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Ambala News: गुमनामी की जिंदगी जी रहे नामी पहलवान
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पवन कुमार यादव उर्फ बब्बू पहलवान
अंबाला। एक समय था जब अखाड़ों में अंबाला के पहलवानों का नाम दूसरे राज्यों तक था। कई नामचीन पहलवानों को अंबाला और दूसरे राज्यों में जाकर धूल चटाई। समय बदला और कुश्ती अखाड़ों से निकलकर मैट पर आ गई। ऐसे में पुरानी पहलवानों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला।
इसके बाद कई पहलवानों ने बीच में ही कुश्ती छोड़ दी और दूसरे काम अपना लिए। किसी ने मालिश, मरहम पट्टी, प्रोपर्टी डीलर, दूध की डेयरी से लेकर अन्य काम कर रहे और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
चार बार नेशनल लैवल पर बब्बू कर चुके पहलवानी
पवन कुमार यादव उर्फ बब्बू पहलवान ने बताया कि 1963 में वह 12 साल के थे, तब उन्हाेंने पहलवानी शुरू की थी। उन्होंने उस्ताद हसना पहलवान से पहलवानी के सभी तरह से दांव पेंच सीखे। सन 1968 में पहली बार दंगल लडे़ थे। चार बार नेशनल लड़ चुके हैं। पंजाब के जिला फिरोजपुर में उन्होंने तीन कुश्ती जीतकर ढाई किलोग्राम की चांदी की गदा जीती थी।
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उन्होंने बताया कि सन 1979 में उन्होंने अपने ताया प्यारेलाल यादव और अपने दोस्त उस्ताद बाबू खान से मालिश, पट्टी करने की जानकारी जुटाई। इसके बाद दोस्त बाबू खान ने उन्हें मालिश और की दुकान खोलने की सलाह दी,1980 में शाहबाद की चांद मार्केट में दुकान खोली थी।
पहलवानी में अपने आप को सफलता न मिलने पर उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी कुश्ती में उतारा बड़ा बेटा अमित यादव स्टेट लेबल तक खेला और छोटा बेटा गौरव यादव नेशनल के ट्रायल में रह गया। इसके बाद दोनों बेटो ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और अब वह दोनों पिता के मरहम पट्टी और मालिश का काम संभाल रहे हैं।
रेलवे की नौकरी मिलने के बाद छोड़ी
छावनी के ग्वाल मंडी निवासी अजय पहलवान ने बताया कि वह हरियाणा और नेशनल तक खेले हैं, उनकी रेलवे में नौकरी भी लग गई लेकिन नियुक्ति के समय उन्हें त्वचा की बीमारी हो गई। जिसके कारण व नौकरी नहीं कर पाए और मौजूदा समय में वह प्रॉपर्टी डीलर का काम कर रहे हैं। इसी तरह से अजय का छोटा भाई रवि ने पहलवानी शुरू की और वह स्टेट तक पहुंच गया लेकिन बीच में ही पहलवानी छोड दी। इस समय वह दूध की डेयरी का काम कर रहे हैं।
शकर ने डाइट न मिलने पर छोड़ थी पहलवानी
शंकर यादव ने स्टेट तक पहलवानी की और मेडल भी जीते लेकिन डाइट न मिलने के कारण ओर नहीं बढे़ और अब वह दूध की डेयरी चला रहे हैं। खटीक मंडी निवासी रितिक सैलून पर काम कर रहे हैं, गौशाला क्वार्टर निवासी करण सात साल से जूस की रेहड़ी लगा रहे हैं, मुस्लिम कालोनी के अनीश बैंक में रिकवरी का काम कर रहे हैं। खलीफा पहलवान दूध की डेयरी, दलजीत सिंह उर्फ कच्छू पहलवान नामचीन पहलवान थे और साइकिल पर कबाड़ी का काम करते थे जो अब नहीं रहे।
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इसके बाद कई पहलवानों ने बीच में ही कुश्ती छोड़ दी और दूसरे काम अपना लिए। किसी ने मालिश, मरहम पट्टी, प्रोपर्टी डीलर, दूध की डेयरी से लेकर अन्य काम कर रहे और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
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चार बार नेशनल लैवल पर बब्बू कर चुके पहलवानी
पवन कुमार यादव उर्फ बब्बू पहलवान ने बताया कि 1963 में वह 12 साल के थे, तब उन्हाेंने पहलवानी शुरू की थी। उन्होंने उस्ताद हसना पहलवान से पहलवानी के सभी तरह से दांव पेंच सीखे। सन 1968 में पहली बार दंगल लडे़ थे। चार बार नेशनल लड़ चुके हैं। पंजाब के जिला फिरोजपुर में उन्होंने तीन कुश्ती जीतकर ढाई किलोग्राम की चांदी की गदा जीती थी।
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उन्होंने बताया कि सन 1979 में उन्होंने अपने ताया प्यारेलाल यादव और अपने दोस्त उस्ताद बाबू खान से मालिश, पट्टी करने की जानकारी जुटाई। इसके बाद दोस्त बाबू खान ने उन्हें मालिश और की दुकान खोलने की सलाह दी,1980 में शाहबाद की चांद मार्केट में दुकान खोली थी।
पहलवानी में अपने आप को सफलता न मिलने पर उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी कुश्ती में उतारा बड़ा बेटा अमित यादव स्टेट लेबल तक खेला और छोटा बेटा गौरव यादव नेशनल के ट्रायल में रह गया। इसके बाद दोनों बेटो ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और अब वह दोनों पिता के मरहम पट्टी और मालिश का काम संभाल रहे हैं।
रेलवे की नौकरी मिलने के बाद छोड़ी
छावनी के ग्वाल मंडी निवासी अजय पहलवान ने बताया कि वह हरियाणा और नेशनल तक खेले हैं, उनकी रेलवे में नौकरी भी लग गई लेकिन नियुक्ति के समय उन्हें त्वचा की बीमारी हो गई। जिसके कारण व नौकरी नहीं कर पाए और मौजूदा समय में वह प्रॉपर्टी डीलर का काम कर रहे हैं। इसी तरह से अजय का छोटा भाई रवि ने पहलवानी शुरू की और वह स्टेट तक पहुंच गया लेकिन बीच में ही पहलवानी छोड दी। इस समय वह दूध की डेयरी का काम कर रहे हैं।
शकर ने डाइट न मिलने पर छोड़ थी पहलवानी
शंकर यादव ने स्टेट तक पहलवानी की और मेडल भी जीते लेकिन डाइट न मिलने के कारण ओर नहीं बढे़ और अब वह दूध की डेयरी चला रहे हैं। खटीक मंडी निवासी रितिक सैलून पर काम कर रहे हैं, गौशाला क्वार्टर निवासी करण सात साल से जूस की रेहड़ी लगा रहे हैं, मुस्लिम कालोनी के अनीश बैंक में रिकवरी का काम कर रहे हैं। खलीफा पहलवान दूध की डेयरी, दलजीत सिंह उर्फ कच्छू पहलवान नामचीन पहलवान थे और साइकिल पर कबाड़ी का काम करते थे जो अब नहीं रहे।

पवन कुमार यादव उर्फ बब्बू पहलवान