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Ambala News: महापर्व का हिस्सा बने बुजुर्ग और युवा, महिलाओं का जोश बना प्रेरणा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2024 05:29 AM IST
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Elders and youth became part of the great festival, enthusiasm of women became inspiration
अंबाला। मतदान के महापर्व का हिस्सा बनने के लिए युवा से लेकर बुजुर्ग आतुर रहे। शनिवार सुबह ही मतदाता अपने-अपने केंद्रों पर पहुंच गए थे और उनमें उत्साह देखते ही बनता था। गर्मी के तेवरों के कारण मतदाताओं का यह उत्साह कुछ कम हुआ।
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इस कारण कई जगह बूथ खाली नजर आए, लेकिन जैसे-जैसे मतदान के समय का अंतिम दौर आया तो काफी संख्या में मतदाता अपने बूथों पर पहुंच गए और लाइनों में लगकर मतदान का इंतजार करते रहे। पोलिंग पार्टियों ने भी शाम छह बजे तक आए मतदाताओं के मत डलवाए।
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इस दौरान बुजुर्ग भी पूरे जोश के साथ मतदान करते नजर आए, जबकि पहली बार परिजनों संग मतदान करने आए युवा मतदाताओं की खुशी देखते ही बनती थी। कोई सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करने के मकसद से सेल्फी खींचता नजर आया तो कोई अंगुली का निशान दिखाकर अन्य मतदाताओं को प्रेरित करते हुए।
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इस दौरान कुछ उत्साहित परिवार भी मतदान के इस महापर्व का हिस्सा बनकर काफी खुश नजर आए और मतदान के बाद उन्होंने उंगली पर लगी स्याही दिखाते हुए सेल्फी भी ली। इस पूरे मतदान के दौरान महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी अधिक नजर आई और वो घर के काम-धंधे छोड़कर आस-पड़ोस की महिलाओं को भी साथ लेकर मतदान के लिए पहुंची।
अव्यवस्थाओं के बीच डाला वोट
एक तरफ जहां अधिकतर जगह व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के दावे सही साबित हुए तो दूसरी तरफ कुछ स्कूल ऐसे भी थे, जहां न तो पीने का पानी, न व्हीलचेयर और न शामियाना। लोग प्यासे ही लाइनों में नजर आए और दिव्यांग भी गिरते-पड़ते मतदान केंद्र तक पहुंचे। भीषण गर्मी और कड़ी धूप में ही मतदाता घंटों सरकारी स्कूलों के बाहर खड़े नजर आए।
ऐसे हालात अंबाला छावनी के रंगिया मंडी स्कूल, तोपखाना परेड के स्कूल और घसीटपुर के राजकीय प्राथमिक स्कूल में देखने को मिले। इस दौरान यह भी सामने आया कि बकरा मार्केट के स्कूल में परिजनों संग पहुंचा बच्चा घायल हो गया, लेकिन उसे यहां प्राथमिक उपचार नहीं मिला। मजबूरन परिजनों को बिना वोट डाले ही बच्चे को लेकर उपचार के लिए जाना पड़ा।
बुजुर्ग बोले, फिर मिले न मिले मौका
मतदान के दौरान 65 से लेकर 90 वर्ष तक के बुजुर्ग काफी उत्साहित नजर आए। सभी ने इसे सबसे जरूरी काम बताया कि इसे छुट्टी न मानकर एक जिम्मेदारी निभाने का फर्ज निभाया, जिससे कि पढ़ी-लिखी सरकार का समाज की उन्नति और तरक्की के लिए चयन हो सके। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि उम्र का आखिरी पड़ाव है, फिर मौका नहीं मिलेगा। इस दौरान ऐसे भी मतदाता आए जिनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थी और कुछ पैरों से भी लाचार थे, लेकिन मतदान के दौरान उनका उत्साह देखते ही बनता था और उनकी इस सपने को परिजनों ने मिलकर पूरा किया।
ई-रिक्शा पर झंडा देख भड़के कांग्रेसी
मतदान के दौरान पुलिस ने मोबाइल को बूथ पर नहीं ले जाने दिया। हालांकि ज्यादा गंभीर मरीज व कुछ दिव्यांगों को जरूर बूथ पर जाने के लिए छूट दी। इस दौरान बकरा मार्केट स्कूल में जब ई-रिक्शा पर लगे भाजपा झंडे के साथ कुछ मतदाता पहुंचे तो पुलिस भी हैरान परेशान हो गई। वहीं इसे देखकर कांग्रेसी भी भड़क गए। आनन-फानन में पुलिस ने भाजपा का झंडा उतरवाया, हालांकि ई-रिक्शा के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
एक व्हील चेयर के सहारे अधिकतर दिव्यांग
मतदान के दौरान प्रत्येक स्कूल में एक व्हील चेयर प्रशासन की ओर से पहुंचाई गई थी, लेकिन दिव्यांगों के आगे यह सुविधा नाममात्र नजर आई और रेडक्राॅस के कर्मचारी व्हीलचेयर को एक से दूसरी जगह तलाश करते नजर आए। प्रर्याप्त व्हीलचेयर न होने के कारण दिव्यांग मतदाताओं को कुछ इंतजार भी करना पड़ा।
पिता के साथ ली सेल्फी
अंबाला छावनी के द एसडी विद्या स्कूल में बनाए गए पिंक बूथ पर आई महिलाएं काफी उत्साहित नजर आई। यहां स्कूल प्रशासन की तरफ से उनके लिए जूस व मीठी लस्सी का प्रबंध किया गया था। मतदान के बाद उन्होंने स्कूल में ही बनाए सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी भी ली। इसी मतदान केंद्र पर पहुंचे तेली मंडी निवासी 18 वर्षीय निखिल ने मतदान के बाद अपने पिता त्रिलोक चंद के साथ सेल्फी लेकर इसे जिंदगी का सबसे यादगार पल बताया।
पानी खत्म, महिला को आए चक्कर
तोपखाना में छावनी परिषद के स्कूल में बनाए गए बूथ नंबर 49 से 51 में भी काफी संख्या में मतदाता पहुंचे। लेकिन यहां पानी के लिए रखे कैंपर खाली हो गए और बिना पानी के एक दो महिलाएं लाइनों में खड़े-खड़े ही चक्कर खाकर गिर गई, जिन्हें दूसरी महिलाओं ने संभाला और फिर इसके बाद खाली कैंपर को हटाकर भरे कैंपर रखे।

दोपहर को खाली नजर आए कुछ बूथ
जैसे-जैसे दिन का तापमान चढ़ता रहा, वैसे-वैसे मतदाताओं के उत्साह में भी काफी कमी नजर आई। दोपहर एक से दो बजे के बीच बीसी बाजार में बनाए गए बूथ नंबर 74, सदर बाजार के सरकारी के बूथ नंबर 75 और बीएस मेमोरियल के कुछ बूथों पर नाममात्र ही मतदाता नजर आए। हालांकि शाम तक एक बार फिर इन बूथों पर मतदाताओं की रौनक लग गई थी।
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