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Ambala News: बिजलीकर्मियों ने लिपिक के निलंबन के खिलाफ दो घंटे बंद रखा काम
Wed, 16 Jul 2025 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Wed, 16 Jul 2025 02:48 AM IST
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अंबाला। लिपिक के निलंबन को लेकर दूसरे दिन भी बिजली कर्मचारियों ने दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कर्मचारी की बहाली न हुई तो पूरे जिले की सब डिविजनों पर यह धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। धरने प्रदर्शन की अध्यक्षता सब यूनिट में उप प्रधान रोशन लाल और मंच का संचालन सब यूनिट सचिव गुरमीत सिंह ने किया।
बर्फखाने की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर बिजली कर्मचारी अनभिज्ञ थे, यही कारण रहा कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन पर एसडीओ की ओर से की गई कार्रवाई को सही मान लिया और बिजली का मीटर काट दिया। अब उन्हें जानकारी मिली है कि यह विवाद राज्य सरकार और संपत्ति पर मालिकाना हक जताने वाले व्यक्ति के बीच है तो वो भी अब फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं ताकि बर्फखाने की जमीन से जुड़े विवाद में उनके किसी अन्य कर्मचारी पर गाज न गिरे। सब यूनिट प्रधान बलवंत यादव ने बताया कि लिपिक गुरविंदर को निलंबित करने की वजह अधिकारियों द्वारा ये बताई जा रही है कि उपभोक्ता को पहले नोटिस देकर फिर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी। अधिकारियों का यह तर्क भ्रम की स्थिति उत्पन्न करता है। कर्मचारियों पर थोपी गए राइट टू सर्विस एक्ट में मीटर पीडीसीओ के लिए सात दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद अगर सात दिन में मीटर उतार कर उसका खाता बंद नहीं किया जाता तो संबंधित कर्मचारियों को पत्र जारी करके जवाब मांगा जाता है।
रुटीन में नहीं नोटिस की प्रक्रिया : सब यूनिट प्रधान ने बताया कि रुटीन में किसी भी कार्यालय में नोटिस की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। मौके पर अगर कोई मीटर उतारने का विरोध करता है तो प्रक्रिया रोक दी जाती है और फिर उपभोक्ता को कारण के साथ नोटिस दिया जाता है। लेकिन जब संबंधित मीटर को मौके से उतारा गया तो कोई विरोध नहीं हुआ क्योंकि जिस साइट पर यह मीटर लगा हुआ था, वह खंडहर है और दूसरे मकान की छत गिरी हुई है जबकि मौके पर गेट का ताला लगा हुआ था क्योंकि जगह का कब्जा न्यायालय के निर्देशानुसार उसी उपभोक्ता का था, जिसने मीटर उतरवाने के लिए पत्र दिया था। संवाद
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बर्फखाने की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर बिजली कर्मचारी अनभिज्ञ थे, यही कारण रहा कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन पर एसडीओ की ओर से की गई कार्रवाई को सही मान लिया और बिजली का मीटर काट दिया। अब उन्हें जानकारी मिली है कि यह विवाद राज्य सरकार और संपत्ति पर मालिकाना हक जताने वाले व्यक्ति के बीच है तो वो भी अब फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं ताकि बर्फखाने की जमीन से जुड़े विवाद में उनके किसी अन्य कर्मचारी पर गाज न गिरे। सब यूनिट प्रधान बलवंत यादव ने बताया कि लिपिक गुरविंदर को निलंबित करने की वजह अधिकारियों द्वारा ये बताई जा रही है कि उपभोक्ता को पहले नोटिस देकर फिर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी। अधिकारियों का यह तर्क भ्रम की स्थिति उत्पन्न करता है। कर्मचारियों पर थोपी गए राइट टू सर्विस एक्ट में मीटर पीडीसीओ के लिए सात दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद अगर सात दिन में मीटर उतार कर उसका खाता बंद नहीं किया जाता तो संबंधित कर्मचारियों को पत्र जारी करके जवाब मांगा जाता है।
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रुटीन में नहीं नोटिस की प्रक्रिया : सब यूनिट प्रधान ने बताया कि रुटीन में किसी भी कार्यालय में नोटिस की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। मौके पर अगर कोई मीटर उतारने का विरोध करता है तो प्रक्रिया रोक दी जाती है और फिर उपभोक्ता को कारण के साथ नोटिस दिया जाता है। लेकिन जब संबंधित मीटर को मौके से उतारा गया तो कोई विरोध नहीं हुआ क्योंकि जिस साइट पर यह मीटर लगा हुआ था, वह खंडहर है और दूसरे मकान की छत गिरी हुई है जबकि मौके पर गेट का ताला लगा हुआ था क्योंकि जगह का कब्जा न्यायालय के निर्देशानुसार उसी उपभोक्ता का था, जिसने मीटर उतरवाने के लिए पत्र दिया था। संवाद
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