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Ambala News: बिजली निगम के 12.59 लाख के फंड व सामान का गबन, ठेकेदार नामजद
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नारायणगढ़। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम नारायणगढ़ उपमंडल के तहत लाखों रुपये के सरकारी बजट व सामान का गबन करने पर मामला सामने आया है। जनता को प्रताड़ित व काम अधूरा छोड़कर भागने वाली निजी ठेकेदार फर्म के खिलाफ नारायणगढ़ थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
यह कार्रवाई एसडीओ सुमन कुमार की तहरीर पर करनाल की फर्म मेसर्स एसआर इलेक्ट्रिकल्स के प्रोपराइटर सतनाम और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ हुई है। धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के तहत पुलिस कार्रवाई कर जांच में जुट गई है।
लाखों रुपये के तीन वर्क ऑर्डर हुए थे जारी
नारायणगढ़ एसडीओ एसडीओ सुमन कुमार ने बताया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने करनाल सेक्टर-13, ओल्ड हाउसिंग बोर्ड स्थित फर्म मेसर्स एसआर इलेक्ट्रिकल्स को नारायणगढ़ उप-मण्डल के तहत टर्नकी आधार पर निम्नलिखित तीन प्रमुख कार्य आदेश जारी किए थे। इनमें वर्क ऑर्डर नंबर 515- 8 अप्रैल 2025 वीडीएस योजना के तहत अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने का कार्य 9 लाख 33 हजार 504 रुपये में करने का था। दूसरा वर्क ऑर्डर नंबर 16- 30 मई 2025 को जारी हुआ था। इसमें 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2023 तक के 69 लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य 10 लाख 35 हजार 980 में था। तीसरा वर्क ऑर्डर नंबर 531 - 21 अप्रैल 2025 को जारी हुआ था। इसमें 93 लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य 59 लाख 3 हजार 402 रुपये में करना था।
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सामान व 50 प्रतिशत भुगतान लेने के बाद भी नहीं किया काम
नारायणगढ़ एसडीओ एसडीओ सुमन कुमार का आरोप है कि अनुबंध के तहत निगम ने फर्म को स्टोर से कीमती सरकारी सामग्री पोल, तार, ट्रांसफार्मर आदि सौंपी गई थी। खरीदी गई सामग्री के सत्यापन के बाद 50 प्रतिशत एडवांस भुगतान भी जारी कर दिया। लेकिन राशि व सरकारी सामान हासिल करने के बाद आरोपी फर्म ने काम बंद कर दिया। साथ ही जानबूझकर देरी करनी शुरू कर दी। विभाग द्वारा जब विभिन्न साइटों व फर्म के गोदामों की भौतिक जांच की गई तो भारी गबन व गड़बड़ियां पाई गईं।
इसमें पाया गया कि फर्म ने जिस सामग्री व काम के नाम पर निगम से भुगतान लिया था, वह सामग्री न तो मौके पर लगाई गई थी और न ही गोदाम में मौजूद थी। कई सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स को आधा-अधूरा बनाकर लावारिस छोड़ दिया गया था। जिन किसानों व उपभोक्ताओं ने ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए पूरा पैसा जमा कराया था, वह कनेक्शन न मिलने से महीनों तक परेशान होते रहे।
निगम की प्राथमिक जांच में पाया गया कि आरोपी फर्म ने 12 लाख 59 हजार 90 रुपये के सरकारी फंड और विभागीय सामान का गबन करके अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया है। जांच अधिकारी सहायक उप-निरीक्षक प्रेमपाल ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
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यह कार्रवाई एसडीओ सुमन कुमार की तहरीर पर करनाल की फर्म मेसर्स एसआर इलेक्ट्रिकल्स के प्रोपराइटर सतनाम और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ हुई है। धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के तहत पुलिस कार्रवाई कर जांच में जुट गई है।
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लाखों रुपये के तीन वर्क ऑर्डर हुए थे जारी
नारायणगढ़ एसडीओ एसडीओ सुमन कुमार ने बताया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने करनाल सेक्टर-13, ओल्ड हाउसिंग बोर्ड स्थित फर्म मेसर्स एसआर इलेक्ट्रिकल्स को नारायणगढ़ उप-मण्डल के तहत टर्नकी आधार पर निम्नलिखित तीन प्रमुख कार्य आदेश जारी किए थे। इनमें वर्क ऑर्डर नंबर 515- 8 अप्रैल 2025 वीडीएस योजना के तहत अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने का कार्य 9 लाख 33 हजार 504 रुपये में करने का था। दूसरा वर्क ऑर्डर नंबर 16- 30 मई 2025 को जारी हुआ था। इसमें 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2023 तक के 69 लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य 10 लाख 35 हजार 980 में था। तीसरा वर्क ऑर्डर नंबर 531 - 21 अप्रैल 2025 को जारी हुआ था। इसमें 93 लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का कार्य 59 लाख 3 हजार 402 रुपये में करना था।
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सामान व 50 प्रतिशत भुगतान लेने के बाद भी नहीं किया काम
नारायणगढ़ एसडीओ एसडीओ सुमन कुमार का आरोप है कि अनुबंध के तहत निगम ने फर्म को स्टोर से कीमती सरकारी सामग्री पोल, तार, ट्रांसफार्मर आदि सौंपी गई थी। खरीदी गई सामग्री के सत्यापन के बाद 50 प्रतिशत एडवांस भुगतान भी जारी कर दिया। लेकिन राशि व सरकारी सामान हासिल करने के बाद आरोपी फर्म ने काम बंद कर दिया। साथ ही जानबूझकर देरी करनी शुरू कर दी। विभाग द्वारा जब विभिन्न साइटों व फर्म के गोदामों की भौतिक जांच की गई तो भारी गबन व गड़बड़ियां पाई गईं।
इसमें पाया गया कि फर्म ने जिस सामग्री व काम के नाम पर निगम से भुगतान लिया था, वह सामग्री न तो मौके पर लगाई गई थी और न ही गोदाम में मौजूद थी। कई सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स को आधा-अधूरा बनाकर लावारिस छोड़ दिया गया था। जिन किसानों व उपभोक्ताओं ने ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए पूरा पैसा जमा कराया था, वह कनेक्शन न मिलने से महीनों तक परेशान होते रहे।
निगम की प्राथमिक जांच में पाया गया कि आरोपी फर्म ने 12 लाख 59 हजार 90 रुपये के सरकारी फंड और विभागीय सामान का गबन करके अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया है। जांच अधिकारी सहायक उप-निरीक्षक प्रेमपाल ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।