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सोते रहे अफसर और नदी में बन गया स्कूल, आंखें मूंद शिक्षा विभाग ने भी दे दी मान्यता
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सोते रहे अफसर और नदी में बन गया स्कूल, शिक्षा विभाग ने भी दे दी मान्यता
फोटो: 01,02- मिडल तक की मान्यता लेकर 12वीं तक की लग रही कक्षाएं
- कांग्रेस सरकार में नेताओं ने दी कई लाख रुपये ग्रांट, भाजपा सरकार में भी मंत्री का रहा स्कूल में आना-जाना
उमेश भार्गव
अंबाला/शहजादपुर। पंचायती राज विभाग के साथ जिला नगर विभाग भी नींद में सोता रहा और नदी में स्कूल बन गया। न केवल स्कूल बनकर तैयार हुआ बल्कि प्रबंधन ने शिक्षा विभाग से नदी के बीच तैयार मां भगवती निकेतन मिडिल स्कूल को चलाने की मान्यता भी ले ली। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी स्कूल संचालकों पर इतने मेहरबान हुए कि बिना स्कूल की जगह देखे ही स्कूल को आठवीं तक की मान्यता दे दी। हद तो तब हो गई जब मिडिल तक की मान्यता लेकर स्कूल में 12वीं तक की कक्षाएं शुरू कर दी और कािसी ने फिर भी कार्रवाई नहीं की। मामले की शिकायत खंड पंचायत अधिकारी, एसडीएम और सिंचाई विभाग को भी की गई लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब मामले ने तूल पकड़ लिया तो कुंभकर्णी नींद से जागे सिंचाई विभाग ने कई वर्षों बाद इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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नदी के बहाव को रोकने के लिए बना दी 600 मीटर लंबी दीवार
दरअसल शहजादपुर के नजदीक टांगरी नदी की सहायक अमरी नदी बहती है।इसी नदी में बीचोंबीच मां भगवती निकेतन स्कूल बना है। स्कूल संचालकों ने नदी के बहाव को रोकने के लिए करीब 600 मीटर लंबी और 10 फुट ऊंची दीवार बना दी। बता दें कि कांग्रेस सरकार में बने इस स्कूल को पहले कांग्रेसी नेताओं ने ग्रांट दी फिर भाजपा सरकार के मंत्री भी स्कूल में खूब गए।
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कैसे दी नदी की जमीन में बनाए अवैध स्कूल को मान्यता
सिंचाई विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को जारी किए गए नोटिस में डीईओ से पूछा गया है कि नदी की जमीन में बनाए गए स्कूल को मान्यता कैसे दे दी गई। न ही मान्यता देते हुए विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी समझा गया जोकि नहरी विभाग से लेना अनिवार्य था।
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स्कूल की मान्यता पर पुन: विचार करने के लिए लिखा
सिंचाई विभाग के एक्सईएन द्वारा 13 नंवबर को जारी पत्र में जिला शिक्षा अधिकारी को कहा गया है कि इस स्कूल की मान्यता के बारे में पुन: विचार किया जाए ताकि भविष्य में बच्चों की जान को खतरा व आसपास के क्षेत्र को बाढ़ के बचाव से सुरक्षित किया जा सके।
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नदी में बहाव में पैदा किया अवरोध
नदी के बहाव से स्कूल को बचाने के लिए दीवार बना दी गई। साथ ही यहां से पानी की निकासी के लिए पाइप डाल दिए। ऐसे में जब नदी का पानी यहां आता है तो पाइप के जरिए आगे किसानों के खेतों में घुस जाता है। इसलिए किसानों ने मिट्टी डालकर वहां भरत कर दिया। इस तरह स्कूल और उन किसानों की वजह से आसपास के एरिया में कभी भी बाड़ आ सकती है।
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यह मामला जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी का है। जहां तक स्कूल पर सीनियर सेकेंडरी का बोर्ड लगा है तो इस मामले की टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी।
उमा शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी।
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मेरे संज्ञान में यह मामला आ चुका है। इस पर हमने एक्शन भी लिया है। लेकिन क्या कार्रवाई की गई है वह कार्यालय में जाकर ही बताई जा सकेगी।
रमेश कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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फोटो: 01,02- मिडल तक की मान्यता लेकर 12वीं तक की लग रही कक्षाएं
- कांग्रेस सरकार में नेताओं ने दी कई लाख रुपये ग्रांट, भाजपा सरकार में भी मंत्री का रहा स्कूल में आना-जाना
उमेश भार्गव
अंबाला/शहजादपुर। पंचायती राज विभाग के साथ जिला नगर विभाग भी नींद में सोता रहा और नदी में स्कूल बन गया। न केवल स्कूल बनकर तैयार हुआ बल्कि प्रबंधन ने शिक्षा विभाग से नदी के बीच तैयार मां भगवती निकेतन मिडिल स्कूल को चलाने की मान्यता भी ले ली। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी स्कूल संचालकों पर इतने मेहरबान हुए कि बिना स्कूल की जगह देखे ही स्कूल को आठवीं तक की मान्यता दे दी। हद तो तब हो गई जब मिडिल तक की मान्यता लेकर स्कूल में 12वीं तक की कक्षाएं शुरू कर दी और कािसी ने फिर भी कार्रवाई नहीं की। मामले की शिकायत खंड पंचायत अधिकारी, एसडीएम और सिंचाई विभाग को भी की गई लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब मामले ने तूल पकड़ लिया तो कुंभकर्णी नींद से जागे सिंचाई विभाग ने कई वर्षों बाद इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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नदी के बहाव को रोकने के लिए बना दी 600 मीटर लंबी दीवार
दरअसल शहजादपुर के नजदीक टांगरी नदी की सहायक अमरी नदी बहती है।इसी नदी में बीचोंबीच मां भगवती निकेतन स्कूल बना है। स्कूल संचालकों ने नदी के बहाव को रोकने के लिए करीब 600 मीटर लंबी और 10 फुट ऊंची दीवार बना दी। बता दें कि कांग्रेस सरकार में बने इस स्कूल को पहले कांग्रेसी नेताओं ने ग्रांट दी फिर भाजपा सरकार के मंत्री भी स्कूल में खूब गए।
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कैसे दी नदी की जमीन में बनाए अवैध स्कूल को मान्यता
सिंचाई विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को जारी किए गए नोटिस में डीईओ से पूछा गया है कि नदी की जमीन में बनाए गए स्कूल को मान्यता कैसे दे दी गई। न ही मान्यता देते हुए विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी समझा गया जोकि नहरी विभाग से लेना अनिवार्य था।
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स्कूल की मान्यता पर पुन: विचार करने के लिए लिखा
सिंचाई विभाग के एक्सईएन द्वारा 13 नंवबर को जारी पत्र में जिला शिक्षा अधिकारी को कहा गया है कि इस स्कूल की मान्यता के बारे में पुन: विचार किया जाए ताकि भविष्य में बच्चों की जान को खतरा व आसपास के क्षेत्र को बाढ़ के बचाव से सुरक्षित किया जा सके।
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नदी में बहाव में पैदा किया अवरोध
नदी के बहाव से स्कूल को बचाने के लिए दीवार बना दी गई। साथ ही यहां से पानी की निकासी के लिए पाइप डाल दिए। ऐसे में जब नदी का पानी यहां आता है तो पाइप के जरिए आगे किसानों के खेतों में घुस जाता है। इसलिए किसानों ने मिट्टी डालकर वहां भरत कर दिया। इस तरह स्कूल और उन किसानों की वजह से आसपास के एरिया में कभी भी बाड़ आ सकती है।
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यह मामला जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी का है। जहां तक स्कूल पर सीनियर सेकेंडरी का बोर्ड लगा है तो इस मामले की टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी।
उमा शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी।
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मेरे संज्ञान में यह मामला आ चुका है। इस पर हमने एक्शन भी लिया है। लेकिन क्या कार्रवाई की गई है वह कार्यालय में जाकर ही बताई जा सकेगी।
रमेश कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।