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हीमोफीलिया के इन्हिबिटर मरीजों को अब उनके ही जिले में लगेगा फेक्टर-7 इंजेक्शन
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अंशु शर्मा
अंबाला। प्रदेश में हीमोफीलिया के इन्हिबिटर मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एंटी हीमोफीलिया फेक्टर-7 इंजेक्शन लगाने के लिए उन्हें दूसरे राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उनके शहर के नागरिक अस्पताल में ही उन्हें बाजार में 32 हजार रुपये तक की लागत से लगने वाला यह इंजेक्शन नि:शुल्क लग सकेगा।
हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने मरीजों की मांग को देखते हुए लोकल स्तर पर इसे खरीद के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के 9 जिलों में अभी कुल 14 मरीज सामने आए हैं। इन सभी जिलों के सीएमओ को विभाग की तरफ से यह निर्देश दे दिए गए हैं कि वह आपातकालीन स्थिति में इन इंजेक्शन की अपने स्तर पर खरीदकर उन मरीजों को उपलब्ध करवाएगा, ताकि उनकी जान बच सके।
बता दें कि हीमोफीलिया से ग्रस्त मरीजों के अंदर कुछ ही मरीजों में इन्हिबिटर की शिकायत आती है। हालांकि हीमोफीलिया के मरीजों के लिए एंटी हीमोफीलिया फेक्टर-8 व 9 सरकार द्वारा अस्पतालों में उपलब्ध करवाया जा रहा है, लेकिन फेक्टर-7 केवल इन्हिबिटर के मरीजों को लगता है। -संवाद
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क्या है हीमोफीलिया
ये एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून में थक्के बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून का बहना अपने आप रुक जाता है।
इसलिए पड़ती है फेक्टर-7 इंजेक्शन की जरूरत
बच्चों के खून और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विनीत ने बताया कि हीमोफीलिया-ए के मरीज का जब भी खून बहता है उन्हें विभाग की तरफ से फेक्टर-8 लगाया जाता है। अंबाला में एक बच्चा है, जिसके शरीर में फेक्टर-8 के खिलाफ ही इन्हिबिटर बन रहे हैं। इसीलिए फेक्टर-8 काम नहीं करता। ऐसी स्थिति में उसकी जान बचाने के लिए फेक्टर-7 लगाया जाता है। फेक्टर-7 मरीज के वजन के हिसाब से लगता है। उसी समय पता चलता है कि मरीज को एक इंजेक्शन की जरूरत है या दो से चार तक की। इसी के हिसाब से मरीज के ट्रीटमेंट का खर्च भी बढ़ता जाता है। इस टीके को दो कंपनी बनाती हैं। एक के रेट करीब 24 हजार तो दूसरे के एक इंजेक्शन के करीब 32 हजार रुपये हैं।
पीजीआई रोहत के इन इंजेक्शन की सप्लाई कर दी गई बंद
हीमोफीलिया सोसायटी ने बताया कि हरियाणा में केवल रोहतक पीजीआई के अंदर एंटी हीमोफीलिया का इंजेक्शन फेक्टर-7 उपलब्ध हो जाता था, लेकिन पिछले काफी समय से यह इंजेक्शन बंद हो गया है। इसलिए मजबूरन मरीजों को यह टीका लगवाने के लिए जयपुर व अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। इस बीच उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह प्राइवेट में भी जाकर हजारों रुपये की राशि वाला यह टीका नहीं लगवा सकते हैं। इसको लेकर लंबे समय से मांग की जा रही थी।
यह सोसायटी 2017 से रजिस्टर्ड है। पूरे हरियाणा के हीमोफीलिया मरीजों के लिए लड़ाई लड़ा हूं। एक प्रपोजल विभाग के समक्ष हीमोफीलिया इन्हिबिटर ग्रस्त मरीजों के लिए भेजा गया था। इस पर हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल पंचकूला ने यह फैसला लिया है कि वह आपातकालीन स्थिति में मरीज को लोकल स्तर पर यह टीका खरीदकर लगाया जाए।
- आशुतोष शर्मा, हीमोफीलिया सोसायटी जींद
अंबाला में हीमोफीलिया के इन्हिबिटर मरीज को यह टीका बिलकुल नि:शुल्क लगाया जाएगा। करीब 80 हजार रुपये की लागत से यह टीका स्वास्थ्य विभाग बिलकुल निशुल्क लगाएगा। इसकी लोकल स्तर पर खरीद शुरू कर दी है।
- डॉ. कुलदीप, सीएमओ अंबाला
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अंबाला। प्रदेश में हीमोफीलिया के इन्हिबिटर मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एंटी हीमोफीलिया फेक्टर-7 इंजेक्शन लगाने के लिए उन्हें दूसरे राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उनके शहर के नागरिक अस्पताल में ही उन्हें बाजार में 32 हजार रुपये तक की लागत से लगने वाला यह इंजेक्शन नि:शुल्क लग सकेगा।
हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने मरीजों की मांग को देखते हुए लोकल स्तर पर इसे खरीद के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के 9 जिलों में अभी कुल 14 मरीज सामने आए हैं। इन सभी जिलों के सीएमओ को विभाग की तरफ से यह निर्देश दे दिए गए हैं कि वह आपातकालीन स्थिति में इन इंजेक्शन की अपने स्तर पर खरीदकर उन मरीजों को उपलब्ध करवाएगा, ताकि उनकी जान बच सके।
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बता दें कि हीमोफीलिया से ग्रस्त मरीजों के अंदर कुछ ही मरीजों में इन्हिबिटर की शिकायत आती है। हालांकि हीमोफीलिया के मरीजों के लिए एंटी हीमोफीलिया फेक्टर-8 व 9 सरकार द्वारा अस्पतालों में उपलब्ध करवाया जा रहा है, लेकिन फेक्टर-7 केवल इन्हिबिटर के मरीजों को लगता है। -संवाद
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क्या है हीमोफीलिया
ये एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून में थक्के बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून का बहना अपने आप रुक जाता है।
इसलिए पड़ती है फेक्टर-7 इंजेक्शन की जरूरत
बच्चों के खून और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विनीत ने बताया कि हीमोफीलिया-ए के मरीज का जब भी खून बहता है उन्हें विभाग की तरफ से फेक्टर-8 लगाया जाता है। अंबाला में एक बच्चा है, जिसके शरीर में फेक्टर-8 के खिलाफ ही इन्हिबिटर बन रहे हैं। इसीलिए फेक्टर-8 काम नहीं करता। ऐसी स्थिति में उसकी जान बचाने के लिए फेक्टर-7 लगाया जाता है। फेक्टर-7 मरीज के वजन के हिसाब से लगता है। उसी समय पता चलता है कि मरीज को एक इंजेक्शन की जरूरत है या दो से चार तक की। इसी के हिसाब से मरीज के ट्रीटमेंट का खर्च भी बढ़ता जाता है। इस टीके को दो कंपनी बनाती हैं। एक के रेट करीब 24 हजार तो दूसरे के एक इंजेक्शन के करीब 32 हजार रुपये हैं।
पीजीआई रोहत के इन इंजेक्शन की सप्लाई कर दी गई बंद
हीमोफीलिया सोसायटी ने बताया कि हरियाणा में केवल रोहतक पीजीआई के अंदर एंटी हीमोफीलिया का इंजेक्शन फेक्टर-7 उपलब्ध हो जाता था, लेकिन पिछले काफी समय से यह इंजेक्शन बंद हो गया है। इसलिए मजबूरन मरीजों को यह टीका लगवाने के लिए जयपुर व अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। इस बीच उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह प्राइवेट में भी जाकर हजारों रुपये की राशि वाला यह टीका नहीं लगवा सकते हैं। इसको लेकर लंबे समय से मांग की जा रही थी।
यह सोसायटी 2017 से रजिस्टर्ड है। पूरे हरियाणा के हीमोफीलिया मरीजों के लिए लड़ाई लड़ा हूं। एक प्रपोजल विभाग के समक्ष हीमोफीलिया इन्हिबिटर ग्रस्त मरीजों के लिए भेजा गया था। इस पर हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल पंचकूला ने यह फैसला लिया है कि वह आपातकालीन स्थिति में मरीज को लोकल स्तर पर यह टीका खरीदकर लगाया जाए।
- आशुतोष शर्मा, हीमोफीलिया सोसायटी जींद
अंबाला में हीमोफीलिया के इन्हिबिटर मरीज को यह टीका बिलकुल नि:शुल्क लगाया जाएगा। करीब 80 हजार रुपये की लागत से यह टीका स्वास्थ्य विभाग बिलकुल निशुल्क लगाएगा। इसकी लोकल स्तर पर खरीद शुरू कर दी है।
- डॉ. कुलदीप, सीएमओ अंबाला