उठाकर जनता के टैक्स के 91.52 लाख रुपये अतिरिक्त ठेकेदार की झोली में क्यों डाल दिए।
आबादी के हिसाब से कचरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में निविदा की दरें बढ़ती रहती हैं। हमने नियमानुसार निविदा लगाई है। विस्तृत जानकारी तो दस्तावेज देखने के बाद ही बताई जा सकती है।
वीरेंदर सहरावत, नगर निगम आयुक्त
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वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। नगर निगम अंबाला में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान, छंटाई और कचरा निस्तारण के नाम पर सरकारी खजाने की बर्बादी सामने आई है। जून में नगर निगम ने तीन माह (16 जून से 15 सितंबर) के लिए शहर में घरों से कचरा उठाने, छंटाई, ढुलाई और निस्तारण के लिए निविदा निकाली थी। इस 90 दिन के काम के लिए नगर निगम ने अनुमानित लागत 2.49 करोड़ रुपये तय की थी। मगर इस काम की निविदा 3.41 करोड़ रुपये में मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज को जारी कर दी गई।
यानी सिर्फ तीन महीने के छोटे से काम के लिए अनुमानित लागत से 91.52 लाख रुपये अधिक धनराशि का बोझ बढ़ाकर सरकारी खजाने की बर्बादी की गई। इतना ही नहीं जो कचरा वर्ष 2035 में निकलना था, उन दामों में इस ठेके को कर दिया गया। यह सभी आरोप अंबाला सिटी के बलदेव नगर निवासी राकेश कुमार ने नगर निगम प्रशासन पर लगाए हैं।
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इस संबंध में उन्होंने जांच के लिए सबूतों के साथ शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक और एसीएस यूएलबी को भेजी है, ताकि सच्चाई लोगों के सामने आ सके। अक्सर सरकारी विभागों की कोशिश होती है कि जितनी अनुमानित राशि का ठेका निकालें उससे कम बोली लगाने वाले को ठेका दें, मगर इस केस में तो उल्टा हुआ। सभी फर्मों ने बड़ी हुई कीमतों में ही बोली लगाई।
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इन्हीं में से कम बोली वाली एजेंसी का चयन किया गया। निविदा दोबारा निकाले या कीमत कम कराने पर बल ही नहीं दिया गया। यहां सरकारी दफ्तरों में महीनों लटकने वाली फाइलों की चाल इस निविदा में बुलेट ट्रेन से भी तेज रही। महज आठ दिनों में पूरी निविदा जारी कर दी गई।
नगर निगम प्रशासन पर आरोप
36.64 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी, आदेश में बताया सिर्फ 26.82 प्रतिशत
राकेश ने आरोप लगाया कि नगर निगम फरीदाबाद के चीफ इंजीनियर द्वारा 12 जून को लिखे पत्र में दावा किया गया था कि मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज को दिया गया 3.41 करोड़ रुपये का काम अनुमानित लागत से मात्र 26.82 प्रतिशत अधिक है। मगर हकीकत में ठेके के वर्क ऑर्डर की राशि सीधे तौर पर 36.64 प्रतिशत अधिक बैठती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि 10 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी क्यों की गई।
तकनीकी नोट में दो बोलीदाता, हकीकत में तीन
शिकायत में आरोप है कि तकनीकी मूल्यांकन समिति की 9 जून की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि निविदा में दो बोलीदाताओं ने भाग लिया। लेकिन इसी रिपोर्ट में ठीक नीचे मै. पूजा कंसल्टेंसी, मै. एक्सोर कंसल्टिंग सर्विसेज, मै. श्री श्याम एसोसिएट्स का नाम दिया है। कागजों में यह अंतर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। इस ठेके में मै. श्री श्याम ने 2800 रुपये, मै. पूजा ने 2600 रुपये तो सबसे कम मै. एक्सोर ने 2400 रुपये की बोली लगाई थी। ऐसे में ठेका रोहतक की मै. एक्सोर को दिया गया।
रेट अंबाला का, मंजूरी फरीदाबाद से क्यों
शिकायतकर्ता राकेश बताते हैं कि नगर निगम के इस काम के लिए रेट जस्टिफिकेशन और स्वीकृति स्थानीय स्तर के बजाय फरीदाबाद निगम के चीफ इंजीनियर से कराई। यह मंजूरी नगर निगम आयुक्त अंबाला ने दी। तीन महीने के ठेके को फरीदाबाद तक क्यों घुमाया गया।
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वर्ष 2023 की निविदा से तुलना
राकेश के अनुसार, वर्ष 2023 में नगर निगम ने दो साल के लिए पूजा कंसल्टेंसी को कार्य आदेश जारी किया था। उनके मूल अनुबंध से तुलना की जाए तो नगर निगम वर्ष 2035 के अनुमान में कचरा उठान की निविदा का आकलन कर रहा है। पुराने अनुबंध के अनुसार, अंबाला में उस वक्त कचरा 137 टन प्रतिदिन था, जो 10 फीसदी की दशकीय वृद्धि दर से वर्ष 2035 तक 158 टन प्रतिदिन पहुंचने का अनुमान था। इस 90 दिन वाली निविदा के रेट को देखें तो निविदा में 3,41,28,000 रुपये का बजट 2400 प्रति टन के हिसाब से स्वीकृत किया है।
इसका सीधा हिसाब लगाने पर कुल कचरा 14,220 टन बैठता है, यानी रोजाना 158 टन। आरोप है कि जो कचरा प्राकृतिक आबादी वृद्धि के हिसाब से साल 2035 में पैदा होना था, निगम के अफसरों ने 2026 में ही कागजों पर रोजाना 158 टन कचरा उठाकर जनता के टैक्स के 91.52 लाख रुपये अतिरिक्त ठेकेदार की झोली में क्यों डाल दिए।
आबादी के हिसाब से कचरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में निविदा की दरें बढ़ती रहती हैं। हमने नियमानुसार निविदा लगाई है। विस्तृत जानकारी तो दस्तावेज देखने के बाद ही बताई जा सकती है।
वीरेंदर सहरावत, नगर निगम आयुक्त