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Ambala News: छाती पर गोली लगने के बाद भी मंजीत सिंह ने दुश्मनों का डटकर किया मुकाबला
Tue, 22 Jul 2025 03:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 22 Jul 2025 03:18 AM IST
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अंबाला। छाती पर गोली खाने के बाद भी दुश्मनों से लोहा लेते रहे और मोर्चे पर डटे रहे मंजीत सिंह। जब दोबारा से गोली चली तो वो बलिदान हो गए। मुलाना के कांसापुर गांव के शहीद मंजीत सिंह के पिता गुरचरण सिंह व मां सुरजीत कौर का अपने बेटे के बलिदान पर गर्व है और वो आज भी उसकी यादों को अपनी आंखों में संजोए हुए हैं। वहीं गांव वासियों को भी मंजीत सिंह की शहादत पर नाज है और आज भी उन्हें सिंह सूरमे की तरफ सम्मान दिया जाता है।
कारगिल के पहले बलिदानी थे मंजीत सिंह
कारगिल युद्ध में प्रदेश से पहले बलिदानी मंजीत सिंह हुए। मंजीत सिंह वर्ष 1998 में आठ-सिख रेजिमेंट अल्फा कंपनी में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती कारगिल में थी। इस दौरान जब पाकिस्तान ने हमला किया तो मंजीत सिंह ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर दुश्मनों का मुकाबला किया। 7 जून 1999 को टाइगर हिल में गोली बारी के दौरान वो देश के लिए बलिदान हो गए।
साढ़े 18 साल थी आयु
कांसापुर गांव के मंजीत सिंह ने कारगिल युद्ध में मात्र साढ़े 18 साल की आयु में बलिदान पाया। सरकार ने शहीद के परिवार को आर्थिक मदद दी और अब उनके नाम पर एक गैस एजेंसी भी चल रही है। बलिदानी मंजीत सिंह करीब 17 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। उनके गांव में आज भी उनके जोश व जज्बे की मिसाल दी जाती है, वो गांव के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत भी हैं।
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कारगिल के पहले बलिदानी थे मंजीत सिंह
कारगिल युद्ध में प्रदेश से पहले बलिदानी मंजीत सिंह हुए। मंजीत सिंह वर्ष 1998 में आठ-सिख रेजिमेंट अल्फा कंपनी में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती कारगिल में थी। इस दौरान जब पाकिस्तान ने हमला किया तो मंजीत सिंह ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर दुश्मनों का मुकाबला किया। 7 जून 1999 को टाइगर हिल में गोली बारी के दौरान वो देश के लिए बलिदान हो गए।
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साढ़े 18 साल थी आयु
कांसापुर गांव के मंजीत सिंह ने कारगिल युद्ध में मात्र साढ़े 18 साल की आयु में बलिदान पाया। सरकार ने शहीद के परिवार को आर्थिक मदद दी और अब उनके नाम पर एक गैस एजेंसी भी चल रही है। बलिदानी मंजीत सिंह करीब 17 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। उनके गांव में आज भी उनके जोश व जज्बे की मिसाल दी जाती है, वो गांव के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत भी हैं।
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